शिवपाल यादव की प्रसपा लड़ेगी स्थानीय निकाय चुनाव, सपा को मुश्किल में डाला

शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) यूपी में स्थानीय निकाय चुनाव लड़ेगी. खुद शिवपाल सिंह यादव ने इस बात की घोषणा की है. 

Advertisement
शिवपाल यादव फाइल फोटो शिवपाल यादव फाइल फोटो

शिल्पी सेन

  • लखनऊ,
  • 08 जून 2022,
  • अपडेटेड 11:10 PM IST
  • अक्टूबर-नवंबर में होना है चुनाव
  • अखिलेश यादव, शिवपाल में दूरियां नज़र आयी थीं

शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) यूपी में स्थानीय निकाय चुनाव लड़ेगी. बुधवार को दिन भर चली प्रसपा की बैठक के बाद खुद शिवपाल सिंह यादव ने इस बात की घोषणा की. साथ ही बैठक में ये भी फ़ैसला किया गया कि पार्टी राष्ट्रवाद पर काम करेगी. देखा जाए तो ये दोनों ही बातें समाजवादी पार्टी की मुश्किल आने वाले समय में बढ़ा सकती हैं.

Advertisement

सपा की मुश्किल बढ़ाने वाली खबर
हाल ही में खत्म हुए यूपी विधान सभा सत्र में जहां चाचा शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच की दूरी साफ झलकी वहीं कई बार शिवपाल की बीजेपी से नजदीकियों की चर्चा रही. इसी बीच बुधवार को लखनऊ में हुई प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की बैठक में शिवपाल सिंह यादव ने न सिर्फ सभी पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों की बात सुनी, बल्कि ये ऐलान भी कर दिया कि प्रसपा स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ेगी. ये घोषणा कार्यकर्ताओं को फील्ड पर तैयारी करने के निर्देश को देखते हुए अहम है साथ ही देखा जाए तो ये समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुश्किल बढ़ाने वाला है.

दरअसल, छह घंटे तक चली बैठक में प्रसपा के फ्रंटल संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष, सभी मंडलीय प्रभारी, सभी ज़िलाध्यक्ष मौजूद रहे. शिवपाल यादव पूरी बैठक के दौरान मौजूद थे. बैठक में कई पदाधिकारियों ने अपनी बात रखी. ये बात निकल कर सामने आयी कि जो मौजूदा स्थिति है उसमें पार्टी के कार्यकर्ताओं की पहचान और जमीन पर सक्रियता अगर बढ़ानी है तो और ज़्यादा मौक़े मिलने चाहिए. 

Advertisement

अक्टूबर-नवम्बर में होना है स्थानीय निकाय चुनाव
हालांकि, सीधे तौर पर सपा से विरोध की कोई बात नहीं हुई पर इतना तय हुआ कि इस साल अक्टूबर-नवम्बर में होने वाले स्थानीय निकाय के चुनाव में पार्टी कुछ क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. इसी को देखते हुए शिवपाल सिंह यादव ने बैठक में ये घोषणा की कि प्रसपा आने वाले स्थानीय चुनाव लड़ेगी. ये बात महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले भी इस बात को लेकर काफ़ी चर्चा रही थी कि शिवपाल समाजवादी पार्टी से अलग अपने प्रत्याशी उतार सकते हैं और उस वक्त मुलायम सिंह यादव को स्थिति सम्भालने और शिवपाल यादव को मनाने के लिए आगे आना पड़ा था.

समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की मुश्किल बढ़ सकती है
यूपी में स्थानीय निकाय चुनाव नवम्बर में होने हैं. अगर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी स्थानीय निकाय में अपने प्रत्याशी उतार देती है तो कुछ क्षेत्रों ख़ासकर यादव लैंड में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की मुश्किल बढ़ सकती है. साथ ही समाजवादी पार्टी से असंतुष्ट चल रहे कार्यकर्ता भी टिकट न मिलने पर प्रसपा की ओर रुख़ कर सकते हैं. ऐसे में अखिलेश यादव ये नहीं चाहेंगे कि सपा से अलग शिवपाल यादव के कार्यकर्ता स्थानीय निकाय चुनाव लड़ें. 

Advertisement

शिवपाल बीजेपी के एजेंडे पर चलने का संकेत दे रहे
इधर बीजेपी से नज़दीकियों की चर्चा में एक कड़ी और जोड़ते हुए शिवपाल सिंह यादव में अपने कार्यकर्ताओं को कहा कि पार्टी राष्ट्रवाद के लिए काम करेगी. कुछ समय से शिवपाल यादव राम और राष्ट्रवाद पर लगातार बीजेपी के एजेंडे पर चलने का संकेत दे रहे हैं. समान नागरिक संहिता में भी पार्टी ने बीजेपी के एजेंडे को हवा देने वाली बात की थी जिसके बाद शिवपाल की बीजेपी से नज़दीकियों की चर्चा और बढ़ गयी थी. प्रसपा के प्रवक्ता दीपक मिश्र कहते हैं ‘प्रसपा अपनी सोच के आधार पर चीज़ों और मुद्दों को तय करती है. सिर्फ़ राष्ट्रवाद पर काम ही नहीं करेगी बल्कि ये भी तय हुआ है कि राम के नाम पर नफ़रत फैलाने की इजाज़त किसी को नहीं है.’ 

अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल में दूरियां नज़र आयी थीं
हाल ही में यूपी विधानसभा सत्र के दौरान भी अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल में दूरियां नज़र आयी थीं. शिवपाल यादव ने विधानसभा कार्यवाही के लिए बैठने की अपनी सीट बदलने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था तो वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से भी कई विधायकों की सीट बदलने के लिए लिख कर दिया गया था, जबकि उसमें शिवपाल यादव का नाम नहीं था. यूपी के मुख्यमंत्री ने भी अपने सम्बोधन में अखिलेश यादव पर चुटकी लेते हुए उन्हें लोहिया को पढ़ने की सलाह दे डाली थी तो चाचा शिवपाल की लेखनी की तारीफ़ की थी.

Advertisement

गठबंधन के साथियों की नाराज़गी झेलनी पड़ रही है
दरअसल अखिलेश यादव के लिए राज्यसभा और उनसे बाद अब विधान परिषद के प्रत्याशी तय करना काफ़ी चुनौतीपूर्ण रहा. हाल ही में राज्यसभा के बाद विधान परिषद की सीटों को लेकर भी अखिलेश यादव के सामने गठबंधन के साथियों की नाराज़गी झेलनी पड़ रही है. महान दल के केशव देव मौर्य ने जहां इसी बात पर अलग होने की ही बात कर दी है वहीं अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे ओम् प्रकाश राजभर भी अखिलेश से नाराज़ बताए हैं. सुभासपा के पदाधिकारियों ने भी खुले आम इस पर अखिलेश यादव को कठघरे में खड़ा किया है. ऐसे समय में शिवपाल यादव के प्रसपा का स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने की घोषणा सपा की चिंता बढ़ा सकता है.
 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »