बुर्ज खलीफा की 163वीं मंजिल तक पानी कैसे पहुंचता है? जवाब कमाल का है

828 मीटर ऊंचे बुर्ज खलीफा की 163वीं मंजिल तक पानी कैसे पहुंचता है? बात हो रही है दुबई के बुर्ज खलीफा की. सवाल यह है कि आखिर दुनिया की सबसे ऊंची इमारत के हर फ्लोर तक पानी कैसे पहुंचाया जाता है. इसके पीछे कैसी इंजीनियरिंग काम करती है और इंजीनियरों ने किस अनोखे आइडिये के जरिए इस लगभग नामुमकिन लगने वाले काम को मुमकिन बनाया?

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बुर्ज खलीफा में पानी की सप्लाई किसी सामान्य इमारत की तरह नहीं होती (Photo: Pexel) बुर्ज खलीफा में पानी की सप्लाई किसी सामान्य इमारत की तरह नहीं होती (Photo: Pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:05 AM IST

दुबई का बुर्ज खलीफा दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है. 828 मीटर से ज्यादा ऊंचाई और 163 मंजिलों वाली इस गगनचुंबी इमारत को देखकर अक्सर लोगों के मन में एक सवाल आता है कि आखिर इतनी ऊंचाई तक पानी कैसे पहुंचता होगा? क्या एक ही पंप पूरे इस इमारत में पानी चढ़ाता है या इसके पीछे कोई खास तकनीक काम करती है?

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दिलचस्प बात यह है कि बुर्ज खलीफा में पानी की सप्लाई किसी सामान्य इमारत की तरह नहीं होती. इतनी ऊंचाई पर सीधे एक पंप से पानी भेजना न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि खतरनाक भी हो सकता है. अगर नीचे से बहुत ज्यादा दबाव बनाया जाए तो पाइप फट सकते हैं, जबकि ऊपर तक पहुंचते-पहुंचते पानी का दबाव काफी कम हो जाता है.

दुबई के समुद्र से शुरू होता है सफर

आइये पहले समझते हैं कि बुर्ज खलीफा तक पहुंचने वाला पानी आता कहां से है. ये पानी दुबई के डीसैलिनेशन प्लांट्स से आता है. यहां समुद्र के खारे पानी को साफ करके पीने योग्य बनाया जाता है. दुनिया की सबसे ऊंची इमारत को हर दिन करीब 1,000 क्यूबिक मीटर यानी लगभग 2.5 लाख गैलन पानी की जरूरत पड़ती है.

एक नहीं, कई स्टेज में ऊपर चढ़ता है पानी

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इसके पीछे एक इंजीनियरिंग है. इस इंजनीयरिंग के पीछे जो दिमाग है वो एक कंपनी का है. Xylem Inc. ये एक अमेरिकी वॉटर टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो पानी की सप्लाई, ट्रीटमेंट, पंपिंग और जल प्रबंधन से जुड़े उपकरण और समाधान विकसित करती है.

कंपनी का नाम 'Xylem' पेड़ों के उस ऊतक (tissue) से लिया गया है, जो जड़ों से पानी को ऊपर पत्तियों तक पहुंचाता है. इसी अवधारणा पर कंपनी का फोकस भी पानी को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और उसका प्रबंधन करने पर है.

बुर्ज खलीफा में मल्टी-स्टेज बूस्टर पंपिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है. यानी पानी को एक ही बार में सबसे ऊपर नहीं भेजा जाता.सबसे पहले बेसमेंट में लगे शक्तिशाली पंप पानी को एक निश्चित ऊंचाई तक बने बड़े टैंकों में पहुंचाते हैं. इसके बाद दूसरे पंप उस पानी को और ऊपर बने टैंकों तक भेजते हैं. इसी तरह कई चरणों में पानी धीरे-धीरे पूरी इमारत में ऊपर पहुंचता है.

इमारत के अंदर बने हैं विशाल पानी के स्टेशन

बुर्ज खलीफा में सात विशेष मेकैनिकल फ्लोर बनाए गए हैं. ये सामान्य मंजिलों की तरह नहीं होते, बल्कि तकनीकी संचालन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इन फ्लोरों पर बड़े-बड़े पानी के टैंक और पंपिंग सिस्टम लगाए गए हैं.

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लगभग हर 20 से 30 मंजिल के बाद ऐसे तकनीकी स्तर बनाए गए हैं, जो पानी को अगले हिस्से तक पहुंचाने का काम करते हैं. इन्हें इमारत के अंदर बने छोटे-छोटे जलाशय भी कहा जा सकता है.

फिर ग्रेविटी करती है बाकी काम

जब पानी किसी ऊंचे टैंक तक पहुंच जाता है, तो वहां से उसे नीचे के फ्लोरों में ग्रेविटी की मदद से सप्लाई किया जाता है. इससे हर फ्लैट, होटल रूम और ऑफिस तक बिना रुकावट पानी पहुंचता है.

साथ ही प्रेशर बूस्टर पंप और प्रेशर रिड्यूसिंग वॉल्व लगाए गए हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी मंजिल पर पानी का दबाव बहुत ज्यादा या बहुत कम न हो.

AC का पानी भी होता है इस्तेमाल

बुर्ज खलीफा का सिस्टम सिर्फ पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं है. इमारत के एयर कंडीशनिंग सिस्टम से हर साल लाखों गैलन कंडेंसेट वॉटर निकलता है. इस पानी को फेंका नहीं जाता, बल्कि एकत्र करके लैंडस्केपिंग और अन्य उपयोगों में लगाया जाता है.

100 किलोमीटर से ज्यादा पाइपों का जाल

दुनिया की सबसे ऊंची इमारत के भीतर घरेलू पानी की सप्लाई के लिए 100 किलोमीटर से ज्यादा लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है. इसी जटिल नेटवर्क और अत्याधुनिक पंपिंग सिस्टम की मदद से 163वीं मंजिल तक भी नलों और शॉवर में सामान्य दबाव के साथ पानी पहुंचता है.बुर्ज खलीफा का यह जल प्रबंधन सिस्टम आधुनिक इंजीनियरिंग का एक शानदार उदाहरण माना जाता है.

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