बाबरी मामले पर बोलीं ऋतंभरा- अब तो फैसला हो जाए बस!

शीर्ष अदालत ने मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, साध्वी ऋतम्भरा और उमा भारती समेत 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है

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साध्वी ऋतम्भरा साध्वी ऋतम्भरा

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 11:32 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के शीर्ष नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, साध्वी ऋतम्भरा और उमा भारती आदि के खिलाफ लगे आपराधिक साजिश के आरोपों को बहाल करने की सीबीआई की याचिका को बुधवार को स्वीकार कर लिया है, जिससे वर्ष 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में इन्हें अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा.

शीर्ष अदालत ने मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, साध्वी ऋतम्भरा और उमा भारती समेत 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है. हालांकि, इनमें से तीन का निधन हो चुका है तो अब 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलेगा. अदालत ने दो साल के अंदर सुनवाई पूरी करने समेत कई बड़े फैसले किए हैं. जस्ट‍िस पीसी घोष और जस्ट‍िस रोहिंटन नरीमन की संयुक्त पीठ ने मामले में सीबीआई की अपील पर यह फैसला सुनाया है. हालांकि कोर्ट ने मामले में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को राहत दी है.

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ढहाने के सिलसिले में भड़काऊ भाषण देकर कारसेवकों को उकसाने के आरोप में मुकदमा चलाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अभियुक्तों में से एक और अहम किरदार साध्वी ऋतम्भरा ऊपर से तो काफी सहज दिखीं. उन्होंने प्रतिक्रिया पूछे जाने पर तपाक से कहा 25 साल हो गए माथे पर ये झेलते कि ये आरोपी है. अब तो दूध का दूध और पानी का पानी हो ही जाए. अब चाहे दोषी करार दिए जाएं या बरी हों. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हमें बरी कर दिया तो बरी हो गए. अब सर्वोच्च न्यायालय ने फिर से अभियोग चलाने का आदेश दे दिया तो अपना पक्ष रखेंगे. अब तो बस न्यायपालिका समय से फैसला कर दे.

25 साल पहले का रौद्र और वीर रस इन वर्षों में वात्सल्य बन चुका है. साध्वी ऋतम्भरा जिनको वात्सल्य ग्राम प्रकल्प की दीदी माँ के नाम से जाना जाता है. रस में आए बदलाव पर इनका सपाट जवाब था कि वो रूप और रस तो देश और समाज की दशा देख कर उपजे थे. वात्सल्य तो स्थाई भाव और स्वभाव है.

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ने उमा भारती से पहले ही एलान कर दिया था कि अब कुछ भी हो जाए राम के साथ देश की संस्कृति की अस्मिता से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी. उन्होंने ये भी जोड़ा कि जिसे सीबीआई भड़काना कहती है वो हमारी नज़र में जगाना था. सोये हुए समाज को जगाना, ये समाज मुगल काल से तब तक सोया था. 1528 में जब मेरे भगवान राम के मंदिर को तोड़कर उसके मलबे से मस्जिद बनाई तब भी 72 बार इसका विरोध हुआ था और हज़ारों लोगों ने अपनी जान और खून का बलिदान किया था. लेकिन तब प्रयास इकट्ठा नहीं हुए थे जबकि जागे समाज ने 73 वीं बार एक साथ कोशिश की.

राम भारत की संस्कृति के प्रतीक हैं बाबर नहीं. बाबर को स्थापित करने के प्रयास को नकारते हुए हमने उसके प्रति देश को जनता को समाज को जगाया.

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