उत्तराखंड की पर्यटन राजधानी कहे जाने वाले नैनीताल में अब शहर में प्रवेश करना लगातार महंगा होता जा रहा है. पार्किंग शुल्क, ग्रीन टैक्स और अन्य वसूली के बाद अब बाहरी जिलों और राज्यों से आने वाले दोपहिया वाहनों पर भी 100 रुपये एंट्री टैक्स (चुंगी) लागू कर दिया गया है. इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों और पर्यटकों में भारी नाराजगी है. सोशल मीडिया पर लोग तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब नैनीताल में चलने और सांस लेने पर भी टैक्स लगेगा?
बुधवार रात 12 बजे से लागू हुई इस व्यवस्था के तहत तल्लीताल लेक ब्रिज, बारापत्थर और फांसी गधेरा चुंगी नाकों पर वसूली शुरू हो गई है .नगर पालिका ने 24.55 करोड़ रुपये में चुंगी वसूली का ठेका दिया है, जो मार्च 2028 तक प्रभावी रहेगा.
गुपचुप तरीके से ठेका देने का आरोप
नगरपालिका का नगर प्रवेश शुल्क के टेंडर को 21 महीने के लिए गाजियाबाद की एक कंपनी एमजी इन्फ्रा को देने की भनक लगते ही नगर पालिका नैनीताल के सभासदों ने सभासद जितेंद्र पाण्डेय के नेतृत्व में भारी विरोध और धरना प्रदर्शन किया, जिसके बाद नगरपालिका अध्यक्ष सरस्वती खेतवाल ने लिखित आश्वासन सभासदों को दिया कि बिना बोर्ड बैठक में पास कराए टेंडर नहीं दिया जाएगा.
नगरपालिका की बोर्ड बैठक 18 जुलाई को प्रस्तावित थी, पर मनमाने तरीके से अध्यक्ष की ओर से 16 जुलाई 2026 को ही ठेका गाजियाबाद की एक कंपनी एमजी इन्फ्रा को दे दिया गया.
नई व्यवस्था के अनुसार, सिर्फ UK-04 रजिस्ट्रेशन वाले दोपहिया वाहन शुल्क से मुक्त रहेंगे. UK-04से मतलब सिर्फ नैनीताल जिले के दोपहिया वाहन इस टैक्स से मुक्त रहेंगे. नैनीताल नगर प्रवेश शुल्क:-
दोपहिया वाहन- सिर्फ UK-04 (नैनीताल जिला)- पूरी तरह मुफ्त
दोपहिया वाहन- उत्तराखंड के अन्य जिले या बाहरी राज्यों के वाहन- ₹100 प्रति प्रवेश
चारपहिया वाहन- UK-04 (नैनीताल जिला) के स्थानीय निवासियों के वाहन- ₹200 प्रति प्रवेश
चारपहिया व भारी वाहन - नैनीताल जिले के अलावा अन्य जिले और बाहरी राज्यों के वाहन - ₹300 प्रति प्रवेश
स्थानीय निवासियों के लिए पास- नैनीताल शहर के स्थायी निवासी - ₹800 शुल्क जमा कर पास बनेगा
स्थानीय लोगों का तीखा सवाल
यहीं से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है. उनका कहना है कि नैनीताल के हजारों परिवारों के बच्चे पढ़ाई और नौकरी के कारण दूसरे शहरों में रहते हैं. उन्होंने वहीं से अपने वाहन खरीदे हैं और जब भी घर लौटेंगे, हर बार उन्हें एंट्री टैक्स देना पड़ेगा. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अपने ही शहर लौटने की कीमत भी अब चुकानी होगी?
लोगों का कहना है कि पर्यटन पर निर्भर शहर में लगातार नए-नए टैक्स लगाकर आखिर किसे लाभ पहुंचाया जा रहा है? पहले पार्किंग शुल्क, फिर ग्रीन टैक्स और अब बाइक पर भी एंट्री टैक्स, ऐसा लगता है मानो नैनीताल आने वाला हर व्यक्ति केवल राजस्व का स्रोत बनकर रह गया हो.
बवाल बढ़ा तो बैकफुट पर आईं पालिका अध्यक्ष
नगर पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने कहा कि वर्तमान में वे शहर मे नही हैं. उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें मामले की जानकारी मिली उन्होंने पालिका के अधिकारियों को निर्देशित कर दिया है कि फिलहाल वह तीनों टोल पोस्टों में दोपहिया वाहनों से शुल्क न वसूलें.
उन्होंने कहा कि वह शुक्रवार पालिका आकर मामले में अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी. बताया कि दोपहिया वाहनों से शुल्क वसूली का प्रस्ताव गजट में प्रकाशित हो चुका है.
लीला सिंह बिष्ट