हिमाचल के कुल्लू में बादल फटने से तबाही! बाढ़ में पुलिया बही, अलर्ट जारी

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में बादल फटने से गारसा खड्ड में अचानक बाढ़ आ गई और पुलिया बह गईं. प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है, जबकि राज्य में 13 जुलाई तक बारिश की संभावना है.

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हिमाचल के कुल्लू में बादल फटने से पानी-पानी (Photo: ITG) हिमाचल के कुल्लू में बादल फटने से पानी-पानी (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:23 AM IST

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच कुल्लू जिले से बादल फटने का मामला सामने आया है. गारसा शिलनाला इलाके में हुए क्लाउडबर्स्ट के बाद गारसा खड्ड में अचानक जलस्तर बढ़ गया, जिससे एक-दो पुलिया बह गईं. हालांकि, किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन ने नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.

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अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में गारसा शिलनाला की ऊंची पहाड़ियों में बादल फटने की घटना हुई. अचानक बादल फटने से गारसा खड्ड में पानी का स्तर तेजी से बढ़ गया. सूत्रों के मुताबिक, बादल फटने से आई अचानक बाढ़ में खड्ड (नाले) पर बने एक या दो पुल/पुलिया बह गए.

सूत्रों ने बताया कि खड्ड के किनारे रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई है और अधिकारियों ने निवासियों से सतर्क रहने को कहा है. मंगलवार को हिमाचल के ज़्यादातर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होती रही और यहां के मौसम केंद्र ने राज्य में 13 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान लगाया है.

कई जिलों में बारिश से अलर्ट...

मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे ट्रैफिक से जुड़ी सलाहों का पालन करें, जोखिम वाली जगहों पर जाने से बचें और अचानक बाढ़ की आशंका वाले जल स्रोतों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें.

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कांगड़ा जिले के गुलेर में सोमवार शाम से 45.6 मिमी बारिश हुई, इसके बाद सराहन (34.5 मिमी), सुंदरनगर (31.2 मिमी), नादौन (22.8 मिमी), सुजानपुर टीरा (21.4 मिमी), नाहन (18.9 मिमी), काहू (18.2 मिमी), भाबानगर (17.2 मिमी) और शिमला (13 मिमी) में बारिश दर्ज की गई.

मौसम विभाग के मुताबिक, शिमला, जुब्बरहट्टी, भुंतर, मुरारी देवी और सुंदरनगर में आंधी-तूफ़ान के साथ बारिश हुई.

PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मंगलवार को बताया कि भारी बारिश और उससे जुड़े खतरों से निपटने के लिए, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने राज्य भर में 11,137 बेलदार और 4,228 मल्टी-टास्क वर्कर तैनात किए हैं, जिससे जहां भी सड़क संपर्क बाधित हुआ हो, उसे बहाल किया जा सके.

इसके अलावा, चौबीसों घंटे सड़क ठीक करने के काम के लिए PWD और प्राइवेट कंपनियों की 1,156 भारी मशीनें जैसे- अर्थमूवर, बुलडोजर, रोबोटिक उपकरण और टिपर तैनात की गई हैं. इमरजेंसी वाली स्थिति में इस्तेमाल के लिए छह बेली ब्रिज भी बनाए गए हैं. मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त प्राइवेट मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाई जाए.

यह भी पढ़ें: Himachal Rain: 9 लोगों की मौत, 49 सड़कें बंद... हिमाचल में मॉनसून की बारिश-भूस्खलन से आफत

अलर्ट मोड में प्राशसन!

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विक्रमादित्य सिंह ने निर्देश दिया है कि अस्पताल, पुलिस स्टेशन, शिक्षण संस्थान, फायर स्टेशन, पंपिंग यूनिट और बिजली संयंत्र जैसी जरूरी सुविधाओं तक सड़क संपर्क बिना किसी रुकावट के बना रहे. इसके साथ ही, कमजोर सड़कों, पुलों और भूस्खलन की आशंका वाली जगहों की पहचान की जाए और मॉनसून के दौरान उन पर कड़ी नजर रखी जाए.

अधिकारियों ने बताया कि 1 से 7 जुलाई के बीच हिमाचल में 43.4 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले 54.7 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 26 फीसदी ज्यादा है. किन्नौर जिले में सामान्य से 161 फीसदी ज्यादा बारिश हुई, जबकि लाहौल-स्पीति में 40 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई.

लाहौल-स्पीति का कुकुमसेरी रात में सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान 10.2 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जबकि हमीरपुर जिले का नेरी सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

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