लगभग दो साल बाद सोमवार को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की बैठक हुई. इसमें आपसी नाराजगी को दूर करने की चर्चा हुई. साथ ही माना गया कि कांग्रेस को विपक्षी गठबंधन की धुरी (मुख्य आधार) के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, बशर्ते पार्टी 'बड़ा दिल' दिखाए.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक-दूसरे की आलोचना से बचने वाला सुझाव तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से आया. जो कांग्रेस से स्वतंत्र होकर अपने लिए अलग स्पेस बनाने की उनकी पिछली कोशिशों से साफ तौर पर अलग है.
2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद भी, बनर्जी ने कई मौकों पर विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व करने की कांग्रेस की क्षमता पर सवाल उठाए थे. पश्चिम बंगाल में चुनाव में करारी हार झेलने के बाद से, पार्टी में लगभग फूट जैसी स्थिति से जूझ रही टीएमसी प्रमुख ने सुलह का रुख अपनाया है. अब वो एक सक्रिय विपक्षी गठबंधन की जरूरत की सबसे बड़ी समर्थक दिख रही हैं.
बैठक औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले, बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ लगभग 10 मिनट तक बातचीत की. कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दोनों नेताओं के एक-दूसरे को गले लगाते हुए एक तस्वीर भी पोस्ट की.
राहुल गांधी बोले- मुझे 100% यकीन है कि बंगाल चुनाव में धांधली हुई
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि अगर विपक्षी दलों को NDA को चुनौती देनी है तो उनके बीच आपसी विश्वास और एकजुटता जरूरी होगी. मीटिंग में राहुल ने कहा, 'यह साफ है कि एक तरफ कांग्रेस और भारत हैं और दूसरी तरफ भाजपा-आरएसएस.'
राहुल ने आगे कहा, 'हो सकता है कि ममता दीदी 90% और अखिलेश-तेजस्वी 40% ही आश्वस्त हों, लेकिन मुझे 100% यकीन है कि बंगाल चुनाव में धांधली हुई थी. इंडिया ब्लॉक के कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि अब चुनाव EVM के बजाय बैलेट पेपर से होने चाहिए.'
अखिलेश बोले- बड़ा दिल दिखाए कांग्रेस
राहुल गांधी के बगल में बैठे समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी गठबंधन के अंदरूनी मतभेदों को कम करने की जरूरत पर जोर दिया.
साथ ही यादव ने अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे की बातचीत से पहले कांग्रेस को एक संदेश दिया. उन्होंने कहा कि प्रमुख विपक्षी दल को 'बड़ा दिल' और अलग-अलग राज्यों में बीजेपी विरोधी सबसे मजबूत ताकत का समर्थन करना चाहिए.
यादव उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने डीएमके (स्टालिन की पार्टी) से गठबंधन तोड़ने के कांग्रेस के तरीके की आलोचना की, जो बैठक से दूर रही.
अखिलेश यादव ने सीपीआईएम के जॉन ब्रिटास की बात दोहराते हुए कांग्रेस, विशेष रूप से राहुल गांधी द्वारा हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन पर किए गए 'व्यक्तिगत हमलों' की कड़ी आलोचना की.
चलिए कॉकरोच जनता पार्टी को सपोर्ट करते हैं- बोले उमर अब्दुल्ला
जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कथित तौर पर युवा नेतृत्व वाले राजनीतिक आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का सपोर्ट किया. सूत्रों के मुताबिक, अब्दुल्ला ने कहा, 'चलिए उनसे जुड़ते हैं, वे कुछ तो सही कर रहे होंगे.'
अब्दुल्ला ने इस बात पर भी जोर दिया कि गठबंधन के घटकों को यह मानना होगा कि कांग्रेस ही वह 'गोंद' है जो गठबंधन को एकजुट रखती है.
सूत्रों के अनुसार, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कांग्रेस की बिहार इकाई के नेतृत्व की भी कड़ी आलोचना की.
बैठक में शामिल नेताओं के मुताबिक, इसबार जो बात सबसे अलग थी, वह नेतृत्व को लेकर किसी भी तरह के संघर्ष का न होना था, जो कि जून 2023 में पटना में जेडीयू प्रमुख और तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मेजबानी में गठित गठबंधन की पिछली बैठकों में हुआ था.
नीतीश कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले इंडिया ब्लॉक से बाहर निकलकर BJP का मुकाबला करने के विपक्ष के एकता प्रोजेक्ट को बड़ा झटका दिया था.
सोमवार की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मौजूदा राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्षी दलों को साथ मिलकर काम करना होगा. उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं और मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने पर भी चिंता व्यक्त की, ये ऐसे मुद्दे थे जो बैठक के दौरान बार-बार उठते रहे.
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