ओडिशा: बच्चा चोर समझकर NGO कर्मियों पर हमला, भीड़ ने फाड़े महिला के कपड़े

ओडिशा के रायगड़ा में बच्चा चोर समझकर NGO के दो कर्मचारियों पर हमला हुआ. इस दौरान महिला से बदसलूकी की गई. पुलिस ने 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

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भीड़ ने एनजीओ वर्कर्स को घेरकर हमला कर दिया. (Photo: Screengrab) भीड़ ने एनजीओ वर्कर्स को घेरकर हमला कर दिया. (Photo: Screengrab)

अजय कुमार नाथ

  • भुवनेश्वर,
  • 20 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:32 PM IST

ओडिशा के रायगड़ा जिले में भीड़ के द्वारा हिंसा की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. इस वाकये से लोगों में भारी आक्रोश पैदा है. सूबे के बाहर से आए दो NGO कर्मचारियों पर गांव वालों ने बच्चा चोर होने के शक में कथित तौर पर हमला कर दिया. कर्मचारियों में एक महिला और एक पुरुष शामिल थे, जिन पर भीड़ ने हमला कर दिया और बदतमीजी की. भीड़ ने समझाने की कोशिश के बाद महिला के साथ बदसुलूकी की और कपड़े फाड़ जिए.

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यह घटना 16 जून को कल्याणसिंहपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले इंटालीगुडा गांव में हुई. इस घटना ने कानून हाथ में लेने और भीड़ द्वारा न्याय करने (मॉब जस्टिस) के बढ़ते चलन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं.

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित उस इलाके से गुज़र रहे थे, तभी स्थानीय लोगों ने उन्हें बच्चा चोर समझकर उन पर हमला कर दिया.  स्थिति तेजी से बिगड़ गई क्योंकि वहां भारी भीड़ जमा हो गई और NGO कर्मचारियों द्वारा अपनी पहचान बताने की कोशिशों के बावजूद उन पर हमला करना शुरू कर दिया.

16 लोग गिरफ्तार...

रायगढ़ा के पुलिस अधीक्षक राज प्रसाद ने बताया कि पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया है. एसपी ने कहा, "हमने अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें कुछ मुख्य आरोपी भी शामिल हैं. पूछताछ और फुटेज व गवाहों की जांच-पड़ताल चल रही है. कई धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है."

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महिला ने बताई हैवानियत की दास्तान

पीड़िता ने बताया कि उसने अपना NGO का आधिकारिक पहचान पत्र दिखाकर बार-बार अपनी पहचान साबित करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उसकी बात नहीं मानी.

उन्होने बताया, "मैंने वह ID कार्ड दिखाया. हमें जो ID मिलती है, मैंने वही दिखाई. उन्होंने उस पर यकीन नहीं किया. उन्होंने मुझे बहुत बुरी तरह पीटा. वे मेरे बाल खींचने लगे, मेरे कपड़े फाड़ने लगे और कोई मुझे गलत तरीके से छू रहा था. कोई मुझे बहुत बेरहमी से पीट रहा था. कुछ लोग मुझे बचाने की कोशिश भी कर रहे थे. फिर, किसी तरह मुझे बचाकर उन्होंने गाड़ी में बिठाया."

दूसरे पीड़ित ने बताया कि वे Google Maps के बताए रास्ते से गांव पहुंचे थे और अगर ऐसा न होता तो वे उस इलाके में कभी नहीं जाते. उन्होंने कहा, "Google Maps ने वह रास्ता दिखाया था, इसलिए हम उधर जा रहे थे, वरना हम नहीं जाते. गांव वाले हमारा पीछा कर रहे थे और गांव के सभी लोग लाठियां लेकर खड़े थे. किसी ने तो उन पर पत्थर भी फेंका."

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