साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है.
सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज परवीन सिंह ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में पांच आरोपियों को दोषी ठहराया है. वहीं, इस मामले में छह आरोपियों को बरी कर दिया गया है.
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ताहिर हुसैन और कई आरोपियों को दोषी ठहराने का ये फैसला एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है. इस मुकदमे के दौरान प्रॉसीक्यूशन की ओर से पेश किए गए 110 गवाहों में से अदालत ने 91 गवाहों के बयानों और सबूतों की जांच की.
किन आरोपों के तहत दोषी करार हुआ ताहिर हुसैन
कोर्ट ने इस मामले में 17 मार्च 2023 को आरोप (चार्ज) तय किए थे. अब अदालत ने ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत दोषी पाया है. हालांकि, अदालत ने ताहिर हुसैन को आपराधिक साजिश के आरोप से बरी कर दिया है.
इन सभी को धारा 302 (हत्या), 149 (दंगा भड़काना), 148 (घातक हथियार से दंगा करना), 147 (दंगे के लिए सजा), 188 (सरकारी आदेश की नाफरमानी) और 365 (अपहरण) के तहत कसूरवार ठहराया गया है.
अदालत में रोया ताहिर हुसैन
अदालत में फैसला सुनने के बाद ताहिर हुसैन रो पड़ा. खुद को बेकसूर बताते हुए ताहिर ने अदालत में कहा, 'मैं बेगुनाह हूं, मेरे साथ इंसाफ नहीं हुआ है.'
अधिकारी ने पीटीआई (PTI) को बताया कि दोषियों को क्या सजा दी जाएगी, इस पर अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अलग से अपना आदेश जारी करेगी. दूसरी ओर, कोर्ट ने सबूतों की कमी की वजह से छह अन्य आरोपियों- मुंतजिर उर्फ मूसा, शोएब आलम, हसीन, समीर, गुलफाम और फिरोज को बरी कर दिया है.
नाले से मिला था शव, 648 पन्नों की थी चार्जशीट
बता दें कि 25 फरवरी 2020 को चांद बाग इलाके में CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान आईबी के सिक्योरिटी असिस्टेंट अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी. उनका शव अगले दिन पास के एक नाले से बरामद हुआ था. इसके बाद अंकित के पिता रवींद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में FIR दर्ज की गई थी.
इस हत्याकांड की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी. क्राइम ब्रांच ने आप पार्षद ताहिर हुसैन सहित 11 आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया था. पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच दल ने 3 जून 2020 को अदालत में 648 पन्नों की मेन चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद जांच के दौरान छह सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी पेश की गईं. फिलहाल, कोर्ट के इस विस्तृत फैसले की विस्तृत कॉपी (जजमेंट) का इंतजार है.
'बिना भेदभाव वाली और सबूतों पर आधारित जांच'
दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने दिल्ली दंगों के दौरान स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस के तौर पर काम किया और जांच को लीड किया. उन्होंने केस को लेकर कहा, 'दिल्ली दंगों के दौरान, हमारी पहली जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना और एक निष्पक्ष, बिना भेदभाव वाली और सबूतों पर आधारित जांच पक्का करना था. भरोसेमंद सबूत जमा करने और जिम्मेदार लोगों को कानून के सामने लाने की पूरी कोशिश की गई.'
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गोलछा ने आगे कहा, 'कोर्ट के अपना फैसला सुनाने के साथ, मुझे खुशी है कि जांच टीम की कड़ी मेहनत और प्रोफेशनलिज्म ज्यूडिशियल जांच की कसौटी पर खरा उतरा है. हम 2020 के दंगों के दौरान किए गए अपराधों के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को कानून के सही तरीके से सजा दिलाने के लिए कमिटेड हैं.'
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