सैलरी डे पर कैश की किल्लत से हर कोई परेशान, स्कूल छोड़ बैंक में खड़े टीचर

सिथिंया कहती है कि उन्हें स्कूल में पढ़ाने जाते वक्त चैकबुक साथ में लेकर चलनी पड़ती है, रास्ते में एटीएम तो है लेकिन किसी में कैश नहीं है और जहां है वहां काफी भीड़ है.

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सैलरी को तरसते टीचर सैलरी को तरसते टीचर

पंकज खेळकर

  • पुणे,
  • 01 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 7:26 PM IST

नोटबंदी के कारण हर ओर अफरा-तफरी का माहौल है, साथ ही नया महीना शुरू होने से लोगों को सैलरी लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.

ऐसा ही एक मामला पुणे से सामने आया है जहां सिथिंया गलांडे जो कि पेशे से टीचर है जिन्हें सैलरी के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. यूं तो सिथिंया नोटबंदी के फैसले का समर्थन करती है लेकिन वह कहते है कि इसको लागू करने में सरकार विफल रही है.

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सिथिंया कहती है कि उन्हें स्कूल में पढ़ाने जाते वक्त चैकबुक साथ में लेकर चलनी पड़ती है, रास्ते में एटीएम तो है लेकिन किसी में कैश नहीं है और जहां है वहां काफी भीड़ है. आज महीने का पहले दिन होने के कारण सभी को पैसे देने थे इसी कारण गुरूवार को स्कूल पहुंचते ही सिथिंया ने प्रिंसिपल के ऑफिस का रुख किया जहां पहुंचते ही उन्होंने आधे दिन की छुट्टी मांगी, क्योंकि उन्हें जाकर पैसे निकालने है और घर की नौकरानी, प्रेस वाले और दूधवाले को पैसे देने हैं.

गौरतलब है कि सैलरी डे होने के कारण बैंकों में लोगों की काफी भीड़ है और पैसों की किल्लत, जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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