दुर्गा पूजा पंडाल में HC ने रोकी श्रद्धालुओं की एंट्री, SC में अपील करेगी ममता सरकार!

कोरोना संकट के बीच दुर्गा पूजा पंडाल को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट से पश्चिम बंगाल सरकार को झटका लगा है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने सभी पूजा पंडालों को नो एंट्री जोन घोषित किया है.

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सभी दुर्गा पूजा पंडाल अब आगंतुकों के लिए नो-एंट्री जोन होंगे (फोटो-PTI) सभी दुर्गा पूजा पंडाल अब आगंतुकों के लिए नो-एंट्री जोन होंगे (फोटो-PTI)

मनोज्ञा लोइवाल

  • कोलकाता,
  • 19 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 10:22 PM IST
  • दिशानिर्देश का पालन नहीं करने पर खिंचाई
  • बंगाल में पूजा पंडाल नो एंट्री जोन घोषित
  • पंडाल में सिर्फ आयोजकों को जाने की इजाजत

कोरोना संकट के बीच दुर्गा पूजा पंडाल को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट से पश्चिम बंगाल सरकार को झटका लगा है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने सभी पूजा पंडालों को नो एंट्री जोन घोषित किया है. वहीं बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ऑर्डर की कॉपी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के विकल्पों पर विचार कर रही है.

राज्य में सभी दुर्गा पूजा पंडाल अब आगंतुकों के लिए नो-एंट्री जोन होंगे. हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि पंडाल में केवल आयोजकों की एंट्री होगी, और पंडाल के बाहर आयोजकों के नाम का उल्लेख किया जाना चाहिए. पंडाल परिसर में अधिकतम 25 सदस्यों की अनुमति है. कोर्ट ने कहा कि पंडाल में जाने वाले आयोजकों के नाम और संख्या फिक्स होगी और इसे रोज बदला नहीं जा सकता है. अदालत ने कहा कि छोटे पंडालों के लिए पांच मीटर का क्षेत्र और बड़े पंडालों के लिए 10 मीटर क्षेत्र को भी नो-एंट्री जोन में शामिल किया गया है.
 
जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने नए प्रतिबंधों को लेकर यह आदेश दिया है, जो तुरंत प्रभाव से लागू किए गए हैं. जजों ने इस बात पर भी निराशा जाहिर की कि राज्य सरकार उत्सव के दौरान कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कोर्ट की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को लागू करने की योजना पर काम नहीं किया.

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आदेश के मुताबिक पूजा पंडाल को कंटेनमेंट जोन माना जाएगा. कोर्ट ने कहा कि पुलिसकर्मी इस पर नजर रखेंगे कि आयोजकों द्वारा आदेश का ठीक तरीके से पालन किया जाए. पश्चिम बंगाल के डीजीपी और कोलकाता के पुलिस आयुक्त को इसे लेकर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपनी है. बंगाल में 30 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा है और इससे पहले कोर्ट में सरकार को रिपोर्ट दाखिल करनी है.

बता दें कि राज्य के डॉक्टरों और मेडिकल क्षेत्र के लोगों ने बंगाल सरकार से बार-बार अनुरोध किया था कि वो कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए, वरना महामारी विकराल रूप ले सकती है. 

 

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