अब देश में खांसी की सिरप समेत अन्य सभी तरह की सिरप बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी. इस बाबत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके मुताबिक,अब मेडिकल स्टोर से कफ सिरप या कोई दूसरा सिरप खरीदने के लिए आपको डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत होगी. बीते महीनों में राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे. इसके बाद यह कदम उठाया गया है. इस बीच आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि क्या हर तरह की खांसी में बच्चों को कफ सिरप देनी चाहिए? इसकी जरूरत कब है और कब नहीं है. इस बारे में एम्स के डॉक्टर ने बताया है.
AIIMS दिल्ली में पीडियाट्रिक विभाग में डॉ. हिमांशु भदानी बताते हैं कि कई माता- पिता डॉक्टर से सलाह के बिना ही खुद से कफ सिरप खरीकर बच्चे को देना शुरू कर देते हैं, लेकिन यह ठीक नहीं है. खासतौर पर 2 साल से छोटे बच्चों को डॉक्टर की सलाह के बिना सिरप बिलकुल न दें. ऐसा इसलिए क्योंकि इन सिरप में एंटीहिस्टामाइन हो सकता है. इससे गंभीर और जानलेवा साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं. इन दवाओं के साइड इफ़ेक्ट में दौरे पड़ना, दिल की धड़कन तेज़ होना और कुछ मामलों में मौत तक हो सकती है. ऐसा अकसर तब होता है जब इनका तय मात्रा से ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है.
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वायरल इंफेक्शन की वजह से होती है खांसी
डॉ भदानी बताते हैं कि अधिकतर बच्चों में खांसी की समस्या वायरल इंफेक्शन की वजह से होती है. ये अपने आप ही कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ माता- पिता हल्की खांसी में ही सिरप दे देते हैं. बच्चे को आराम तो खुद ही होता है, लेकिन उनको लगता है कि ऐसा कफ सिरप देने से हुआ है. इस वजह से जब भी बच्चे को खांसी होती है तो माता- पिता उसको सिरप देने लगते हैं.
कब होती है कफ सिरप की जरूरत
हल्की खांसी में सिरप की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर खांसी के कारण बच्चे की नींद पूरी नहीं हो रही है, उसके सीने में दर्द है, कफ की वजह से सांस लेने में दिक्कत आ रही है, तो डॉक्टर की सलाह पर ही सिरप की सही खुराक दी जानी चाहिए. डॉक्टर को किसी विशेष बीमारी जैसे ब्रोंकाइटिस, अस्थमा के लक्षण दिखते हैं तो तब भी वह कफ सिरप दे सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें कि अगर हल्की खांसी है और कोई दूसरे गंभीर लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं तो कफ सिरप देने से बचें.
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खांसी होने पर क्या है दूसरे विकल्प
आप बच्चे की खांसी को कंट्रोल करने के लिए कूल मिस्ट ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं. गर्म भाप वाले ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल न करें. इनसे नाक के रास्ते में सूजन आ सकती है और सांस लेना मुश्किल हो सकता है. नेजल ड्रॉप या स्प्रे नाक का यूज कर सकते हैं. यह नाक के रास्ते को नम रखते हैं और नाक बंद होने से बचाते हैं. बच्चों के लिए ये ड्रॉप काफी कारगर माने जाते हैं.
कफ सिरप के लेबल को ध्यान से पढ़ें
एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बल्ब सिरिंज से नाक साफ़ करना बहुत असरदार होता है. बुखार और दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन का इस्तेमाल किया जा सकता है, माता-पिता को कफ सिरप देने से पहले उसके लेबल पर दिए गए इस्तेमाल के निर्देशों को ध्यान से पढ़ना और उनका पालन करना चाहिए. कभी भी ओवर डोज न दें और इस मामले में हमेशा डॉक्टरों से सलाह लें.
अभिषेक पांचाल