दहेज को 'ना' और सादगी को 'हां...' बैलगाड़ी पर सवार हो बारात लेकर पहुंचा दूल्हा

बोकारो जिले में एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी हुई है. दूल्हा न तो लग्जरी कार से बारात लेकर पहुंचा और न ही दहेज लिया. वह बैलगाड़ी पर बारात लेकर पहुंचा और दुल्हन की विदाई भी उसी बैलगाड़ी से हुई. पूरी शादी पारंपरिक कुड़माली रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई.

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बैलगाड़ी पर हुई दुल्हन की विदाई. (Photo: Satyajit/ITG) बैलगाड़ी पर हुई दुल्हन की विदाई. (Photo: Satyajit/ITG)

सत्यजीत कुमार

  • बोकारो ,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:45 PM IST

झारखंड के बोकारो जिले में हुई एक शादी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. आधुनिक दौर में जहां शादियों में महंगी गाड़ियां, दहेज और दिखावे का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं इस शादी ने समाज को एक अलग संदेश दिया. यहां दूल्हा न लग्जरी कार से बारात लेकर पहुंचा और न ही दहेज लिया. वह बैलगाड़ी पर सवार होकर दुल्हन को ब्याहने पहुंचा. बोकारो जिले के कसमार प्रखंड में तेलियाडीह टांगटोना निवासी जनार्दन कुमार महतो ने मुंगो बगदा की रहने वाली श्वेता कुमारी से बिना दहेज विवाह किया. इस शादी ने सादगी और सामाजिक संदेश के कारण लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

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सबसे खास बात यह रही कि दूल्हा बैलगाड़ी पर बारात लेकर पहुंचा. शादी की सभी रस्में पूरी होने के बाद दुल्हन की विदाई भी उसी बैलगाड़ी से की गई. इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. इस शादी में आधुनिक डीजे की जगह पारंपरिक कुड़माली लोकधुनों की मधुर गूंज सुनाई दी. बारात में घोड़ा नाच भी हुआ और बाराती पैदल ही गांव तक पहुंचे. पूरे समारोह में स्थानीय संस्कृति और परंपरा की झलक साफ दिखाई दी.

बैलगाड़ी पर बारात लेकर पहुंचा दूल्हा

शादी की सभी रस्में पारंपरिक कुड़माली नेगाचार के अनुसार संपन्न कराई गईं. यही वजह रही कि यह शादी सिर्फ एक पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने का भी उदाहरण बन गई. इस अनूठी पहल को सफल बनाने में गांव के कई लोगों ने योगदान दिया. मंजूरा निवासी मिथिलेश महतो ने बैलगाड़ी का रंग-रोगन किया. वहीं, डुमरकुदर निवासी भुवनेश्वर महतो और उनके सहयोगियों ने बैलगाड़ी को पारंपरिक शैली में सजाया. उनकी मेहनत से बैलगाड़ी आकर्षण का केंद्र बन गई.

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सादगी, संस्कार और परंपरा ने जीता लोगों का दिल

यह शादी केवल दो परिवारों का मिलन नहीं थी, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक संदेश भी थी. इस विवाह ने यह दिखाया कि शादी की खूबसूरती दिखावे, महंगी गाड़ियों या दहेज में नहीं, बल्कि संस्कारों, परंपराओं और आपसी सम्मान में होती है. बोकारो की यह अनोखी शादी अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. यह आयोजन बताता है कि रिश्ते दहेज से नहीं, बल्कि विश्वास, संस्कार और सादगी से मजबूत बनते हैं.

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