पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने कहा है कि यूपीए-2 सरकार के दौरान अपने कार्यकाल में उन पर कभी कोई दबाव नहीं डाला गया. कुरैशी ने कहा कि उस समय चुनाव आयोग की छवि इतनी मजबूत थी कि कोई भी दबाव डालने की हिम्मत नहीं कर सकता था.
एस वाई कुरैशी 30 जुलाई 2010 से 10 जून 2012 तक देश के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान कभी किसी तरह का दबाव झेलना पड़ा, तो उन्होंने साफ इनकार किया. उन्होंने कहा कि उस समय चुनाव आयोग की साख इतनी ऊंची थी कि किसी की भी हिम्मत नहीं होती थी कि वह आयोग के पास आकर कोई दबाव बनाए.
चुनाव की तारीखों को लेकर कुरैशी ने एक दिलचस्प बात बताई. उन्होंने कहा कि इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के लोग चुनाव आयोग की बिल्डिंग के आसपास घूमते रहते थे ताकि पता लगा सकें कि चुनाव की तारीखें क्या तय हो रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा सबसे बाद में पता चलता था कि चुनाव कब होंगे. आयोग तारीखों का ऐलान प्रेस कॉन्फ्रेंस में करता था और उसी समय सरकार को भी इसकी जानकारी मिलती थी.
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जब कुरैशी से पूछा गया कि क्या अब हालात बदल गए हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता. उन्होंने उम्मीद जताई कि हालात नहीं बदले होंगे, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उनके पास इस बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है.
कुरैशी ने ये बातें अपनी नई किताब 'इंडिया एंड आई ए हंड्रेड मेमोरीज नॉट अ मेमॉयर' के लॉन्च से पहले कहीं. यह किताब हैचेट इंडिया ने प्रकाशित की है और इसमें कुरैशी के जीवन की सौ यादगार घटनाओं का जिक्र है.
कुरैशी का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष मौजूदा चुनाव आयोग पर सरकार के साथ मिलीभगत के आरोप लगा रहा है. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रहा है, हालांकि आयोग और सरकार दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है.
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