कैबिनेट विस्तार को विपक्ष ने बताया अहम मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश

राज्य सभा सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि साढ़े तीन साल कैबिनेट में बदलाव हो रहा है. कैबिनेट में मंत्रियों के पास अधिकार ही नहीं, वह सिर्फ नाम के मंत्री है और मंत्रालय तो पीएमओ चला रहा था. उनका साफ कहना है कि समीक्षा पीएम और पीएमओ के कामकाज की होनी चाहिए, जिसमें पीएम मोदी हर मोर्चे पर विफल रहे हैं.

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कांग्रेस-सीपीएम ने साधा निशाना कांग्रेस-सीपीएम ने साधा निशाना

कुमार विक्रांत / आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST

कैबिनेट विस्तार को लेकर विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं और इसे अहम से मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहे हैं. विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कैबिनेट में फेरबदल को गिरती विकास दर और नोटबंदी के फेल होने से ध्यान हटाने की कोशिश करार दिया है. सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने 'आजतक' से बातचीत में कहा इस फेरबदल का कोई मतलब नहीं है क्योंकि पूरा का पूरा संचालन प्रधानमंत्री कार्यालय से होता है. येचुरी ने कहा कि किस कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसका कोई मतलब नहीं है.

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सीताराम येचुरी ने कहा कि नोटबंदी को लेकर मोदी कैबिनेट के 6 बड़े मंत्री सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हैं जो बिल्कुल एक जैसी थी. जाहिर है कि ट्वीट प्रधानमंत्री कार्यालय से इन तमाम मंत्रियों को भेजा गया. अब ऐसी परिस्थिति में कौन किसका मंत्री है इससे क्या फर्क पड़ता है. सीपीएम महासचिव का आरोप है कि यह पूरी कवायद नोटबंदी की असफलता से ध्यान हटाने की कोशिश है, इसलिए इस फेरबदल से है़.

लेफ्ट समेत तमाम विपक्षी पार्टियां रिजर्व बैंक द्वारा नोटबंदी पर जारी आंकड़ों के बाद सरकार को घेर रहे हैं. येचुरी ने नोटबंदी को आर्थिक हिंसा करार देते हुए सरकार पर इसे जबरदस्ती जनता पर थोपने का आरोप लगाया. येचुरी ने कहा कि सरकार जो भी फायदे गिना रही है नोटबंदी से देश को उसका एक भी फायदा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि जनता अब जान चुकी है कि यह पूरी तरह से नाकाम कोशिश थी. कैबिनेट के फेरबदल से आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव को साधने की कोशिश के सवाल पर सीपीएम महासचिव येचुरी ने कहा कि इस फेरबदल से फर्क नहीं पड़ता क्योंकि पूरा अधिकार प्रधानमंत्री कार्यालय के अंदर है सब कुछ वहीं से संचालित होता है इसलिए फेरबदल से कोई मतलब नहीं है.

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सीपीएम महाचसिच येचुरी ने इस कैबिनेट बदलाव की तुलना टाइटैनिक जहाज से की है. उनका कहना है कि यह वैसा ही है जैसे टाइटैनिक जहाज डूबने वाला हो और वहां डेक पर कुर्सियों की जगह बदली जा रही हो. वहीं सीपीएम नेता वृंदा करात ने भी कैबिनेट की फेरबदल को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा यह देश की पत्थर होती अर्थव्यवस्था, गिरती विकास दर और नोटबंदी की असफलता से है. मोदी कैबिनेट में फेरबदल के लिए मंत्रियों के काम के मूल्यांकन के सवाल पर बोलते हुए येचुरी ने कहा कि अगर कामों का आंकलन करके बदलाव किया जा रहा है तो फिर प्रधानमंत्री कार्यालय में बदलाव क्यों नहीं किया गया.

पीएम के काम की हो समीक्षा- आजाद

कांग्रेस पार्टी भी मोदी कैबिनेट में हो रही फेरबदल को लेकर सरकार के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किए हुए है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि साढ़े तीन साल कैबिनेट में बदलाव हो रहा है. कैबिनेट में मंत्रियों के पास अधिकार ही नहीं, वह सिर्फ नाम के मंत्री है और मंत्रालय तो पीएमओ चला रहा था. उनका साफ कहना है कि समीक्षा पीएम और पीएमओ के कामकाज की होनी चाहिए, जिसमें पीएम मोदी हर मोर्चे पर विफल रहे हैं.

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गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पीएम मोदी अपनी समीक्षा करें, किसानों की आत्महत्या बढ़ी, नौजवानों का रोज़गार छिना, उद्योगों की हालत बुरी है, इन सभी मुद्दों पर वह खुद का आंकलन करें. आजाद ने कहा कि केंद्र सरकार नोटबंदी से ध्यान भटकाना चाहती है, लेकन अब सच सामने आ चुका है. यूपीए कार्यकाल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि तब जीडीपी 9 के आसपास थी, अब 5.7 हो गयी, आगे और भी गिरेगी. उन्होंने कहा कि जब कैबिनेट में मंत्रियों के पास अधिकार ही नहीं तो पद देने से क्या फायदा. सरकार पर आरोप लगाते हुए आजाज ने कहा कि कश्मीर जल रहा है और मौजूदा सरकार में बॉर्डर पर फौजियों के मरने की संख्या तेजी से बढ़ रही है, सरकार को इन सब मुद्दों की ओर ध्यान देना चाहिए.

 

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