शराबबंदी के समर्थक रहे हैं हेमंत सोरेन, बिहार की राह पर चलेगा झारखंड?

झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य में शराब बिक्री पर पाबंदी लगाने के पक्षधर हैं.

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शराबबंदी के पक्षधर रहे हैं हेमंत सोरेन शराबबंदी के पक्षधर रहे हैं हेमंत सोरेन

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 23 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 1:24 PM IST

  • झारखंड में करीब 22 लाख लोग पीते हैं शराब
  • उन इलाकों में शराब की खपत बढ़ी, जो बिहार की सीमा लगे
  • हेमंत सोरेन चाहते हैं महिआएं करें शराब का विरोध

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए आज की तारीख में सामाजिक सुधार की दिशा में शराबबंदी सबसे सफल हथियार है. उन्होंने महिलाओं के बीच अपनी पकड़ शराबबंदी की वजह से मजबूत कर ली है. लेकिन जब से बिहार में शराबबंदी लागू हुई है तभी से झारखंड के उन इलाकों में शराब की खपत बढ़ गई है, जो बिहार की सीमा लगे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब झारखंड में भी शराबबंदी लागू होगी?

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क्या झारखंड में होगी शराबबंदी?

दरअसल झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य में शराब बिक्री पर पाबंदी लगाने के पक्षधर हैं. उनका मानना है कि झारखंड के गांवों में खासतौर पर शराब की दुकानें नहीं खुलनी चाहिए, क्योंकि राज्य के भोले-भाले आदिवासी शराब के नशे में चूर होकर जिंदगी की दौड़ में पिछड़ रहे हैं.

हेमंत सोरेन का मानना है कि राज्य की महिलाओं को आगे बढ़कर शराब बिक्री का विरोध करना चाहिए. ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है कि अगर झारखंड में JMM की सरकार बनती है तो हेमंत सोरेन शराबबंदी पर कड़े फैसले ले सकते हैं.

हेमंत सोरेन शराबबंदी के पक्षधर

यही नहीं, हेमंत सोरेन लगातार पिछले 5 साल तक लगातार राज्य की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री रघुवर दास को शराब की बिक्री को लेकर घेरते रहे हैं. हेमंत सोरेन कहते हैं कि इस सरकार की प्राथमिकता ही शराब बेचना रही है. साल 2017 में रांची में जहरीली शराब पीने से 14 लोगों की मौत हो गई थी. जिसके बाद हेमंत सोरेन इसके लिए सीधे रघुवर दास को जिम्मेदार ठहरा रहे थे.

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शराबबंदी से और चमकेगी हेमंत सोरेन की राजनीति?

वहीं बीजेपी अभी भी झारखंड में घर-घर तक शराब पहुंचाने के लिए जेएमएम को जिम्मेदारी ठहराती है. चुनाव प्रचार के दौरान रघुवर दास ने कोल्हान के झींकपानी में रोड शो के दौरान कहा था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आदिवासियों को दारु पिला-पिलाकर मार डाला, आदिवासी बहनों को विधवा बना दिया. ऐसे में हेमंत सोरेन की अगर झारखंड में सरकार बनती है तो वह शराबबंदी लागू कर एक मिशाल पेश कर सकते हैं. हेमंत सोरेन को पता है कि उनका यह दांव उनकी भविष्य की राजनीति को और चमका देगी.

झारखंड में 6.5% लोग पीते हैं शराब

भारत सरकार के सामाजिक न्याय एंक अधिकारिता मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में करीब 6.5 फीसदी लोग शराब पीते हैं. राज्य की आबादी के हिसाब से देखें तो झारखंड में करीब 22 लाख लोग शराब का सेवन करते हैं. शराब की खपत में झारखंड देश में 25वें स्थान पर है. मंत्रालय की रिपोर्ट को मानें तो देश भर में 16 करोड़ लोग शराब पीते हैं. जिसमें 30 फीसदी तक देसी शराब की खपत होती है. सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ में 35.6 फीसदी लोग शराब पीते हैं.

गौरतलब है कि हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. साल 2013 में हेमंत सोरेन आरजेडी, कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों की मदद से झारखंड के 5वें मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हुए थे और दिसंबर 2014 तक वो पद पर रहे थे. इससे पहले वो अर्जुन मुंडा मंत्रिमंडल में उप-मुख्यमंत्री थे.

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