PoK में पाकिस्तान के खिलाफ हल्ला बोल... मुजफ्फराबाद मार्च से सहमी शहबाज सरकार, बंदूकों के दम पर विद्रोह कुचल रहे मुनीर

पीओके में हजारों प्रदर्शनकारी शहबाज सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. JAAC की अगुवाई में चल रहे इस आंदोलन में 38 सूत्री मांग-पत्र दिया गया है, जिसमें अधिकारों और दमन खत्म करने की मांग है. ऐसे में इस प्रदर्शन के खिलाफ मुनीर क्या एक्शन लेंगे इस पर दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं.

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JAAC लंबे समय से बिजली दरों, महंगाई, रोजगार और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रही है (File Photo: ITG) JAAC लंबे समय से बिजली दरों, महंगाई, रोजगार और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रही है (File Photo: ITG)

अरविंद ओझा / सुबोध कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 15 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:38 AM IST

पाकिस्तान के शहबाज शरीफ सरकार के लिए बुधवार का दिन बेहद अहम होने जा रहा है. क्योंकि, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में आज मुजफ्फराबाद में बड़ा जन मार्च हो रहा है, जिसे लेकर पूरे इलाके में तनाव चरम पर है. यह मार्च ऐसे वक्त हो रहा है जब सिर्फ एक दिन पहले पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से गोलियां चला दी थीं. अब देखना ये होगा कि पाक के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर इस मार्च को रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं. 

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इस खूनी कार्रवाई में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए थे. साफ है कि पाकिस्तान हर हाल में आज के इस मार्च को रोकना चाहता था, लेकिन लोग तैयार होकर सड़कों पर उतर चुके हैं.

कल रावलकोट बस स्टैंड पर हजारों प्रदर्शनकारी जमा हुए थे. शुरुआत में सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे, और जब हालात काबू से बाहर होते दिखे तो सीधे लाइव फायरिंग शुरू कर दी. आंसू गैस के गुबार में महिलाएं और बच्चे जान बचाकर भागते नजर आए. घायलों को उठाकर साथी लोग जैसे-तैसे सुरक्षित जगहों तक पहुंचाते दिखे. सुधानोटी इलाके में भी सुरक्षा बलों ने इसी तरह की बर्बर कार्रवाई दोहराई.

लोकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी बलों ने यह कार्रवाई कोई इत्तेफाक से नहीं की. रावलकोट, मुजफ्फराबाद, बाग, कोटली, मीरपुर, हट्टियां बाला और सुधानोटी समेत कई जिलों में एक साथ, सुनियोजित तरीके से दमन का अभियान चलाया गया, ताकि कोई भी मुजफ्फराबाद की तरफ न बढ़ पाए. 

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इतना ही नहीं, इलाके में खाने-पीने की चीजों और दवाओं की सप्लाई भी रोक दी गई है. इंटरनेट बंद कर दिया गया है, सड़कों को ब्लॉक कर दिया गया है और कर्फ्यू थोप दिया गया है, ताकि लोगों की आवाज कहीं बाहर न पहुंच सके.

यह आंदोलन चला रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को पाकिस्तान ने आतंकवाद का ठप्पा लगाकर बैन कर दिया है. संगठन के प्रमुख शौकत नवाज मीर समेत 600 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है. बातचीत की मेज की बजाय पाकिस्तान का जवाब सिर्फ बंदूक और बैरक ही रहा है.

यह आंदोलन कभी महंगाई, बिजली-गेहूं की बढ़ती कीमतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से शुरू हुआ था, लेकिन अब यह पूरी तरह पाकिस्तानी कब्जे के खिलाफ खुले विद्रोह में बदल चुका है.

रावलकोट में यह आंदोलन पिछले 40 दिनों से लगातार चल रहा है, और अब यह सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं बल्कि पाकिस्तान की मौजूदगी पर ही सवाल उठाने लगा है. JAAC ने 38 सूत्री मांग-पत्र सौंपा है, जिसमें सस्ती बिजली-गेहूं, रोजगार, बेहतर शासन-व्यवस्था और दमनकारी नीतियों के अंत की मांग शामिल है.

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रावलकोट के ईदगाह मैदान में उमड़ी विशाल भीड़ के सामने JAAC नेता सरदार अमान खान ने खुलकर ऐलान किया, 'PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है.' इतना ही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान के आधिकारिक नैरेटिव को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि PoK न तो आजाद है और न ही विवादित इलाका, बल्कि यह एक कब्जे वाला इलाका है. 

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह जमीन कोई विवादित क्षेत्र नहीं बल्कि इस पर जबरन कब्जा किया गया है. उनके इस बयान पर सभा में मौजूद हजारों लोगों ने जोरदार तालियों और नारों से समर्थन जताया. 

अमान खान का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे तौर पर पाकिस्तान के उस पुराने दावे को चुनौती देता है, जिसमें PoJK को 'आजाद कश्मीर' बताया जाता रहा है. हालांकि, इस बयान पर पाकिस्तान सरकार की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

उन्होंने इस्लामाबाद पर दशकों तक आर्थिक शोषण, भेदभाव और अधिकारों की खुली लूट का आरोप लगाया. भीड़ से 'पाकिस्तान से आजादी' और 'पाकिस्तान सेना बाहर जाओ' के नारे गूंजते रहे. साफ है कि PoK के लोग अब पाकिस्तानी कब्जे से पूरी तरह मुक्ति चाहते हैं और अमान खान के बयान ने इस मांग को और धार दे दी है.

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आज का यह मार्च इसी 38 सूत्री चार्टर को लेकर निर्णायक प्रदर्शन माना जा रहा है. पाक प्रशासन पहले से ही घबराया हुआ है और मुजफ्फराबाद में भारी सुरक्षा बल, रोडब्लॉक और अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी गई है. लेकिन मंगलवार की गोलियों, गिरफ्तारियों और 40 दिनों की सख्ती के बावजूद लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

पाकिस्तान जो दुनिया के सामने खुद को 'कश्मीर मुद्दे' का हमदर्द बताता है, वही अपने कब्जे वाले इलाके में निहत्थे नागरिकों, महिलाओं और बच्चों पर गोलियां बरसा रहा है. खाने-दवाओं की नाकाबंदी, इंटरनेट ब्लैकआउट और हत्याएं, यही है पाकिस्तान की असली सूरत. 

अमान खान के बयान ने अब इस आंदोलन को सिर्फ रोजमर्रा की समस्याओं से आगे बढ़ाकर पहचान और अधिकार की लड़ाई बना दिया है. PoK में जितना दमन बढ़ेगा, विद्रोह की आग उतनी ही तेज होती जाएगी.
 

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