काकोली घोष... ममता की सबसे करीबी नेता के इस्तीफे तक कैसे आ गई बात, पूरी टाइमलाइन

पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में आंतरिक विवाद गहराता जा रहा है, खासकर विधानसभा चुनाव में हार के बाद से. बारासात से सांसद काकोली घोष ने पार्टी संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, हालांकि वे टीएमसी की सदस्य बनी हुई हैं.

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काकोली घोष पहले ममता बनर्जी की करीबियों में से एक रही हैं काकोली घोष पहले ममता बनर्जी की करीबियों में से एक रही हैं

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:45 PM IST

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही TMC बदहाल होने लगी है. एक तरफ तो पार्टी जमीन पर अपने अस्तित्व को बचाने में संघर्ष कर रही है तो दूसरी तरफ भीतर की रार खुलकर बाहर आ गई है. वहीं एक-एक करके करीबी भी साथ जोड़ते जा रहे हैं. ताजा नाम काकोली घोष दस्तीदार का जुड़ गया है.

कभी ममता बनर्जी की बेहद करीबी रहीं काकोली घोष की राहें आज उनसे जुदा हो चुकी हैं. बारासात से सांसद काकोली घोष ने बुधवार को पार्टी संगठन में सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. इसके पहले काकोली घोष ने बारासात जिलाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था.

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टीएमसी में अंदर खाने बड़ी रार
विधानसभा चुनाव में हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस को अपने ही सांसदों और विधायकों के असंतोष का सामना करना पड़ रहा है. बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार का असंतोष खुलकर सामने आ गया है. काकोली घोष ने हाल ही में टीएमसी के बारासात जिलाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अब पार्टी संगठन में अन्य सभी पदों से भी इस्तीफा दे दिया है.

सुब्रत बख्शी को भेजा इस्तीफा
काकोली घोष ने टीएमसी संगठन में सभी पदों से अपना इस्तीफा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजा है. काकोली घोष ने सुब्रत बख्शी को लिखे पत्र में कहा है कि पार्टी संगठन में सभी पद छोड़ रही हूं. हालांकि, काकोली घोष ने टीएमसी की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया. काकोली घोष टीएमसी से लोकसभा की सदस्य बनी हुई हैं.

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चीफ व्हिप से हटाई गईं थीं काकोली
असल में काकोली घोष पिछले कुछ दिनों से टीएमसी से नाराज चल रही हैं. पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी की हार के कुछ ही दिनों बाद ममता बनर्जी ने काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा में चीफ व्हिप के पद से हटा दिया था. ममता बनर्जी ने चीफ व्हिप की जिम्मेदारी काकोली घोष से वापस लेकर कल्याण बनर्जी को सौंप दी थी. ममता बनर्जी के इस कदम से काकोली घोष आहत और नाराज हो गईं. काकोली घोष ने सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी.

केंद्र सरकार ने दी थी सुरक्षा
काकोली घोष को टीएमसी के चीफ व्हिप से हटाए जाने के कुछ ही घंटों में केंद्र सरकार ने उनको वाई सिक्योरिटी दे दी थी. ऐसा तब था, जब अभिषेक बनर्जी से लेकर टीएमसी के तमाम नेताओं की सिक्योरिटी में कटौती की गई थी. थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने टीएमसी सांसद काकोली घोष को सीआईएसएफ की यह सुरक्षा देने का ऐलान किया था.

साल 2009 में पहली बार बारासात से मिला टिकट
66 साल की काकोली घोष दस्तीदार पश्चिम बंगाल की बारासात लोकसभा सीट से चार बार की सांसद हैं. टीएमसी ने काकोली घोष को बारासात सीट से साल 2009 में पहली बार टिकट दिया था और वह विजयी आगाज करने में सफल रही थीं. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं. काकोली टीएमसी की महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं.

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज से की है पढ़ाई

काकोली घोष दस्तीदार पेश से डॉक्टर हैं. उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज से की है. आरजी कर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद काकोली घोष दस्तीदार ने लंदन के प्रतिष्ठित किंग्स कॉलेज से भी पढ़ाई की है. चर्चित आरजी कर रेप केस के बाद वह अपने बयान को लेकर विवादों में रहीं. काकोली घोष ने तब कहा था कि जब मैं मेडिकल स्टूडेंट थी, तब छात्राएं शिक्षकों की गोद में बैठकर पासिंग मार्क्स प्राप्त करती थीं, यह चलन था.

उन्होंने तब यह भी दावा किया था कि इसका विरोध करने वाली छात्राओं को कम नंबर दिए जाते थे. काकोली घोष दस्तीदार के इस बयान पर खूब हंगामा मचा. डॉक्टरों ने उनके इस बयान पर नाराजगी जताई थी. चिकित्सकों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से उनका रजिस्ट्रेशन निलंबित करने की मांग तक कर डाली थी. विवाद बढ़ने के बाद काकोली घोष ने अपने इस बयान के लिए माफी मांग ली थी.

बारासात के डिगबेरिया में बीता बचपन

राजनीति में कदम रखने से पहले चिकित्सक के रूप में भी सक्रिय योगदान दिया. सक्रिय राजनीति में आने के बाद भी काकोली घोष दस्तीदार के संसदीय जीवन पर इसकी छाप नजर आती है. वह स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित मुद्दों को लेकर संसद में मुखर रही हैं और महिलाओं के अधिकार से जुड़े मुद्दे भी संसद में उठाती आई हैं. 

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