'मंच पर सब थे, लेकिन मेरा बेटा नहीं था…' शहीद का कीर्ति चक्र लेने वाली मां की कहानी

दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित वीरता सम्मान समारोह में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में शहीद हुए अकोला के जवान प्रवीण जंजाल को मरणोपरांत कीर्ति चक्र दिया गया. उनकी मां शालू जंजाल ने सम्मान ग्रहण किया और भावुक होकर राष्ट्रपति के कंधे पर सिर रखकर रो पड़ीं. यह पल पूरे देश के लिए भावनात्मक और गर्व से भरा रहा.

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मां भावुक, खुद को संभाल नहीं पाईं.  (Photo: ITG) मां भावुक, खुद को संभाल नहीं पाईं. (Photo: ITG)

धनंजय साबले

  • अकोला ,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:33 PM IST

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में 8 जून को आयोजित वीरता सम्मान समारोह में एक अत्यंत भावुक क्षण देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में 6 जुलाई 2024 को आतंकियों से मुकाबला करते हुए शहीद हुए अकोला जिले के जवान प्रवीण जंजाल को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनके शौर्य और सर्वोच्च बलिदान के लिए दिया गया. समारोह में जब शहीद प्रवीण जंजाल की मां शालू जंजाल मंच पर अपने बेटे का सम्मान लेने पहुंचीं, तो उनका दर्द और गर्व दोनों आंसुओं के रूप में बाहर आ गया. वो खुद को संभाल नहीं सकीं और भावुक होकर राष्ट्रपति के कंधे पर सिर रखकर रो पड़ीं. इस दौरान राष्ट्रपति ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें सहारा दिया.

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महाराष्ट्र के अकोला जिले के मोरगांव भाकरे गांव के रहने वाले प्रवीण जंजाल भारतीय सेना की महार बटालियन में तैनात थे. उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी. उनके इस बलिदान को देश ने सर्वोच्च सैन्य सम्मान कीर्ति चक्र से नमन किया. सम्मान ग्रहण करते समय शालू जंजाल की आंखों में आंसू थे, लेकिन दिल में बेटे के शौर्य का गर्व भी साफ झलक रहा था. उन्होंने पुरस्कार ग्रहण करने के बाद कहा कि इस सम्मान के रूप में उन्हें उनका बेटा वापस मिल गया है. उनके शब्दों में बेटे की याद और उसके जाने का दर्द दोनों झलक रहे थे.

मंच पर सम्मान था, मगर दिल में खालीपन

शालू जंजाल ने बताया कि पिछले दो वर्षों में ऐसा कोई दिन नहीं गुजरा जब उन्हें अपने बेटे की याद न आई हो. मंच पर पहुंचने के बाद उन्हें चारों ओर लोग दिखाई दे रहे थे, लेकिन उनका बेटा वहां नहीं था. इसी भावना ने उन्हें भावुक कर दिया और वे राष्ट्रपति से लिपटकर रो पड़ीं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, जिसने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया. इसी दौरान उन्होंने एक भावुक इच्छा भी जताई कि उनके बेटे की स्मृति में एक स्मारक बनाया जाए, ताकि उसकी समाधि पर छांव मिल सके.

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'इस सम्मान के रूप में मेरा बेटा मुझे वापस मिल गया'

गर्व और गम के बीच झूलती मां की आंखें

इस मौके पर शहीद के पिता प्रभाकर जंजाळ और भाई सचिन जंजाल भी मौजूद थे. दोनों ने भी अपने बेटे और भाई के बलिदान पर गर्व व्यक्त किया, लेकिन उनके चेहरों पर भावनात्मक दर्द साफ देखा जा सकता था. कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने भी इस दृश्य को बेहद भावुक बताया. राष्ट्रपति भवन में यह क्षण केवल एक सम्मान समारोह नहीं बल्कि एक मां के दर्द और एक बेटे के अमर बलिदान की कहानी बन गया. शहीद प्रवीण जंजाळ का बलिदान देश के लिए प्रेरणा बना हुआ है. कुलगाम में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान उन्होंने साहस दिखाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी. यह समारोह देश के उन वीर जवानों को समर्पित रहा जिन्होंने अपने जीवन की परवाह किए बिना देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा.

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