Abortion in India: असुरक्षित गर्भपात से रोजाना 8 मौतें, घर में ही होते हैं 27% अबॉर्शन... 48% अबॉर्शन की वजह है ये

भारत में गर्भपात से जुड़े आंकड़े कई पहलुओं का खुलासा करते हैं. देश में हर साल जितना भी गर्भपात होता है उसमें से आधा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि वो अनचाहा गर्भ था. लगभग 27 प्रतिशत महिलाएं अबॉर्शन करवाने के लिए अस्पताल नहीं जाती है बल्कि इस जटिल मेडिकल प्रक्रिया को वो दोस्तों और परिवार की सहायता से घर पर ही करती है.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

पीयूष अग्रवाल

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 12:09 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने MTP (Medical Termination of Pregnancy) एक्ट के  भारत में अविवाहित महिलाओं को भी 24 हफ्तों तक  गर्भपात का अधिकार दे दिया है.  भारत के सामाजिक परिपेक्ष्य में इसे बड़ा फैसला माना जा रहा है. 

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलिजेंस यूनिट ने भारत में गर्भपात के आंकड़ों और ट्रेंड का विश्लेषण किया. इसमें कई चौकाने वाली जानाकारियां निकलकर सामने आईं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के आंकड़ों के अनुसार भारत में जितनी भी महिलाओं ने गर्भपात करवाया उनमें से लगभग आधी ने ये विकल्प इसलिए चुना क्योंकि ये अनचाहा/अवांछित गर्भ था. 

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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के आंकड़ों ने गर्भपात से जुड़े कई सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक कारणों का खुलासा किया है. 

क्यों होता है गर्भपात

महिलाओं (आयु वर्ग 15-49) से जुड़े नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में गर्भपात की सबसे बड़ी वजह प्रेग्नेंसी का अनचाहा/अनियोजित होना है. डाटा के अनुसार  47.6 प्रतिशत गर्भपात इसलिए होता है क्योंकि ये अनप्लान्ड था. 11.03 फीसदी गर्भपात स्वास्थ्य से जुड़े कारणों से होता है. 9.7 प्रतिशत अबॉर्शन की वजह आखिरी बच्चे का काफी छोटा होना है. 9.1 प्रतिशत गर्भपात दूसरी जटिलताओं की वजह से होता है. 4.1 प्रतिशत गर्भपात की वजह पति या सास की अनिच्छा है. भारत में  3.4 प्रतिशत अबॉर्शन आर्थिक कारणों से होता है. आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य है जहां आर्थिक कारणों की वजह से गर्भपात सबसे ज्यादा होता है. 2.1 प्रतिशत अबॉर्शन इस वजह से होता है क्योंकि गर्भ में पल रहा भ्रूण लड़की थी. ये स्थिति तब है जब भारत में गर्भ में पल रहे भ्रूण का सेक्स जानना कानूनन जुर्म है. 12.7 प्रतिशत गर्भपात अन्य कारणों से होता है. 

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गर्भपात के असुरक्षित तरीके

भारत में गर्भपात को लेकर मेडिकल स्टैंडर्ड और सुरक्षा की कमी देखने को मिलती है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 का डाटा बताता है कि भारत में जितना गर्भपात होता है उसका लगभग 27 फीसदी घर में होता है. यानी कि महिलाएं/लड़कियां अबॉर्शन के लिए अस्पताल नहीं जाती हैं बल्कि इस मेडिकल प्रक्रिया को खुद ही कर लेती हैं. शहरों में 21.6 प्रतिश गर्भपात महिलाएं स्वयं करवा लेती हैं जबकि ग्रामीण महिलाओं के लिए ये आंकड़ा 30 फीसदी है. 
 
हालांकि भारत में आधा से अधिक लगभग 54.8 महिलाएं गर्भपात के लिए डॉक्टर के पास जाती हैं. भारत में 3.5 प्रतिशत एबॉर्शन तो दोस्त और रिश्तेदार करवा देती हैं. 

असुरक्षित गर्भपात की वजह से रोजाना 8 मौतें

संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट 2022 के अनुसार भारत में हर दिन असुरक्षित गर्भपात से जुड़े कारणों की वजह से लगभग 8 महिलाएं मौत का शिकार होती हैं. इसके अलावा असुरक्षित गर्भपात भारत में मातृ मृत्यु दर की तीसरी बड़ी वजह है. इस रिपोर्ट के अनुसार 2007 से 11 के बीच भारत में 67 फीसदी अबॉर्शन को असुरक्षित माना गया था. 

दिल्ली में गर्भपात का विकल्प चुनने वाली महिलाओं का अनुपात राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से ज्यादा है. राजधानी में गर्भवती हुई 5.7 फीसदी महिलाएं गर्भपात का विकल्प चुनती हैं. जबकि राजस्थान में ये आंकड़ा 1.5 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 1.3 प्रतिशत है.  19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गर्भपात का विकल्प चुनने वाली महिलाओं का अनुपात राष्ट्रीय औसत 2.9 से ज्यादा है.  

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