यूपी: बागपत में मिले पृथ्वीराज चौहान के समय के प्राचीन सिक्के

बागपत के बारेखेकड़ा कस्बे के प्राचीन काठा गांव का टीला दुर्लभ सिक्कों के प्राप्त होने से चर्चित हो गया है! यह बिलन धातु के सिक्के हैं, जिसका निर्माण चांदी और तांबे को मिलाकर किया गया है.

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बागपत में मिले प्राचीन सिक्के बागपत में मिले प्राचीन सिक्के

वरुण सिन्हा

  • बागपत,
  • 01 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 7:50 AM IST
  • 900 साल के इतिहास के मिले साक्ष्य
  • दुर्लभ सिक्कों को देखने पहुंच रहे लोग

उत्तर प्रदेश के बागपत में 12वीं शताब्दी के सिक्के मिलने से सभी हैरान रह गए हैं. क्षेत्र में इतिहास की एक अलग ही परछाई दिखनी शुरू हो गई है. ये पहली बार हुआ है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी स्थान पर अलग अलग समय के सिक्के मिले हों. लेकिन इस बार ऐसा हुआ है और इस वजह से सभी इन सिक्कों को देखने के लिए आ रहे हैं.

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दुर्लभ सिक्कों में मिली इतिहास की झलक

बागपत के बारेखेकड़ा कस्बे के दिल्ली सहारनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटा हुआ प्राचीन काठा गांव का टीला दुर्लभ सिक्कों के प्राप्त होने से चर्चित हो गया है! यह बिलन धातु के सिक्के हैं, जिसका निर्माण चांदी और तांबे को मिलाकर किया गया है. चांदी क्योंकि उस समय अति दुर्लभ थी तो सिक्कों को बनाने में तांबे की मात्रा भी मिलाई जाती थी. यहां से प्राप्त सिक्कों को रासायनिक विधि से साफ किया गया है, जिससे उन पर लिखे गए नामों का उल्लेख स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.

12वीं शताब्दी के मिले सिक्के

ये सिक्के पृथ्वीराज चौहान और उनके बाद के शासक राजा अनंगपाल तोमर, राजा चाहडा राजदेव, राजा मदन पाल देव के समय के हैं. वहीं जिस स्थान पर ये मिले हैं, ये बागपत के प्राचीन किले के महत्व को सिद्ध करता है.

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इन सिक्कों की खोज करने वाले इतिहासकार अमित राय जैन का कहना है कि यह प्राचीन टीला हजारों वर्षों से यहां मौजूद है. यहां का स्थल निरीक्षण पहले भी वे कई बार कर चुके हैं. यहां से कुषाण काल और बाद की सभ्यताओं के अवशेष मृदभांड इत्यादि प्राप्त होते रहे हैं. उसी कड़ी में सिक्कों का प्राप्त होना यह सिद्ध करता है कि यहां कोई बड़ी मानव बस्ती उस समय की रही होगी जहां पर व्यापारिक लेन-देन में सिक्कों का इस्तेमाल किया जाता होगा. 

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