चुनावी रण में फेल हो रहे हैं BJP के प्रदेश अध्यक्ष, हरियाणा के बाद झारखंड में भी हारे चुनाव

झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी के दिग्गज नेताओं के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ को हार का मुंह देखना पड़ा है. इससे पहले हरियाणा के सियासी संग्राम में सुभाष बराला को भी मात खानी पड़ी थी. इससे साफ जाहिर है कि चुनावी संग्राम में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अपनी ही सीट नहीं बचा पा रहे हैं.

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रघुवर दास और लक्ष्मण गिलुआ रघुवर दास और लक्ष्मण गिलुआ

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 25 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 3:28 PM IST

  • झारखंड में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को चुनाव में मिली हार
  • हरियाणा में भी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नहीं जीत पाए

विधानसभा चुनाव के रण में एक के बाद एक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लगातार फेल हो रहे हैं. झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी के दिग्गज नेताओं के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ को हार का मुंह देखना पड़ा है. इससे पहले हरियाणा के सियासी संग्राम में सुभाष बराला को भी मात खानी पड़ी थी. इससे साफ जाहिर है कि चुनावी संग्राम में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अपनी ही सीट नहीं बचा पा रहे हैं.

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झारखंड की चक्रधरपुर सीट से मैदान में उतरे थे, जिन्हें जेएमएम के सुखराम उरांव ने मात दी है. लक्ष्णण गिलुआ को 31598 वोट मिले हैं जबकि सुखराम के खाते में 43832 वोट पड़े हैं. इस तरह से कांग्रेस प्रत्याशी से गिलुआ को 12234 वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा है.

बता दें कि झारखंड में बीजेपी ने सरकार और संगठन में संतुलन बनाए रखने के लिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान लक्ष्मण गिलुआ को सौंपी थी. से थे, इसलिए बीजेपी ने आदिवासी समुदाय से आने वाले गिलुआ को संगठन की कमान सौंपी थी. इसके बाद भी बीजेपी आदिवासी समुदाय का दिल नहीं जीत पाई है. झारखंड की 28 आदिवासी सीटों में से बीजेपी महज 2 सीट ही जीत सकी है.

हरियाणा में हारे बराला

झारखंड की तरह हरियाणा में भी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला भी अपनी सीट नहीं निकाल सके. सुभाष बराला हरियाणा की टोहाना विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे, जिन्हें जननायक जनता पार्टी के देवेंद्र सिंह बबली ने करारी मात दी. देवेंद्र सिंह बबली को 89799 वोट मिले थे जबकि बीजेपी के सुभाष बराला को 44365 वोट मिले थे. इस तरह से 45434 वोटों से बराला को हार का मुंह देखना पड़ा था.

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हरियाणा में भी बीजेपी ने संगठन और सरकार के बीच जातीय संतुलन बनाने के लिए सुभाष बराला को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी थी. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पंजाबी समुदाय से आते हैं, इसीलिए बीजेपी ने जाट समुदाय से आने वाले सुभाष बराला को संगठन की कमान दी थी. इसके बावजूद सुभाषा बराला जाट समुदाय को पार्टी जोड़ना दूर अपनी सीट भी नहीं बचा पाए.

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