EXCLUSIVE: महाराष्ट्र के अकोला में खाद के लिए 8 दिनों से लाइन में खड़े किसानों को मिली राहत

महाराष्ट्र के अकोला में खरीफ सीजन शुरू होते ही यूरिया खाद के लिए भारी किल्लत मच गई. इसके चलते किसान रात 3 बजे से ही कृषि केंद्रों के बाहर लाइन लगाने को मजबूर थे. हालांकि, प्रशासन की मुस्तैदी के बाद अब खाद वितरण का काम तेज होने से किसानों को बड़ी राहत मिली है.

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प्रशासन की मुस्तैदी के बाद किसानों को मिलने लगी यूरिया खाद. (Photo: ITG) प्रशासन की मुस्तैदी के बाद किसानों को मिलने लगी यूरिया खाद. (Photo: ITG)

धनंजय साबले

  • अकोला,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST

महाराष्ट्र के अकोला जिले के अकोट में यूरिया खाद को लेकर किसानों के बीच किल्लत जैसी स्थिति बनी हुई है. खरीफ सीजन के दौरान बढ़ी मांग के कारण कई कृषि केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं. फसल की जरूरत को देखते हुए किसान समय पर खाद लेने के लिए सुबह या देर रात से ही लाइन में लग जाते हैं. खेतों में यूरिया की आवश्यकता अधिक होने से किसानों की परेशानी बनी हुई है, हालांकि प्रशासन की ओर से वितरण व्यवस्था को बेहतर करने और सप्लाई सामान्य रखने के प्रयास किए जा रहे हैं.

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अकोट के कृषि केंद्रों पर किसानों का कहना है कि खाद लेने के लिए पहले से योजना बनाकर आना पड़ता है, क्योंकि भीड़ बढ़ने पर इंतजार का समय भी बढ़ जाता है. कई बार लाइन में अपनी बारी को लेकर हल्की नोकझोंक की स्थिति भी बन जाती है. स्थानीय स्तर पर पहले भी ऐसी स्थिति देखने को मिली है, जिसके बाद व्यवस्था सुधारने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए थे.

कपास की खेती के कारण यूरिया की सबसे ज्यादा मांग

दरअसल, अकोट का यह पूरा इलाका एक प्रमुख कॉटन बेल्ट यानी कपास की खेती वाला क्षेत्र है. यहां के किसान सबसे ज्यादा कपास उगाते हैं, जिसमें यूरिया खाद की मांग सबसे अधिक होती है. खास बात यह भी है कि अकोट मंडी में कपास को पूरे राज्य में सबसे ज्यादा दाम मिलते हैं. इसी वजह से हजारों किसान अपनी पूरी ताकत इसी खेती में झोंक देते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में यूरिया की कुल सप्लाई 7000 मीट्रिक टन है, जिससे करीब 2,14,000 बोरियां तैयार होती हैं.

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अकोट के स्थानीय कृषि केंद्र संचालक शरद घुगे ने आजतक संवाददाता धनंजय साबले से बातचीत में इस भारी भीड़ की असली वजह बताई. उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होने के बाद खेतों तक जाने वाले कच्चे रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते हैं. इस डर से किसान चाहते हैं कि पानी गिरने से पहले ही वे यूरिया अपने घरों तक पहुंचा लें. इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण भी किसानों के मन में डर बैठ गया है कि कहीं आने वाले दिनों में खाद मिलना पूरी तरह बंद न हो जाए. इसी घबराहट में किसान रात से ही दुकानों के बाहर सो रहे हैं.

हालांकि, अब खाद की उपलब्धता बढ़ने से उन्हें राहत मिलने लगी है. किसानों का कहना है कि पहले से ही खाद को लेकर चिंता बनी रहती है और जब कभी सप्लाई में देरी होती है तो स्थिति और बिगड़ जाती है, कई जगह किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि वितरण व्यवस्था को और बेहतर किया जाए, ताकि लंबी लाइन और परेशानी से बचा जा सके.

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