चलती कार, बस या ट्रेन में बैठते ही क्यों आने लगती है नींद? वजह जानकर हैरान रह जाएंगे

चलती कार, बस या ट्रेन में कई लोगों को जल्दी नींद आने लगती है. इसकी वजह वाहन का हल्का कंपन, इंजन की लगातार आवाज, शरीर का आराम की स्थिति में होना और दिमाग का कम सक्रिय होना है. ये सभी चीजें मिलकर शरीर को रिलैक्स करती हैं, जिससे झपकी आने लगती है.

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अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. ( Photo: ITG) अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:48 AM IST

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि कार, बस या ट्रेन में बैठते ही कुछ ही मिनटों में आंखें भारी होने लगती हैं? कई बार तो गाड़ी चलने के 10–15 मिनट के अंदर ही झपकी आने लगती है. सबसे हैरानी की बात यह है कि ऐसा तब भी होता है, जब आपने रात में पूरी और अच्छी नींद ली हो. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर सफर शुरू होते ही नींद क्यों आने लगती है? क्या यह किसी बीमारी का संकेत है या फिर इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह है?

अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. ज्यादातर मामलों में यह बिल्कुल सामान्य बात होती है. इसकी वजह हमारे शरीर और दिमाग का काम करने का तरीका है. जब कार, बस या ट्रेन एक जैसी रफ्तार से चलती रहती है, तो उसका हल्का-हल्का कंपन और इंजन की लगातार आने वाली आवाज शरीर और दिमाग को आराम का एहसास कराती है. अगर सीट आरामदायक हो और आपको किसी काम पर ध्यान भी न देना पड़े, तो शरीर धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगता है. यही कारण है कि सफर के दौरान कई लोगों को अपने आप नींद आने लगती है.

सफर में नींद आने के पीछे ये साइंटिफिक कारण माने जाते हैं:

1. गाड़ी का लगातार हिलना (Rocking Sensation)
जब कार, बस या ट्रेन एक जैसी स्पीड में हिलती-चलती है, तो शरीर को आराम महसूस होने लगता है. इससे शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है, जो तनाव कम करके शरीर को रिलैक्स करता है. यही वजह है कि सफर के दौरान जल्दी नींद आने लगती है.

2. इंजन की लगातार आने वाली आवाज (White Noise)
गाड़ी के इंजन और टायरों से निकलने वाली लगातार हल्की आवाज एक तरह का व्हाइट नॉइस पैदा करती है. यह आवाज आसपास के दूसरे शोर को दबा देती है, जिससे दिमाग शांत रहता है और नींद आने की संभावना बढ़ जाती है.

3. बाहर का एक जैसा नजारा (Monotony)
सफर के दौरान खिड़की से लगातार सड़क, पेड़, खेत या इमारतों को तेजी से गुजरते हुए देखने पर आंखों और दिमाग को एक जैसी चीजें बार-बार दिखाई देती हैं. इस वजह से दिमाग की सक्रियता कम होने लगती है और वह आराम की स्थिति में पहुंच जाता है, जिससे सुस्ती और नींद महसूस होती है.

4. ताजी हवा की कमी
अगर कार के शीशे लंबे समय तक बंद रहें या बस में बहुत ज्यादा भीड़ हो, तो अंदर ताजी हवा का प्रवाह कम हो सकता है. इससे ऑक्सीजन का स्तर थोड़ा घट सकता है, जिसके कारण शरीर में थकान, सुस्ती और नींद जैसा एहसास होने लगता है.

क्या ड्राइवर को भी इसी वजह से नींद आती है?
ड्राइवर के साथ स्थिति थोड़ी अलग होती है. उसे लगातार सड़क, ट्रैफिक और वाहन पर ध्यान देना पड़ता है, इसलिए उसका दिमाग सक्रिय रहता है. लेकिन अगर लंबी दूरी तक बिना रुके ड्राइविंग की जाए, नींद पूरी न हुई हो या बहुत देर तक एक जैसी सड़क पर गाड़ी चलाई जाए, तो ड्राइवर को भी नींद आ सकती है. यही वजह है कि लंबी ड्राइव के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेने की सलाह दी जाती है.

क्या हर किसी को सफर में नींद आती है?
यह व्यक्ति की नींद, थकान, उम्र, सफर के समय और शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है. कुछ लोगों को सफर शुरू होते ही नींद आ जाती है, जबकि कुछ लोग पूरे रास्ते जागते रहते हैं. चलती कार, बस या ट्रेन में नींद आने के पीछे कई कारण मिलकर काम करते हैं. वाहन का हल्का कंपन, लगातार एक जैसी आवाज, आरामदायक बैठने की स्थिति और दिमाग का कम सक्रिय होना शरीर को आराम का संकेत देते हैं. इसलिए सफर शुरू होते ही कई लोगों की आंखें अपने आप बंद होने लगती हैं. यह एक सामान्य और प्राकृतिक प्रतिक्रिया है.

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