दिल्लीवालों पर महंगाई की चौतरफा मार, मेट्रो किराया बढ़ने से मुश्किल बढ़ी

आजतक की टीम ने मेट्रो किराए में बढ़ोतरी को लेकर मुसाफिरों से बात की, तो उनका दर्द सामने आया. सरकारी नौकरी करने वाले सुमित केंद्रीय सचिवालय तक आने जाने में पहले 50 रुपये रोज़ाना खर्च करते थे, लेकिन अब उन्हें हर रोज़ 68 रुपये मेट्रो के किराए के तौर पर चुकाने पड़ते हैं.

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मेट्रो किराया में बढ़ोत्तरी का मुसाफिरों की जेब पर असर मेट्रो किराया में बढ़ोत्तरी का मुसाफिरों की जेब पर असर

कपिल शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 7:18 PM IST

दिल्ली वाले महंगाई की चौतरफा मार झेल रहे हैं. सब्जियों के दाम आसमान पर हैं, जिसके चलते आम आदमी की थाली में सब्जियां कम होती जा रही हैं. पिछले महीने मेट्रो के किराए में हुई बढोतरी का असर भी अब लोगों की जेब पर नज़र आने लगा है. महंगी सब्जियों के बाद लोगों को सालने लगा है. मेट्रो के बढ़े किराए ने दिल्ली वालों के महीने के बजट को बिगाड़ दिया है. रोज़मर्रा की चीज़ों के महंगे होने की वजह से अब मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी लोगों को अखरने लगी है.

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आजतक की टीम ने को लेकर मुसाफिरों से बात की, तो उनका दर्द सामने आया. सरकारी नौकरी करने वाले सुमित केंद्रीय सचिवालय तक आने जाने में पहले 50 रुपये रोज़ाना खर्च करते थे, लेकिन अब उन्हें हर रोज़ 68 रुपये मेट्रो के किराए के तौर पर चुकाने पड़ते हैं. सुमित का कहना है कि पहले ही मंहगाई इतनी हो गई है और अब सब्जी के दाम भी बढ़ गए हैं. इसी वक्त मेट्रो का किराया भी बढ़ गया है. एक-दो रोज़ में तो पता नहीं चलता, लेकिन महीने का हिसाब लगाएं, तो मेट्रो किराए के लिए अब अच्छा खासा बजट बढ़ गया है.

छात्रा प्रिया का कहना है कि अब मेट्रो का किराया अफोर्डेबल नहीं रहा. खासततौर पर अगर कॉलेज स्टूडेंट की बात करें, तो उनकेलिए मुश्किल हो गया है. प्रिया के मुताबिक महंगाई के दौर में पब्लिक ट्रांसपोर्स आम लोगों के हिसाब से होने चाहिए. साथ ही स्टूडेंट्स को रियायत भी दी जानी चाहिए. प्रिया की तरह मनीषा भी मेट्रो किराए बढ़ोतरी से परेशान है. मनीषा के मुताबिक अब एक महीना बाद पता चला है कि मेट्रो के बढ़े हुए किराए की वजह से कितना जेब खर्च बढ़ गया है.

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मेट्रो ने पिछले महीने ही किराए में बीस से पचास फीसदी तक बढ़ोत्तरी की थी. पहले मेट्रो का न्यूनतम कर दिया गया है और अधिकतम किराया लगभग दो गुना हो गया है, क्योंकि पहले के तीस रुपये के मुकाबले अब लोगों को पचास रुपये तक चुकाने पड़े रहे हैं. साथ ही मेट्रो के अक्टूबर में फिर से किराये की समीक्षा करने की अटकलों ने मुसाफिरों को आशंकित किया हुआ है.

 

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