मुंबई का जुहू बीच देश के सबसे लोकप्रिय समुद्री तटों में है. हर दिन हजारों लोग यहां मॉर्निंग वॉक, शाम की सैर, स्ट्रीट फूड और समुद्र का नजारा देखने पहुंचते हैं. लेकिन इन दिनों जुहू बीच का नजारा पूरी तरह बदल गया है. समुद्र किनारे रेत की जगह प्लास्टिक की बोतलें, थर्माकोल, लकड़ियां, कपड़े, घरेलू कचरा और अन्य मलबा फैला हुआ है. इससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
जुहू बीच पर लगातार सफाई अभियान चल रहा है. जेसीबी मशीनें, ट्रैक्टर और बड़ी संख्या में बीएमसी कर्मचारी सुबह से शाम तक कचरा हटाने में जुटे हैं. इसके बावजूद हर ज्वार के साथ नया कचरा किनारे पर पहुंच रहा है, जिससे सफाई अभियान और चैलेंजिंग हो गया है.
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह में मुंबई में 1000 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई. इस दौरान शहर के छोटे-बड़े नाले और प्राकृतिक जलमार्ग बड़ी मात्रा में बहता हुआ कचरा अरब सागर तक ले गए. अब समुद्र का ज्वार-भाटा सिस्टम उसी कचरे को वापस किनारे पर ला रहा है.
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बीएमसी का कहना है कि करीब 7 किलोमीटर लंबे जुहू बीच पर हर दिन लगभग 350 मीट्रिक टन कचरा पहुंच रहा है. सामान्य दिनों में यह मात्रा करीब 60 मीट्रिक टन प्रतिदिन होती है. यानी इस बार सामान्य से कई गुना ज्यादा कचरा समुद्र तट पर जमा हो रहा है.
नगरपालिका के मुताबिक, लगातार सफाई अभियान चलाया जा रहा है. बीएमसी रोजाना लगभग 180 मीट्रिक टन कचरा हटा रही है. पिछले 10 दिनों में करीब 1800 मीट्रिक टन कचरा बीच से हटाकर वैज्ञानिक तरीके से उसका निस्तारण किया गया है.
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बीएमसी में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर भी जुहू बीच पहुंचीं. उन्होंने मौके पर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया और बीएमसी प्रशासन पर सवाल उठाए.
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किशोरी पेडणेकर ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद बीच का दौरा किया. उनके मुताबिक, अगर नालों की समय पर और सही तरीके से सफाई (डिसिल्टिंग) हुई होती, तो इतनी बड़ी मात्रा में कचरा समुद्र तक नहीं पहुंचता. उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि मानसून से पहले नालों की सफाई का काम अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष बीएमसी के खर्च और तैयारियों पर 'श्वेत पत्र' की मांग करेगा.
बीजेपी ने क्या कहा?
मुंबई बीजेपी अध्यक्ष और विधायक अमीत साटम ने भी जुहू बीच का दौरा किया. उन्होंने बीएमसी अधिकारियों के साथ सफाई अभियान की समीक्षा की. अमीत साटम ने कहा कि इस बार हाई टाइड के दौरान बड़ी मात्रा में कचरा समुद्र से वापस आ रहा है. इसे देखते हुए अतिरिक्त कर्मचारी और मशीनें तैनात की गई हैं, ताकि सफाई का काम तेजी से पूरा किया जा सके. उन्होंने बताया कि बीएमसी को निर्देश दिए गए हैं कि जहां-जहां नाले और नदियां समुद्र में मिलती हैं, वहां 'ट्रैश बूम' लगाए जाएं. इन बैरियरों का उद्देश्य समुद्र में जाने से पहले ही कचरे को रोकना और निकालना है.
सिर्फ सफाई नहीं, बड़ी चुनौती भी
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जुहू बीच पर जमा कचरा केवल सफाई व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह शहरी कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक प्रदूषण और जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी बड़ी चुनौती को भी सामने लाता है. जब तक नालों में कचरा जाने से नहीं रोका जाएगा और स्रोत स्तर पर कचरा प्रबंधन मजबूत नहीं होगा, तब तक हर मानसून के बाद ऐसी स्थिति दोहराई जा सकती है.
जुहू बीच की यह तस्वीरें सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि उन सभी महानगरों के लिए चेतावनी हैं, जहां भारी बारिश के दौरान नालों के जरिए बड़ी मात्रा में कचरा नदियों और समुद्र तक पहुंचता है. फिलहाल बीएमसी का सफाई अभियान जारी है, लेकिन सवाल यही है कि क्या अगले मानसून से पहले ऐसी व्यवस्था बन पाएगी कि समुद्र को शहर का कचरा वापस किनारे न लौटाना पड़े?
मुस्तफा शेख