भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, मुस्लिम पक्ष को मिली नमाज की अलग जगह

सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में अंतरिम आदेश देते हुए कहा है कि अंतिम फैसला आने तक मुस्लिम पक्ष को विवादित परिसर के पास अलग खुली जगह पर हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने की व्यवस्था की जाए. अदालत ने एएसआई को बिना अनुमति कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं करने का निर्देश दिया. साथ ही कहा कि मामला संवेदनशील है, इसलिए दोनों पक्ष धैर्य रखें. हाईकोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने चुनौती दी है.

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सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में अंतरिम आदेश दिया है. (photo: ITG) सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में अंतरिम आदेश दिया है. (photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:37 PM IST

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम अंतरिम आदेश जारी किया. अदालत ने कहा कि मामले का अंतिम फैसला होने तक मुस्लिम पक्ष को विवादित परिसर से सटी अलग खुली जगह पर हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने की व्यवस्था की जाए. साथ ही स्पष्ट किया कि यह केवल अंतरिम व्यवस्था होगी और इससे मामले के अंतिम निर्णय पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे. पीठ ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है. इसलिए दोनों पक्षों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और अदालत में कही जाने वाली हर बात को सावधानी से रखा जाना चाहिए ताकि किसी तरह का विवाद या गलत संदेश न जाए.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 15 मई के फैसले को चुनौती दी गई है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में धार स्थित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना था और 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा जारी उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भी निर्देश दिया कि अदालत की अनुमति के बिना विवादित स्थल पर किसी भी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव नहीं किया जाएगा. अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार, एएसआई और अन्य पक्षों को नोटिस जारी करते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए तैयार रहने को कहा. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह इस मामले की रोजाना सुनवाई कर जल्द समाधान निकालने को तैयार है.

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि हाईकोर्ट के फैसले से कई सौ वर्षों से चली आ रही व्यवस्था बदल गई है. उनका कहना था कि 2003 से लागू व्यवस्था, जिसमें हिंदू और मुस्लिम समुदाय अलग-अलग दिनों में पूजा और नमाज करते थे, उसे फिलहाल बहाल किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि सदियों तक दोनों समुदायों का एक ही परिसर में धार्मिक गतिविधियां करना सांप्रदायिक सौहार्द का उदाहरण रहा है.

वहीं, मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यथास्थिति बहाल करने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद परिस्थितियां बदल चुकी हैं और दो महीने बाद पुरानी व्यवस्था लागू करने से प्रशासनिक कठिनाइयां पैदा होंगी.

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गौरतलब है कि 15 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला परिसर का धार्मिक स्वरूप देवी सरस्वती के मंदिर का है. अदालत ने यह भी कहा था कि केंद्र सरकार और एएसआई परिसर के प्रबंधन पर निर्णय ले सकते हैं. साथ ही राज्य सरकार से धार जिले में मस्जिद निर्माण के लिए अलग भूमि देने के अनुरोध पर विचार करने को भी कहा था. इसके अलावा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से लंदन संग्रहालय में रखी मां सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाने की मांग पर भी विचार करने का सुझाव दिया था.

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए मुस्लिम पक्ष के लिए अलग नमाज स्थल उपलब्ध कराने और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई जल्द होने की संभावना है, जिसमें विवाद के विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा.

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