आज के आधुनिक युग में भी ढेरों लोग अंधविश्वास में डूबे हैं. गुजरात की कच्छ पुलिस ने ऐसे ही लोगों का फायदा उठाते हुए तांत्रिक अनुष्ठानों के नाम पर ठगी वाले एक शातिर गिरोह को पकड़ा है. इस गिरोह का सरगना महिला का वेश बनाकर लोगों के घरों में घुसता था और बाधाओं को दूर करने के बहाने उनसे लाखों रुपये वसूलता था.
पुलिस ने तीन आदतन आरोपियों को सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया है, जो व्यापार और कारोबार में आशीर्वाद दिलाने, घर की बाधाओं और वास्तु दोष को दूर करने और जीवन के सभी दुखों और परेशानियों से स्थायी मुक्ति दिलाने के बहाने भोले-भाले लोगों से लाखों रुपये लूट रहे थे. तांत्रिक अनुष्ठानों के नाम पर लोगों को ठगने वाले इस गिरोह का तरीका बेहद चौंकाने वाला था.
पुलिस की टीम इलाके में गश्त कर रही थी, तभी पुलिस को एक महत्वपूर्ण सूचना मिली कि तीन लोग संदिग्ध मारुति ऑल्टो कार में घूम रहे हैं. इस सूचना के आधार पर पुलिस ने वाहन को रोका और गहन जांच के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.
पुलिस जांच में पता चला कि ये आरोपी विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जाकर भोले-भाले लोगों से संपर्क करते थे. उनमें से एक महिला का वेश धारण करके यह झूठा दावा करता था कि उसके पास कोई दैवीय या विशेष तांत्रिक शक्तियां हैं. इसके बाद वह पारिवारिक व्यवसाय में सफलता न मिलने, घर में परेशानी या किसी तरह के अंधविश्वास के बहाने उनका विश्वास जीत लेता था. ग्राहकों को डराकर आरोपी उनसे विशेष पूजा और जटिल तांत्रिक अनुष्ठान करने का बहाना बनाकर बड़ी मात्रा में नकदी और सोना-चांदी जैसी कीमती वस्तुएं ऐंठ लेते थे.
कार्रवाई के दूसरे चरण में, पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल की गई मारुति ऑल्टो कार, मोबाइल फोन, नकदी, पूजा के लिए श्रीफल और शुद्ध घी सहित सभी सामान जब्त कर लिया है. पुलिस की कड़ी पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से अरविंदनाथ परमार इस पूरे घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बनकर उभरा है. अरविंदनाथ का लंबा आपराधिक इतिहास है और राजकोट, गोंडल, मोरबी, पडधरी और गांधीनगर समेत विभिन्न जिलों के पुलिस थानों में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले पहले ही दर्ज हैं.
फिलहाल, पुलिस ने अदालत से अरविंदनाथ परमार, बलवंत वादी और परबत राठौड़ की कानूनी रिमांड प्राप्त कर ली है. पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि गुजरात में कितने भोले-भाले लोगों को इस अंधविश्वासी गिरोह ने अब तक लाखों रुपये का चूना लगाया है और क्या इस घोटाले में कोई अन्य स्थानीय लोग भी शामिल हैं.
ब्रिजेश दोशी