उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को 'आरएसएस @100: ए सेंचुरी ऑफ सर्विस, यूनिटी एंड सैक्रिफाइस' पुस्तक का विमोचन किया. इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हमें इस बात की परवाह किए बिना आगे बढ़ते रहना चाहिए कि अमेरिका क्या कह रहा है, ईरान क्या कह रहा है या फिर रूस क्या कह रहा है. इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता. यही एकमात्र तरीका है, जिससे हम विश्व के शिखर पर पहुंच सकते हैं. दूसरों के हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं है.'
उन्होंने श्याम जाजू और अनुपम त्रिवेदी की इस पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कहा कि पिछले एक सदी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण के जरिए पीढ़ियों को प्रेरित करने का काम किया है. संघ ने सेवा, एकता और राष्ट्रीय चेतना के मूल्यों को मजबूत किया है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस अवसर पर शामिल होना उनके लिए सम्मान की बात है.
तमिल में लिखी कविता का किया जिक्र
सीपी राधाकृष्णन ने तमिल में संघ पर लिखी एक कविता का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें संगठन की तुलना गंगा से की गई है, जो लोगों के कल्याण के लिए लगातार बहती रहती है और सेवा के भाव का प्रतीक है.
उन्होंने पुस्तक के बारे में बात करते हुए कहा कि इसका शीर्षक संघ की मूल भावना को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि संघ दैनिक शाखाओं के जरिए चरित्र निर्माण और नेतृत्व विकास को बढ़ावा देता है. इसके अलावा उन्होंने पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उल्लेख का भी जिक्र किया.
उन्होंने पुस्तक के 'एक स्वयंसेवक प्रधानमंत्री: मोदी युग' अध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयंसेवक से प्रधानमंत्री तक की यात्रा में 'देश प्रथम' और 'सेवा' को शासन के केंद्र में रखा है. यह संघ की निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की विचारधारा को दिखाता है.
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