गर्भवती महिलाओं में किडनी खराबी का क्यों रहता है ज्यादा खतरा, डॉक्टरों से जानें कैसे करें बचाव

किडनी से जुड़ी सभी समस्याओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इनके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि सही उम्र में प्रेग्नेंसी की योजना बनाएं. प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित रूप से एंटीनेटल चेक-अप (प्रसव-पूर्व जांच) कराएं. स्मोकिंग, शराब और नशीली दवाओं से दूर रहें.

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प्रेगनेसी में किडनी खराबी का रिस्क प्रेगनेसी में किडनी खराबी का रिस्क

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:22 PM IST

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में कई बीमारियों का रिस्क होता है. इस दौरान किडनी में खराबी का खतरा भी हो सकता है. ऐसे में किडनी की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान किडनी पर ज्यादा दबाव पड़ता है, क्योंकि किडनी को मां और गर्भ और पल रहे बच्चे,दोनों के लिए अधिक खून फिल्टर करना होता है. हालांकि अधिकतर महिलाओं की प्रेग्नेंसी स्वस्थ रहती है, लेकिन डॉक्टर इस दौरान किडनी के फंक्शन में गड़बड़ी (रीनल डिसफ़ंक्शन) के मामलों में बढ़ोतरी देख रहे हैं. अगर समय रहते इसका पता ना चले और इलाज ना हो, तो यह महिला और बच्चे की सेहत के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है.

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प्रेग्नेंसी के दौरान किडनी पर ज्यादा प्रेशर क्यों होता है? 

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में नेफ्रोलॉजी विभाग में डायरेक्टर डॉ.वरुण वर्मा ने इस बारे में आजतक. इन से बातचीत की है. डॉ वर्मा कहते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान और बाद में किडनी संबंधित समस्याओं का रिस्क रहता है. इसके कई कारण है. कुछ महिलाएं अधिक उम्र  होने के बाद बच्चे पैदा करने का फैसला कर रही हैं. जैसे-जैसे मां की उम्र बढ़ती है, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है.

कुछ मामलों में ज्यादा वजन, हाई बीपी, डायबिटीज और किडनी की कोई पुरानी बीमारी भी रिस्क को बढ़ा सती है. लंबे समय तक रहने वाला भावनात्मक तनाव ब्लड प्रेशर बढ़ने और सेहत से जुड़ी दूसरी समस्याओं का कारण बन सकता है, जिससे किडनी के काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है. कुछ मामलों में यह भी देखा जाता है कि महिलाएं बिना डॉक्टरी देखरेख के हर्बल या वैकल्पिक दवाएं लेने लगती हैं. इससे भी किडनी को नुकसान हो सकता है. 

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यह भी पढ़ें: 5 महिलाओं की गुहार- किडनी ट्रांसप्लांट नहीं तो इच्छा मृत्यु की अनुमति दें

किन महिलाओं को अधिक खतरा है?

 हाई ब्लड प्रेशर

 पहले से मौजूद किडनी की बीमारी

 पूरे शरीर में सूजन 

 पेशाब में खून आना 

किडनी की पथरी (रीनल कैलक्युली)


किडनी की समस्याओं से कैसे बचा जा सकता है?

डॉ वरुण बताते हैं कि किडनी से जुड़ी सभी समस्याओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इनके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि सही उम्र में प्रेग्नेंसी की योजना बनाएं. प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित रूप से एंटीनेटल चेक-अप (प्रसव-पूर्व जांच) कराएं. स्मोकिंग, शराब और नशीली दवाओं से दूर रहें. डॉक्टर की सलाह के बिना अनावश्यक पेनकिलर लेने से बचें, क्योंकि इनके अधिक इस्तेमाल से किडनी को नुकसान पहुंच सकता है. यह भी जरूरी है कि प्रेग्नेंसी से पहले स्वस्थ वजन बनाए रखें. संतुलित आहार लें और डॉक्टर की सलाह के हिसाब से एक्सरसाइज करें. प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ टेस्ट भी जरूर कराएं.

यह भी पढ़ें: लिवर के लिए हेल्दी लेकिन कॉफी पीने से किडनी पर क्या पड़ता है असर? किडनी स्टोन पर डॉक्टर ने दिया जवाब

प्रेग्नेंसी के दौरान जरूरी टेस्ट

सफदरजंग अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभाग के पूर्व रेजिडेंट डॉ. दीपक कुमार सिंह बताते हैं कि अगर महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ जरूरी टेस्ट कराएं तो समय रहते किडनी खराबी का पता चल सकता है. इसके लिए यह कुछ जरूरी टेस्ट हैं. 

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किडनी फ़ंक्शन टेस्ट 

यूरिन R/M

प्रोटीन, खून, इन्फेक्शन या दूसरी असामान्यताओं का पता लगाना

यूरिन स्पॉट प्रोटीन-टू-क्रिएटिनिन रेश्यो (UPCR) 

डॉक्टर की सलाह ले पेट का अल्ट्रासाउंड

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