तहलका पत्रिका के संस्थापक तरुण तेजपाल से जुड़े 2013 के कथित यौन उत्पीड़न मामले में शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ में सुनवाई हुई. इस दौरान तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने शिकायतकर्ता के बयानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके जवाबों में कई विरोधाभास हैं और वह अहम सवालों पर बार-बार 'ट्रॉमा' और 'एम्नेशिया' (याददाश्त खोना) का हवाला देती रही हैं. बचाव पक्ष ने हाई कोर्ट में दलील दी कि शिकायतकर्ता ने मामले को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की.
तरुण तेजपाल की ओर से हाई कोर्ट में शिकायतकर्ता और उनके दोस्तों के बीच हुई व्हाट्सऐप बातचीत भी पेश की गई. बचाव पक्ष का दावा है कि ये संदेश इस बात से मेल नहीं खाते कि कथित घटना के बाद शिकायतकर्ता गहरे सदमे में थीं. वकील ने कहा कि एक संदेश में शिकायतकर्ता ने 'रेन ऑफ सेक्सुअल टेरर' (यौन आतंक का माहौल) बनाने की बात कही थी. बचाव पक्ष ने इसे उनके कथित मानसिक रुख का संकेत बताया.
रॉबर्ट डी नीरो के साथ फोटो का भी जिक्र
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि 7 नवंबर 2013 की कथित घटना के बाद भी शिकायतकर्ता कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में सामान्य रूप से शामिल होती रहीं. वकील ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता ने खुद तरुण तेजपाल को संदेश भेजकर हॉलीवुड अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो के साथ फोटो खिंचवाने के लिए बुलाया था. उस समय डी नीरो 'थिंकफेस्ट' कार्यक्रम में शामिल होने आए थे और शिकायतकर्ता उनकी कोऑर्डिनेटर (चैपरोन) थीं.
बचाव पक्ष का कहना था कि यदि शिकायतकर्ता वास्तव में तेजपाल से डरी हुई थीं, तो वह उन्हें स्वयं फोटो के लिए क्यों बुलातीं. वकील ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने जिरह के दौरान स्वीकार किया था कि डी नीरो के साथ उनकी जिम्मेदारी विशेष रूप से उन्हीं तक सीमित नहीं थी और यह काम किसी अन्य सहयोगी को भी दिया जा सकता था.
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लिफ्ट में कथित घटना पर भी उठाए सवाल
बचाव पक्ष ने कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े घटनाक्रम पर भी सवाल उठाए. शिकायतकर्ता का आरोप था कि तरुण तेजपाल ने लिफ्ट के बटन दबाकर उसे लगातार चलाते रखा ताकि दरवाजे न खुलें. इस पर बचाव पक्ष ने विशेषज्ञ की राय और सीसीटीवी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि तकनीकी रूप से ऐसा संभव नहीं है. वकील ने अदालत में कहा कि विशेषज्ञ ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई यात्री लगातार 'क्लोज डोर' बटन भी दबाए, तब भी लिफ्ट किसी मंजिल पर पहुंचने के बाद उसके दरवाजे स्वतः पूरी तरह खुल जाएंगे. बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि जिरह के दौरान शिकायतकर्ता ने बाद में कहा कि उन्हें यह याद नहीं कि कितने बटन दबाए गए थे.
माफी वाला मेल अपराध का कबूलनामा नहीं
अभियोजन पक्ष पहले तरुण तेजपाल द्वारा शिकायतकर्ता को भेजे गए माफी वाले ईमेल को अपराध स्वीकार करने का सबूत बता चुका है. इस पर बचाव पक्ष ने कहा कि वह ईमेल यौन उत्पीड़न की स्वैच्छिक स्वीकारोक्ति नहीं था, बल्कि तहलका की प्रतिष्ठा बचाने के लिए तत्कालीन प्रबंधन के दबाव में लिखा गया था. बचाव पक्ष ने हाई कोर्ट से कहा कि तरुण तेजपाल ने संस्थान को बचाने के लिए माफी वाला ईमेल भेजने पर सहमति जताई थी. उस समय वह अपनी मां की गंभीर बीमारी समेत कई व्यक्तिगत और संस्थागत दबावों से भी गुजर रहे थे.
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नवंबर 2013 में गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित तहलका थिंकफेस्ट इवेंट के दौरान लिफ्ट के अंदर तरुण तेजपाल ने उनका यौन उत्पीड़न किया था. साल 2021 में गोवा की एक सत्र अदालत ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था. इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ में चुनौती दी है, जहां मामले की सुनवाई जारी है.
विद्या