पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मंगलवार को हालात तनावपूर्ण हो गए. मुजफ्फराबाद तक प्रस्तावित बड़े जन मार्च से पहले पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की. पाकिस्तानी रेंजर्स की फायरिंग में कम से कम आठ प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई. कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं.
लोकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, रावलकोट बस स्टैंड पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हुए थे. इनमें महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी थी. प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पहले आंसू गैस के गोले छोड़े गए. इसके बाद हालात बिगड़ने पर सुरक्षा बलों ने लाइव राउंड फायर किए. इस दौरान सुधानोटी इलाके में भी फायरिंग हुई.
बताया गया कि वहां भी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया. इससे संकेत मिलता है कि कार्रवाई केवल एक स्थान तक सीमित नहीं थी, बल्कि PoK के कई हिस्सों में एक साथ अभियान चलाया गया. पाकिस्तानी अधिकारी प्रदर्शनकारियों को मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पहले से ही सक्रिय थे.
रावलकोट से सामने आए विजुअल्स में देखा गया कि रेंजर्स ने भीड़ पर आंसू गैस के गोले छोड़े. इसके बावजूद जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे तो फायरिंग की गई. आंसू गैस के घने बादलों के बीच महिलाओं समेत बड़ी संख्या में लोग अपनी जान बचाते नजर आए. कई प्रदर्शनकारी घायलों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाते दिखाई दिए.
कई जिलों में फैल चुका है आंदोलन
यह हिंसा उस सरकार विरोधी आंदोलन का नया चरण मानी जा रही है, जो पिछले कई हफ्तों से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लगातार तेज हो रहा है. हजारों लोग रावलकोट, मुजफ्फराबाद, बाग, कोटली, मीरपुर, हट्टियन बाला और अन्य जिलों में प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं. कई हफ्तों से लाइन ऑफ कंट्रोल के पास धरना दे रहे हैं.
मुजफ्फराबाद तक 'जन मार्च' की तैयारी
प्रदर्शनकारी आंदोलन के आयोजकों ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद तक बड़े जन मार्च का ऐलान किया है. उनका कहना है कि यह मार्च 38 सूत्रीय मांगों के चार्टर को लेकर निर्णायक प्रदर्शन होगा. इन मांगों में सब्सिडी वाली बिजली, सस्ता गेहूं, रोजगार के अवसर, बेहतर गवर्नेंस, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक दमन समाप्त करना शामिल है.
महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन आक्रामक
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन शुरुआत में बिजली की बढ़ती दरों, गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी और आवश्यक वस्तुओं की कमी के खिलाफ था. हालांकि, समय के साथ यह आंदोलन व्यापक राजनीतिक अभियान में बदल गया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि दशकों से PoK के लोगों के साथ भेदभाव किया जा रहा है.
'PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है' का नारा
इस्लामाबाद ने राजनीतिक भेदभाव के साथ आर्थिक शोषण किया और बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा. इस महीने की शुरुआत में रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में आंदोलन की सबसे बड़ी रैलियों में से एक आयोजित हुई थी. इस दौरान JAAC के नेता सरदार अमन खान ने खुले मंच से कहा था कि "PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है."
आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश
उन्होंने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद लंबे समय से इस क्षेत्र का शोषण कर रहा है और लोगों को उनके अधिकार नहीं दे रहा. उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी अधिकारी खाद्य आपूर्ति रोककर और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही बाधित कर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. इससे राजनीतिक टकराव हो सकता है.
पाकिस्तान सरकार पर दमन के आरोप
आरोप है कि बातचीत शुरू करने के बजाय PAK सरकार ने दमनात्मक कदम तेज कर दिए हैं. JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाया गया है. आंदोलन के नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं. कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं. मुजफ्फराबाद पहुंचने से रोकने के लिए रोडब्लॉक लगाए गए हैं.
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