बिहार: बिना विधायक बने दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाने को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में 15 जुलाई को सुनवाई

बिहार सरकार में दीपक प्रकाश की मंत्री के रूप में पुनर्नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा. याचिका में सवाल उठाया गया है कि बिना बिहार विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य बने उन्हें दोबारा मंत्री बनाना संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुरूप है या नहीं. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ करेगी.

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पुनर्नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा. File Photo ITG पुनर्नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा. File Photo ITG

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:06 PM IST

बिहार विधान मंडल के किसी भी सदन का सदस्य बने बिना बिहार सरकार में दीपक प्रकाश को मंत्री के रूप में दोबारा नियुक्त यानी पुनर्नियुक्त किए जाने को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा. कोर्ट रजिस्ट्री ने इस मामले को चीफ जस्टिस की कोर्ट के समक्ष कार्यसूची में 51 नंबर पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है. इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी एस मोहना कि पीठ करेगी.​

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यह याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(4) की व्याख्या और दायरे के संबंध में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है, जो संवैधानिक रूप से निर्धारित अवधि के लिए राज्य विधानमंडल का सदस्य बने बिना किसी मंत्री के पद पर बने रहने को नियंत्रित करता है, साथ ही यह चुनौती दी गई नियुक्ति की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाती है.

क्या है पूरा ममला?
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की दोबारा मंत्री नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर बिहार सरकार, चुनाव आयोग और दीपक प्रकाश को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने बिना उन्हें दूसरी बार मंत्री बनाया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 164(4) का उल्लंघन है.

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. एस. मोहना की पीठ ने बिहार निवासी राकेश कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों से जवाब तलब किया. मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होने की संभावना है.

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याचिका में कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 164(4) किसी ऐसे व्यक्ति को, जो राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं है, अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री बने रहने की अनुमति देता है. यदि इस अवधि में वह विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं बनता, तो उसे मंत्री पद छोड़ना होता है. सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि इस छह महीने की अवधि का इस्तेमाल किसी गैर-विधायक को बार-बार मंत्री बनाने के लिए नहीं किया जा सकता.

दीपक प्रकाश, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं. उन्हें 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में पंचायती राज मंत्री बनाया गया था. उस समय भी वह बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे.

इसके बाद नीतीश कुमार के इस्तीफे और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद गठित नई मंत्रिपरिषद में 7 मई 2026 को दीपक प्रकाश को एक बार फिर पंचायती राज मंत्री की शपथ दिलाई गई, जबकि तब भी वह राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे.

अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में यह तय करेगा कि बिना विधायक या विधान पार्षद बने किसी व्यक्ति को दोबारा मंत्री नियुक्त करना संविधान के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं.

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