कई लोगों को आपने देखा होगा कि वे एक नहीं, बल्कि दोनों हाथों की कई उंगलियों में अंगूठियां पहनते हैं. पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि वे सिर्फ फैशन करना चाहते हैं या लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं. लेकिन साइकोलॉजी के अनुसार, हर बार ऐसा नहीं होता. कई लोगों के लिए अंगूठियां सिर्फ गहना नहीं, बल्कि उनकी पहचान, यादों और इमोशन का हिस्सा होती हैं. साइकोलॉजी के अनुसार इंसान अक्सर उन चीजों से इमोशनल रिश्ता बना लेता है, जो उसकी जिंदगी के किसी खास पल से जुड़ी होती हैं. इसलिए कुछ लोग रोज वही अंगूठियां पहनते हैं और बिना उन्हें पहने अधूरा महसूस करते हैं. आइए जानते हैं कि इसके पीछे कौन-कौन सी साइकोलॉजिकल वजहें हो सकती हैं.
अंगूठियां बन जाती हैं पहचान का हिस्सा
साइकोलॉजी की एक थ्योरी के अनुसार, कई बार हमारी पसंदीदा चीजें हमारी पहचान का हिस्सा बन जाती हैं. जैसे कोई व्यक्ति अपने दादा-दादी की दी हुई अंगूठी पहनता है या किसी बड़े अचीवमेंट की याद में खरीदी गई अंगूठी हमेशा अपने पास रखता है. समय के साथ वह अंगूठी सिर्फ एक गहना नहीं रहती, बल्कि उसकी जिंदगी की कहानी का हिस्सा बन जाती है.
हर अंगूठी की अपनी एक कहानी होती है
हर अंगूठी का मतलब एक जैसा नहीं होता. किसी के लिए वह प्यार की निशानी हो सकती है, तो किसी के लिए परिवार, दोस्ती, मेहनत, आध्यात्मिक विश्वास या किसी खास उपलब्धि का प्रतीक. इसलिए कई लोग अलग-अलग वजहों से कई अंगूठियां पहनते हैं. बाहर से देखने वाले को यह सिर्फ फैशन लग सकता है, लेकिन पहनने वाले के लिए हर अंगूठी की अपनी अलग अहमियत होती है.
यादों को हमेशा अपने साथ रखना चाहते हैं
कुछ लोग ऐसी अंगूठियां पहनते हैं जो उन्हें किसी खास इंसान या यादगार पल की याद दिलाती हैं. जैसे किसी प्रिय दोस्त का दिया हुआ तोहफा, परिवार की विरासत या किसी यात्रा से खरीदी गई अंगूठी. जब भी उनकी नजर उस अंगूठी पर पड़ती है, उनसे जुड़ी यादें फिर से ताजा हो जाती हैं. यही वजह है कि वे उन्हें उतारना पसंद नहीं करते.
अपनी पर्सनैलिटी जाहिर करने का तरीका
हम जिस तरह के कपड़े पहनते हैं, हेयरस्टाइल रखते हैं या ज्वेलरी चुनते हैं, उससे हमारी पसंद और व्यक्तित्व की झलक मिलती है. कुछ लोगों को बड़ी और आकर्षक अंगूठियां पसंद होती हैं, जबकि कुछ लोग बेहद साधारण डिजाइन चुनते हैं. यह जरूरी नहीं कि इससे किसी की पूरी पर्सनैलिटी पता चल जाए, लेकिन यह जरूर दिखता है कि वह खुद को किस तरह पेश करना चाहता है.
रोज पहनने की आदत भी बन जाती है वजह
अगर कोई व्यक्ति कई सालों से रोज एक जैसी अंगूठियां पहन रहा है, तो वह उसकी आदत का हिस्सा बन जाती हैं. मनोविज्ञान बताता है कि जिन चीजों के साथ हम रोज रहते हैं, उनसे अपनापन महसूस होने लगता है. ऐसे में अगर एक दिन वह अंगूठी न पहनी जाए, तो व्यक्ति को ऐसा लग सकता है कि कुछ कमी है, भले ही दूसरे लोगों को इसका एहसास न हो.
क्या ज्यादा अंगूठियां पहनने वाले लोग ध्यान खींचना चाहते हैं?
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि किसी व्यक्ति के बारे में सिर्फ उसकी अंगूठियों को देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि वह दिखावा कर रहा है. कई लोग सिर्फ इसलिए कई अंगूठियां पहनते हैं क्योंकि वे उनसे इमोशनल रूप से जुड़े होते हैं, वे उनकी पहचान का हिस्सा बन चुकी होती हैं या उन्हें आत्मविश्वास और सुकून का एहसास कराती हैं.
यानी अगर आप किसी को कई अंगूठियां पहने हुए देखें, तो यह जरूरी नहीं कि वह लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाहता हो. हो सकता है कि उसकी हर अंगूठी के पीछे कोई खास याद, रिश्ता, उपलब्धि या भावना छिपी हो. मनोविज्ञान भी यही कहता है कि कई बार हमारी छोटी-छोटी पसंद हमारी जिंदगी और व्यक्तित्व की गहरी कहानी बयां करती हैं.
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