उद्धव सेना ने अपने 6 बागी सांसदों को भेजा लीगल नोटिस, एकनाथ शिंदे बोले- चिट्ठी कूड़ेदान में फेंक दी

शिवसेना (UBT) और एकनाथ शिंदे गुट के बीच सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है. उद्धव ठाकरे की पार्टी ने बगावत कर शिंदे गुट में शामिल हुए छह लोकसभा सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है. पार्टी का कहना है कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना संसदीय दल का विलय कानूनन मान्य नहीं है. वहीं, एकनाथ शिंदे ने नोटिस को खारिज करते हुए कहा कि सांसदों ने इसे कूड़ेदान में फेंक दिया.

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उद्धव सेना ने ​शिंदे सेना जॉइन करने वाले अपने 6 बागी सांसदों को लीगल नोटिस भेजा. (File Photo: PTI) उद्धव सेना ने ​शिंदे सेना जॉइन करने वाले अपने 6 बागी सांसदों को लीगल नोटिस भेजा. (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 15 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:10 AM IST

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए अपने छह लोकसभा सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है. पार्टी का कहना है कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना संसदीय दल का विलय कानूनन संभव नहीं है. वहीं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस नोटिस को बेअसर बताते हुए कहा कि उनके सांसदों ने इस पत्र को कूड़ेदान में फेंक दिया और इसका कोई कानूनी महत्व नहीं है.

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शिवसेना (UBT) के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने 13 जुलाई को भेजे गए नोटिस में बगावत करने वाले 6 सांसदों से कहा कि उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में और शिवसेना (UBT) के चुनाव चिह्न पर लड़कर जीता था. उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव में इन सांसदों ने शिंदे गुट के उम्मीदवारों के खिलाफ जीत हासिल की थी. सावंत ने कहा कि मूल राजनीतिक दल यानी शिवसेना (UBT) ने न तो किसी विलय की प्रक्रिया शुरू की है और न ही शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी है.

अरविंद सावंत ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से जानकारी मिली है कि ये सांसद खुद को शिंदे गुट में विलय होने का दावा कर रहे हैं और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से इस विलय को मान्यता देने की मांग कर चुके हैं. उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) के पैरा-4 का हवाला देते हुए कहा कि किसी विधायी दल (लेजिस्लेचर पार्टी) का विलय तभी संभव है, जब पहले मूल राजनीतिक दल का विधिवत विलय हो. मूल दल का विलय नहीं हुआ है, इसलिए संसदीय दल के विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता और ऐसा विलय कानून में मान्य भी नहीं है.

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अरविंद सावंत ने बताया कि पार्टी पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आग्रह कर चुकी है कि शिवसेना (UBT) के टिकट पर चुने गए सांसदों के किसी भी कथित विलय या अलग समूह को मान्यता न दी जाए. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक लोकसभा अध्यक्ष ने इस संबंध में कोई फैसला नहीं दिया है. बता दें कि शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ-ईस्ट), नागेश पाटिल-अष्टीकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) 22 जून को शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल हो गए थे.

हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ने अब तक उनके विलय के दावे पर सार्वजनिक रूप से कोई निर्णय नहीं सुनाया है. नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि सभी छह सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिल चुके हैं, जरूरी दस्तावेज जमा कर चुके हैं और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर चुके हैं. उन्होंने कहा, 'हमारे सांसदों ने वह चिट्ठी कूड़ेदान में फेंक दी. ऐसी चिट्ठियों पर कौन ध्यान देता है? सदन में दो-तिहाई बहुमत मायने रखता है. यह ठाकरे गुट की हताशा है और इस नोटिस का हमारे सांसदों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.'

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उधर, अधिकांश बागी सांसदों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. हिंगोली से सांसद नागेश अष्टीकर ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें इसका जवाब देने की कोई जरूरत नहीं लगती. इस बीच, शिवसेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि छहों सांसदों ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. पार्टी के मुताबिक, अमित शाह ने उनके संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग और पर्याप्त वित्तीय सहायता का भरोसा दिया.

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