महाराष्ट्र के गृह मंत्री बोले- पीएम के सामने रखेंगे प्रवासी मजदूरों को भेजने का मसला

eAgenda Aajः महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि करीब 7.50 लाख प्रवासी मजदूर राज्य में हैं. लॉकडाउन तक इन्हें यहीं रहने के लिए कहा जा रहा है. ये मजदूर घर जाना चाहते हैं, लेकिन जो यहां रहने चाहते हैं, वो रह सकते हैं.

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महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 9:06 PM IST

  • ई-एजेंडा आजतक कार्यक्रम में शामिल हुए देशमुख
  • कहा- हमारे राज्य और दूसरे राज्यों में काफी फर्क है

देश में कोरोना संकट से निपटने के लिए 3 मई तक लॉकडाउन लागू है. इस महामारी के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं. राज्य के हालात पर 'ई-एजेंडा आजतक' कार्यक्रम में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि 27 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक होनी है. इस बैठक में हम राज्य में फंसे प्रवासी मजदूरों को भेजने का मसला उठाएंगे.

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लॉकडाउन 2.0 के आगे क्या है? सेशन में अनिल देशमुख ने कहा कि हमारे राज्य और अन्य दूसरे राज्यों में काफी फर्क है. महाराष्ट्र में काफी लोग बाहर से आते हैं. यहां बिहार, झारखंड, राजस्थान, झारखंड, यूपी से काफी तादाद में लोग हैं. जो लोग राज्य में हैं, उनका पुख्ता बंदोबस्त किया गया है.

उन्होंने कहा कि करीब 7.50 लाख प्रवासी मजदूर राज्य में हैं. लॉकडाउन तक इन्हें यहीं रहने के लिए कहा जा रहा है. ये मजदूर घर जाना चाहते हैं, लेकिन जो यहां रहना चाहते हैं, वो रह सकते हैं. राज्य का उनको पूरा सहयोग है.

राज्य में मॉब लिंचिंग और लॉकडाउन ब्रेक होने के सवाल पर गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि पालघर की घटना जहां घटी थी, वो आदिवासी एरिया है. इस तरह की घटना इंसानियत को नीचे करती है. वहां अफवाह थी कि कुछ लोग अलग-अलग भेष में आते हैं और बच्चों को लेकर जाते हैं. इस प्रकार की घटना ना हो, इसके पूरे इंताजम किए गए हैं. साथ ही कोरोना के खिलाफ राज्य की पुलिस पूरे दमखम के साथ काम कर रही है.

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हर राज्य की भौगोलिक स्थिति अलगः गहलोत

इससे पहले इसी सेशन में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि केंद्र के सहयोग के बिना राज्य काम नहीं कर सकते. देश में हर राज्य की भौगोलिक स्थिति अलग है. यहां सवाल केंद्र का आदेश मानने का नहीं बल्कि लोगों की जान बचाने का है. उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा मॉडल की मार्केंटिंग हमने नहीं की है बल्कि भारत सरकार ने की है. सीएम गहलोत ने कहा कि हर जगह की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति अलग-अलग होती है और वहां की स्थिति को समझना चाहिए.

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