गुजरात की चार राज्यसभा सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी के चारों उम्मीदवारों ने सोमवार को नामांकन दाखिल कर दिया. विपक्ष की ओर से किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया, जिसके बाद भाजपा उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत लगभग तय मानी जा रही है. अब सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है. लेकिन नामांकन के साथ ही गुजरात की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए दावा किया कि गुजरात राज्य की स्थापना के बाद पहली बार ऐसा होगा, जब राज्यसभा में गुजरात से कांग्रेस का एक भी सांसद नहीं होगा. उन्होंने इसे 'कांग्रेस मुक्त गुजरात' की दिशा में एक बड़ा कदम बताया. वहीं कांग्रेस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि भाजपा अहंकार में है.
मनीष दोशी ने कहा कि कांग्रेस के पास आवश्यक संख्याबल नहीं था, इसलिए पार्टी ने उम्मीदवार नहीं उतारा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस जोड़-तोड़ की राजनीति में विश्वास नहीं करती. गुजरात कभी कांग्रेस मुक्त नहीं होगा. गुजरात विधानसभा में कुल 181 विधायक हैं. भाजपा के पास भारी बहुमत है, जबकि कांग्रेस के पास 12 विधायक बचे हैं. एक सीट के लिए 37 विधायकों का समर्थन जरूरी है.
क्यों गुजरात से राज्यसभा में कांग्रेस का सांसद नहीं होगा?
ऐसे में मौजूदा संख्या बल के आधार पर कांग्रेस एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है. साल 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने इतिहास का सबसे खराब प्रदर्शन किया था और सिर्फ 17 सीटें जीत पाई थी. इसके बाद लगातार विधायकों की संख्या घटती गई और साल 2026 तक 12 विधायकों पर सिमट गई. गुजरात में इससे पहले कांग्रेस की स्थिति कभी इतनी कमजोर नहीं रही.
कांग्रेस को राज्यसभा में हमेशा एक या दो सीटें मिलती थीं. लेकिन इस बार हालात बदल गए हैं. विधानसभा में कमजोर स्थिति के कारण अब राज्यसभा में कांग्रेस का एक भी सांसद नहीं रहेगा. मौजूदा स्थिति साल 2029 तक बनी रह सकती है.यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस 40 से अधिक सीटें जीतने में नाकाम रहती है, तो 2032 तक भी राज्यसभा में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा.
कौन हैं भाजपा के उम्मीदवार जो अब निर्विरोध सांसद बनेंगे?
ऐसे में कांग्रेस के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है. इस बार भाजपा ने राज्यसभा के लिए बड़े चेहरों की जगह जमीनी कार्यकर्ताओं पर दांव लगाया है. सौराष्ट्र से जितेंद्र कणजारिया और मानसिंह परमार, मध्य गुजरात से मुकेश राठवा और उत्तर गुजरात से राजूभाई शुक्ल को उम्मीदवार बनाया है. चारों नेताओं ने भाजपा नेतृत्व की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया.
सौराष्ट्र से जितेंद्र कणजारिया पूर्व विधायक मेघजीभाई कणजारिया के बेटे हैं. 39 वर्षीय जितेंद्र सथवारा समाज से आते हैं, जो ओबीसी है. उन्होंने बीकॉम और एमसीए की पढ़ाई की है. वो लंबे समय से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं और जिला पंचायत में चेयरमैन की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. पिछली बार वे रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीतकर आए थे, लेकिन इस बार विधानसभा टिकट नहीं दिया गया.
केमिकल इंजीनियरिंग रह चुके हैं सौराष्ट्र के मानसिंह परमार
उनको सीधे राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया. सौराष्ट्र से ही दूसरे उम्मीदवार मानसिंह परमार हैं. 45 वर्षीय परमार वर्तमान में भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. पार्टी के युवा चेहरों में गिने जाते हैं. गिर सोमनाथ जिले से आने वाले परमार ने केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एबीवीपी से की थी. वो साल 2020 में गिर सोमनाथ से जिला अध्यक्ष बने.
साल 2022 का विधानसभा चुनाव उन्होंने लड़ा, लेकिन एक हजार से भी कम मतों के अंतर से हार गए थे. वे युवा मोर्चा में भी सक्रिय रहे हैं. साल 2015 से 2020 तक गिर सोमनाथ जिला पंचायत के सदस्य रह चुके हैं. जिला अध्यक्ष बनने से पहले वे जिला महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. उत्तर गुजरात से भाजपा ने अपने ब्राह्मण चेहरे राजूभाई शुक्ल को उम्मीदवार बनाया है.
लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे राजूभाई
62 वर्षीय राजूभाई ने एमकॉम और एलएलबी की पढ़ाई की है. वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं. संगठन के जमीनी कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे हैं. वर्तमान में वे भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य हैं और सुरेंद्रनगर जिले के प्रभारी भी हैं. इससे पहले वे कड़ी नगर पालिका के प्रमुख और मेहसाणा भाजपा के जिला महामंत्री रह चुके हैं. उन्होंने संगठन के लिए लंबा काम किया है.
मध्य गुजरात से भाजपा ने आदिवासी समुदाय के युवा नेता मुकेश राठवा को उम्मीदवार बनाया है. 39 वर्षीय राठवा जिला भाजपा महामंत्री हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं. उन्होंने एमए और एमएड की पढ़ाई की है. शुरुआत से ही वे भाजपा युवा मोर्चा में सक्रिय रहे और प्रदेश युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं. पार्टी के भीतर उन्हें आदिवासी समाज के उभरते युवा चेहरे के तौर पर देखा जाता है.
माना जा रहा है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मध्य गुजरात की आदिवासी बेल्ट में संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में छोटा उदयपुर और नर्मदा जिले में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी. ऐसे में मुकेश राठवा का चयन उस क्षेत्र में पार्टी की राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
ब्रिजेश दोशी