2024 का एजेंडा, राहुल का रोल, विपक्षी एकता... रायपुर अधिवेशन में कांग्रेस के सामने बड़े सवाल

कांग्रेस तीन दिनों तक रायपुर में बैठक कर भविष्य की राजनीति की रूपरेखा तैयार करेगी. इस दौरान यह बात साफ होगी कि 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का एजेंडा क्या होगा, विपक्षी एकता का फॉर्मूला क्या होगा और साथ ही राहुल गांधी की पार्टी में भूमिका किस तरह की होगी, क्योंकि पार्टी की कमान अब मल्लिकार्जुन खड़गे के हाथों में है.

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मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और भूपेश बघेल मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और भूपेश बघेल

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 24 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 4:24 PM IST

कांग्रेस का 85वां महाधिवेशन शुक्रवार से छत्तीसगढ़ के रायपुर में शुरू हो गया है. तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक के दौरान राजनीति, अर्थव्यवस्था समेत कई विषयों पर चर्चा होगी. इसके अलावा कई मुद्दों पर प्रस्ताव पारित करने और कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के गठन के साथ ही  2024 के लोकसभा चुनाव का एजेंडा और कांग्रेस विपक्षी एकता के नाम पर क्षेत्रीय दलों की दबाव की राजनीति से निपटने का फॉर्मूला पार्टी तलाशेगी. वहीं, संगठन को नई ऊर्जा और स्वरूप देने के लिए कई बदलावों की रूपरेखा बनाई जाएगी तो कांग्रेस में राहुल गांधी के रोल भी तस्वीर साफ होगी? 

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2023 और 2024 का चुनावी एजेंडा 

कांग्रेस का अधिवेशन ऐसे समय पर हो रहा है जब कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावी तैयारी जोरों पर है. सियासी दल अपना-अपना एजेंडे सेट कर रहे हैं. कांग्रेस की अभी 3 राज्यों में अपने दम पर सरकार है, जिनमें राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इसी साल चुनाव हैं. झारखंड, बिहार और तमिलनाडु में कांग्रेस सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल है. 2018 में कांग्रेस इन चारों राज्यों में सरकार बनाने में सफल रही थी, लेकिन एमपी और कर्नाटक में ऑपरेशन लोट्स के जरिए कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर बीजेपी काबिज हो गई थी.

कांग्रेस रायपुर अधिवेशन में अपनी मौजूदा सत्ता को बचाए रखते हुए बाकी दोनों ही राज्यों पर काबिज होने की रणनीति की रूप रेखा तैयार करेगी, क्योंकि इसे 2024 लोकसभा चुनाव का सेमीफाइल माना जा रहा है. एक साल के बाद ही लोकसभा का चुनाव है. ऐसे में कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर व्यापक रूप रेखा तैयार करेगी. कांग्रेस ने अधिवेशन में जो भी मुद्दे रखें है, उससे पार्टी की रणनीति को समझा जा सकता है. कांग्रेस राजनीति, अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक न्याय, युवा और किसान के मुद्दे पर चर्चा करेगी. 

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विपक्षी एकता की तस्वीर होगी साफ 

कांग्रेस का यह महाधिवेशन ऐसे समय हो रहा है कि जब आगामी लोकसभा चुनाव में करीब एक साल का समय बचा है और विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में लगातार चर्चा हो रही है. विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में पार्टी अपना रुख स्पष्ट करेगी. 2024 में कांग्रेस विपक्षी एकता के नाम पर क्षेत्रीय दलों की दबाव की राजनीति से निपटने का फॉर्मूला भी तलाशेगी. इसमें यह भी तय किया जाएगा कि देश के किस राज्य में किस पार्टी के साथ किस तरह का गठबंधन हो और सहयोगी दलों से रिश्ता किस हद तक रखा जाए.  

विपक्षी एकजुटता को लेकर चल रही चर्चा के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी की स्थिति को साफ कर दिया है कि अगले साल केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई में गठबंधन सरकार बनेगी. पार्टी महासचिव जयराम रमेश भी कह चुके हैं कि  महाधिवेशन में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में चर्चा की जाएगी और भविष्य की रूपरेखा तय होगी. हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि कांग्रेस के बिना देश में विपक्षी एकता की कोई भी कोशिश सफल नहीं हो सकती. 

बिहार के सीएम नीतीश कुमार से लेकर डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव और एनसीपी प्रमुख शरद पवार तक ने लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी एकता की जिम्मादारी का बोझ कांग्रेस पर डाल रखा है. शरद पवार तो कांग्रेस के नेतृत्व करने पर भी अपनी स्वीकृति दे दी है तो नीतीश कुमार ने जरूर इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है. केजरीवाल से लेकर केसीआर तक कांग्रेस के साथ खड़े नहीं होना चाहते हैं तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी अपनी स्थिति साफ नहीं कर रहे हैं. कांग्रेस अब टीएमसी को बीजेपी की बी-टीम बता रही है. 

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राहुल गांधी की भूमिका क्या होगी

कांग्रेस का अधिवेशन शुरू हो चुका है, पार्टी के तमाम दिग्गज नेता देशभर से रायपुर पहुंच चुके हैं. ऐसे में अधिवेशन में सभी की निगाहें इस बात पर है कि राहुल गांधी की कांग्रेस में क्या भूमिका होगी और 2024 के लोकसभा चुनाव में किस तरह से रोल अदा करेंगे. कांग्रेस अध्यक्ष की कमान मल्लिकार्जुन खड़गे के हाथों में सौंपे जाने के बाद से यह सवाल उठ रहे हैं कि अब राहुल गांधी की पार्टी में क्या भूमिका होगी. इस पर राहुल गांधी ने खुद कहा था कि कांग्रेस में उनकी क्या भूमिका होगी, यह नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तय करेंगे. 

राहुल गांधी कांग्रेस का चेहरा माने जाते हैं और भारत जोड़ो यात्रा के जरिए उन्होंने अपनी छवि को बदलने के साथ पार्टी के कैडर को भी नई ऊर्जा भर दी है. अधिवेशन में राहुल की भारत जोड़ो यात्रा की प्रशंसा तय है, क्योंकि कांग्रेस का मानना है कि उनके क्रॉस-कंट्री ट्रेक का भारतीय राजनीति पर परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ा है. ऐसे में सवाल यही है कि क्या पार्टी राहुल गांधी को ऐसा नेता घोषित करेगी जो 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी एकता को लीड कर सके. इतना ही नहीं राहुल के नाम पर क्या विपक्ष एकजुट होगा. इन सारे सवालों पर तस्वीर अधिवेशन में साफ होगी? 

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