18 माह की ब्रेन डेड बच्ची ने किए अंगदान, दूसरों की जिंदगी रौशन करेंगी माहिरा की आंखें भी

18 महीने के मास्टर के बाद, माहिरा अपने अंगों को दान करने वाली दिल्ली/एनसीआर में दूसरी सबसे छोटी बच्ची है. माहिरा के परिवार में 7 वर्ष का उसका भाई और 6 साल की एक बहन है. दान किया हुआ लीवर ILBS दिल्ली में 6 साल के बच्चे को ट्रांसप्लांट किया गया, दोनों किडनी 17 साल के शख्स को एम्स में ट्रांसप्लांट की गईं.

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अपने पिता के साथ बच्ची माहिरा अपने पिता के साथ बच्ची माहिरा

स्नेहा मोरदानी

  • नई दिल्ली,
  • 13 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 9:25 AM IST

हरियाणा के मेवात में 18 माह की बच्ची ने अन्य बच्चों की जान बचाने के लिए अपने अंग (जिगर, किडनी, कॉर्निया, हार्ट वॉल्व) दान किए हैं. साथ ही बच्ची की आंखे भी दूसरों के जीवन को रौशन करेंगी. 18 महीने की बच्ची माहिरा 6 नवंबर 2022 को अपने घर की बालकनी से गिर गई थी. सिर में गंभीर चोट के कारण अचेत अवस्था में उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया और 11 नवंबर की सुबह उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया. बच्ची के 26 वर्षीय पिता और 24 साल की मां नूह में रहते हैं.

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लिवर और किडनी का हुआ सफल ट्रांसप्लांट
 
18 महीने के मास्टर के बाद, माहिरा अपने अंगों को दान करने वाली दिल्ली/एनसीआर में दूसरी सबसे छोटी बच्ची है. माहिरा के परिवार में 7 वर्ष का उसका भाई और 6 साल की एक बहन है. दान किया हुआ लीवर ILBS दिल्ली में 6 साल के बच्चे को ट्रांसप्लांट किया गया, दोनों किडनी 17 साल के शख्स को एम्स में ट्रांसप्लांट की गईं. इसके अलावा माहिरा का कॉर्निया, दोनों आंखें और हार्ट वॉल्व बाद में उपयोग के लिए संरक्षित किया गया है.

माहिरा के पिता को समझाया गया रोली का केस
 
माहिरा पिछले 6 महीनों में एम्स ट्रॉमा सेंटर में अंगदान करने वाली तीसरी बच्ची है. पहली बच्ची रोली थी और उसके बाद 18 महीने का रिशांत था जिसने अपने अंग दान किए थे. माहिरा के पिता को रोली का केस दिखाया गया और उन्हें ब्रेन डेथ के महत्व और अवधारणा को समझाकर दूसरों के जीवन को बचाने के लिए अंग दान के बारे में बताया गया.

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बालकनियों को लेकर सावधान रहे माता- पिता

भारत में बहुत अधिक संख्या में बच्चे ऊंचाई से गिरकर जान गंवा देते हैं. हमारे बच्चों में देखा गया ये अनोखा पैटर्न है. माता-पिता को सलाह दी जाती है कि बालकनी की ऊंचाई परिवार में बच्चों की ऊंचाई से दोगुनी रखी जाए. बच्चे अक्सर बालकनी में घर की रेलिंग पर बिना सुरक्षा के चढ़ जाते हैं और गिर जाते हैं. ऐसे कई बच्चे मर जाते हैं या सिर में गंभीर चोट लग जाती है. ऐसी मौतों और चोटों को पूरी तरह से रोका जा सकता है.

अंगदान के बारे में ज्ञान का अभाव
 
ग्रामीण पृष्ठभूमि में अंगदान के बारे में जागरूकता का अभी भी बहुत अभाव है. इसे सिरे से नकारने वाले अधिकांश लोग दादा-दादी/बुजुर्ग वर्ग से आते हैं जिन्होंने अपने जीवन में कभी अंग दान के बारे में नहीं सुना है.
 
दुनिया में सबसे कम अंगदान दर भारत में

हमारे देश में कानून पर ध्यान देने की जरूरत है और इसे ऑप्ट आउट कानून में बदलने की जरूरत है (जिसमें हर कोई जो दुर्घटना का शिकार होता है उसे अंग दाता माना जाता है) ऑप्ट इन लॉ के खिलाफ (वर्तमान में मौजूदा कानून जहां परिवार की सहमति की आवश्यकता है, अधिकांश परिवार मना कर देते हैं). लोग अंतिम चरण की बीमारियों से पीड़ित लोगों के जीवन को बचाने के लिए अंगों की तत्काल आवश्यकता को समझना नहीं चाहते. भारत में प्रति मिलियन अंगदान दर 0.4 (दुनिया में सबसे कम) है. संयुक्त राज्य अमेरिका और स्पेन में वर्तमान में 50 प्रति मिलियन जनसंख्या अंग दान दर है. भारत में औसतन 700 अंगदान ब्रेन डेथ के बाद होते हैं. 

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