मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) से धैर्य बनाए रखने की अपील की है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने के लिए डे-टू-डे (रोजाना) सुनवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है. साथ ही कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने इनकार कर दिया है
दरअसल, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई को अपना फैसला सुनाया कि विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है. साथ ही कोर्ट ने ASI के दशकों पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिम समुदाय को इस जगह पर शुक्रवार की नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी.
हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और भोजशाल परिसर में नमाज पढ़ने की मंजूरी मांग थी. सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई की.
अब तीन हफ्ते बाद होगी सुनवाई
शीर्ष अदालत ने इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए कहा कि अदालत में कही गई बातें अनावश्यक विवाद पैदा कर सकती हैं, इसलिए हर टिप्पणी बहुत सोच-समझकर करने की जरूरत है. अदालत ने अगले 10 से 15 दिनों के अंदर इस मामले को एक उपयुक्त बेंच के समक्ष लिस्ड करने की बात कही है. अब इस मामले में कोर्ट तीन हफ्ते बाद सुनवाई करेगा.
MP सरकार और ASI से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर कोई रोक नहीं लगाई है. अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर ASI और MP सरकार से भी उनका जवाब मांगा.
साथ ही कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत भोजशाला परिसर अंदर नमाज पढ़ने की मांग को ठुकरा दिया है और भोजशाला परिसर के पास नजाम पढ़ने के लिए पास में खुली जगह देने की बात कही है. सुनावई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ASI से ये भी कहा कि अगर कोई ढांचागत बदलाव किया जाता है तो वह कोर्ट की मंजूरी के बिना नहीं किया जाएगा.
मुस्लिम पक्ष के वकील ने दी वरशिप एक्ट की दुहाई
वहीं, सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने रिट याचिका का कड़ा विरोध किया और प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट, 1991 की दुहाई दी. उन्होंने तर्क दिया कि वहां सदियों से नमाज अदा होने के पुख्ता साक्ष्य मौजूद हैं.
सिंघवी ने कहा कि अंग्रेजों ने यहां दोपहर एक से तीन बजे के बीच जुमे की नमाज और वसंत पंचमी पर दिन भर सरस्वती पूजा करने का प्रावधान किया था, जो धर्मनिरपेक्षता की एक बड़ी मिसाल है.
SG ने फिर से नमाज शुरू करने का विरोध
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विवादित परिसर में फिर से नमाज शुरू करने का पुरजोर विरोध किया और कहा कि हाईकोर्ट का आदेश बिल्कुल स्पष्ट है.उन्होंने मामले को दो-तीन महीने टालने को कहा.
इससे पहले सोमवार को मुस्लिम अपीलकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी और एडवोकेट निज़ाम पाशा ने बेंच से आग्रह किया था कि इन याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है. इस पर सीजेआई ने याचिकाकर्ताओं को कमियां दूर करने को कहा था.
संजय शर्मा / सृष्टि ओझा