कर्नाटक SIR विवाद: चुनाव आयोग से NDA की शिकायत, मस्जिद-मदरसों में सत्यापन का आरोप

कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. एक तरफ विपक्ष निष्पक्ष प्रक्रिया की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं. ये मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच चुका है.

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कर्नाटक में वोटर वेरिफिकेशन पर घमासान, चुनाव आयोग पहुंचा प्रतिनिधिमंडल. (File Photo: ITG) कर्नाटक में वोटर वेरिफिकेशन पर घमासान, चुनाव आयोग पहुंचा प्रतिनिधिमंडल. (File Photo: ITG)

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:00 PM IST

कर्नाटक में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है. BJP और JDS के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ECI) के कार्यालय पहुंचकर प्रक्रिया में गड़बड़ियों और देरी की शिकायत दर्ज कराई. प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने किया.

प्रल्हाद जोशी ने कहा कि BJP के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को बताया कि कर्नाटक में SIR प्रक्रिया चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक नहीं चल रही है. उन्होंने कहा कि आयोग के निर्देश हैं कि हर बूथ लेवल ऑफिसर को घर-घर जाकर सत्यापन करना चाहिए. प्रत्येक घर में कम से कम 3 बार जाना अनिवार्य है.

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उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के कई इलाकों से शिकायतें मिली हैं कि ये प्रक्रिया मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों, कुछ स्थानीय कांग्रेस नेताओं के घरों के अलावा मुतवल्ली और मौलानाओं के माध्यम से कराई जा रही है. BJP का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है. 

उनके मुताबिक यह घर-घर सत्यापन के बजाय बड़े पैमाने पर फॉर्म भरने जैसा बन गया है. SIR प्रक्रिया का उद्देश्य प्रत्येक मतदाता का घर-घर जाकर सत्यापन करना है. इसमें यह जांच की जाती है कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में मौजूद है या नहीं, उसका कानूनी दर्जा क्या है और वह जीवित है या नहीं. 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई वर्षों बाद यह विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है, इसलिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है. SIR की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है. BJP ने चुनाव आयोग के सामने एक और गंभीर मुद्दा भी उठाया. लोगों से कहा जा रहा है कि मतदाता सूची से नाम हटने पर लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे. 

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प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को यह भी बताया कि गाइडलाइंस के अनुसार SIR प्रक्रिया में पिता, माता, दादा या दादी जैसी पारिवारिक जानकारी को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए. लेकिन कई जगहों पर कथित तौर पर इन जानकारियों की मांग की जा रही है. जब लोग आपत्ति दर्ज कराते हैं तो उन्हें धमकी भरा जवाब मिलता है.

उनसे कहा जाता है, "जाओ और जिससे चाहो शिकायत करो. यह कांग्रेस सरकार है और कोई हमें सस्पेंड नहीं कर सकता." पार्टी का कहना है कि यदि इस तरह की बातें कही जा रही हैं तो यह पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने की सुनियोजित कोशिश का संकेत है. पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतारने की बड़ी साजिश का हिस्सा है.

BJP-JDS प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के सामने दो प्रमुख मांगें भी रखीं. पहली, जिन बूथ लेवल ऑफिसरों ने एक ही स्थान पर बैठकर, जिनमें धार्मिक स्थल भी शामिल हैं, SIR प्रक्रिया पूरी की है, उन्हें तत्काल सस्पेंड किया जाए. दूसरी मांग यह कि जहां भी अनियमितताओं के ठोस सबूत मौजूद हैं, वहां संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. 

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