पाकिस्तान में घुसकर हमले के बाद भारत के बयान के मायने

भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान के बालाकोट में किए गए हमले के बाद भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने अपने बयान में यह भी बताया कि हमला सफल रहा और इसमें आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर उस्ताद गौरी, कुछ ट्रेनर और आतंकवादी हमलों का प्रशिक्षण ले रहे कई आतंकवादी मारे गए हैं

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भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले

पाणिनि आनंद

  • नई दिल्ली,
  • 26 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 12:39 PM IST

मंगलवार को भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान के बालाकोट में किए गए हमले के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि भारत का निशाना न तो सिविलियन थे और न ही पाकिस्तानी सेना. भारत की ओर से की गई कार्रवाई केवल आतंकियों को निशाना बनाने के लिए की गई है.

भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने अपने बयान में यह भी बताया कि हमला सफल रहा और इसमें आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर उस्ताद गौरी, कुछ ट्रेनर और आतंकवादी हमलों का प्रशिक्षण ले रहे कई आतंकवादी मारे गए हैं. हालांकि भारत सरकार की ओर से मारे गए लोगों की संख्या का कोई आंकड़ा जारी नहीं किया गया है.

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भारत की ओर से जारी बयान बहुत सधा हुआ और कूटनीतिक है. भारत के बयान के कुछ निहितार्थ इस प्रकार हैं.

भारत ने अपने बयान में सीधे तौर पर कहा कि यह हमला पाकिस्तान पर, उसकी अवाम पर या सेना पर हरगिज़ नहीं था. केवल आतंकवादियों को निशाना बनाया गया. यानी भारत युद्ध का न तो अपनी ओर से संकेत दे रहा है और न ही पाकिस्तान को युद्ध में जाने के लिए किसी तरह की वजह दे रहा है.

विदेश सचिव को सामने लाकर भारत ने इसे सेना बनाम सेना होने से रोका. साथ ही विश्व समुदाय को संदेश देने के लिए विदेश मंत्रालय को सामने लाया गया.

भारत ने इसे आतंकियों पर हमला बताया. इससे भारत विश्व समुदाय को यह संदेश दे पाया है कि भारत की यह कार्रवाई युद्ध नहीं, आतंकवाद के खिलाफ भारत के एहतियाती प्रयास हैं.

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ऐसी कार्रवाई करना क्यों अनिवार्य हो गया था, इसे समझाते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि पुलवामा में हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद भारत के कई अन्य हिस्सों में भी हमले की तैयारी कर रहा था और इसके लिए बड़े पैमाने पर आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा था. भविष्य में पुलवामा की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ऐसा करना ज़रूरी था.

भारत ने यह भी संकेत दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वो केवल विश्व समुदाय की पैरवी का मोहताज नहीं है. वो अकेले भी निर्णय ले सकता है और आतंकवाद से निपटने के लिए खुद ज़रूरी कदम उठाने में सक्षम है.

भारत की पाकिस्तान में घुसकर की गई इस कार्रवाई के बाद यदि सेना के मंच को आधिकारिक घोषणा के लिए इस्तेमाल किया जाता तो यह कूटनीतिक से ज़्यादा एक सामरिक संदेश देना होता. बहुत सोच-समझकर भारत ने विदेश मंत्रालय के ज़रिए इस कार्रवाई पर अपनी आधिकारिक स्थिति रखी है.

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