दुबई में भारतीय डॉक्टरों-नर्सों पर मंडराया वीजा बैन का खतरा, केरल के सीएम ने पीएम मोदी से लगाई मदद की गुहार

दुबई में एक हॉस्पिटल के बंद होने से वहां कार्यरत कई भारतीय डॉक्टरों व नर्सों की नौकरी चली गई है. अब यूएई इमिग्रेशन विभाग सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उनके कामकाजी और विजिट वीजा रिजेक्ट कर रहा है, जिससे ग्रेस पीरियड खत्म होने के बाद स्थायी बैन और मेडिकल लाइसेंस रद्द होने का खतरा है. इस मामले में केरल के सीएम वीडी सतीशन ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की है.

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केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने मदद के लिए पीएम मोदी को लिखा पत्र (File Photo) केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने मदद के लिए पीएम मोदी को लिखा पत्र (File Photo)

मारिया शकील

  • तिरुवनंतपुरम ,
  • 07 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

दुबई में काम करने वाले कई भारतीय डॉक्टरों-नर्सों के सामने वीजा की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है. UAE के इमिग्रेशन सिस्टम में आ रही दिक्कतों की वजह से इन स्वास्थ्य कर्मियों पर वीजा बैन का खतरा मंडरा रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत मदद की गुहार लगाई है. उन्होंने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर भारत सरकार से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की.

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यह पूरा मामला दुबई के जुमेरा इलाके में स्थित ईरानी हॉस्पिटल का है. हाल ही में युद्ध से जुड़े हालातों के चलते इस अस्पताल को बंद करने का आदेश जारी किया गया था. अस्पताल के बंद होते ही वहां काम करने वाले तमाम भारतीय कर्मचारियों की नौकरी चली गई. परेशानी तब ज्यादा बढ़ गई जब नौकरी जाने के बाद इन स्वास्थ्य कर्मियों को वीजा से जुड़े कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा.

सुरक्षा कारणों का हवाला देकर वीजा रिजेक्ट

प्रभावित कर्मचारियों ने केरल के मुख्यमंत्री को भेजी अपनी शिकायत में बताया कि यूएई इमिग्रेशन विभाग की तरफ से उनके नए वीजा आवेदन लगातार रद्द हो रहे हैं. जब वे नया कामकाजी वीजा, विजिट वीजा या पति-पत्नी (स्पाउस) वीजा के लिए अप्लाई करते हैं, तो सिस्टम में सुरक्षा कारणों की टिप्पणी लिखकर उसे खारिज कर दिया जा रहा है. सालों से वहां पूरी ईमानदारी के साथ कानून मानकर काम कर रहे इन मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है.

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पीड़ित भारतीय स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि वे इस समय यूएई में ग्रेस पीरियड यानी मिले हुए अतिरिक्त समय पर रुके हैं. यह समय सीमा खत्म होते ही उन्हें वहां से बाहर निकलना पड़ेगा. जो लोग इस स्थिति के बाद पहले ही भारत लौट आए हैं, उन पर वहां बैन लगा दिया गया है. अब बाकी बचे कर्मचारियों को डर है कि अगर उन पर भी ऐसा प्रतिबंध लगा, तो वे कभी वापस नहीं लौट पाएंगे. इससे उनका मेडिकल लाइसेंस भी रद्द हो जाएगा और उनका करियर पूरी तरह खराब हो जाएगा.

मुसीबत में फंसे इन हेल्थवर्कर्स में ज्यादातर लोग केरल के हैं. इन्होंने कोरोना के गंभीर दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर यूएई के अस्पतालों में सेवाएं दी थीं. मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने पीएम मोदी से मांग की है कि भारतीय दूतावास के जरिए इस पूरे मामले की समीक्षा कराई जाए, ताकि इन बेकसूर भारतीयों पर लगा वीजा प्रतिबंध तुरंत हट सके.
 

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