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700 रुपये में पाले बीवी-बच्चे, महीनों रहे बेरोजगार, 'तारक मेहता' से चमकी 'बाघा' की किस्मत

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क
  • नई दिल्ली ,
  • 20 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:36 PM IST
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'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' टेलीविजन का लोकप्रिय शो है. इस शो ने कई लोगों की किस्मत चमकाई है. चंद कलाकारों में एक तन्मय वेकारिया उर्फ बाघा भी हैं. कांदिवली में जन्में तन्मय का एक मीडिल क्लास फैमिली से हैं, जिन्होंने एक्टर बनने से पहले बेरोजगारी और तंगी देखी है. एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों पर बात की थी. 

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तन्मय ने बताया कि हमारे घर में मेरे माता-पिता, मेरा भाई मनवित और मैं थे. आज मेरा भाई ऑस्ट्रेलिया में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर सेटल हो चुका है. मेरे पिता अरविंद वेकारिया गुजराती थिएटर में जाने-पहचाने नाम हैं. बचपन से उन्हें मंच पर देखना और उनके अभिनय ने मुझे एक्टिंग की ओर प्रेरित किया. 
 

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'1999 में ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद मैं रोल्स की तलाश में निकल पड़ा. सभी प्रोडक्शन हाउस में अपना पोर्टफोलियो दे डाला. ऑडिशन दिए और रोल्स मांगे, पर उस समय कुछ खास नहीं हुआ. यह फेज करीब एक से डेढ़ साल चला. सच कहूं तो ग्रेजुएट होने के बावजूद उस समय मेरी कोई इनकम नहीं थी.'

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एक्टर ने बताया कि मेरे लिए मुश्किलें तब बढ़ गईं जब पिता बूढ़े हो रहे थे और छोटा भाई पढ़ रहा था. पिता की थियेटर से मिलने वाली आमदनी सीमित थी. इसलिए उन्होंने मुझे स्थिर नौकरी पकड़ने को कहा. मैंने परिवार का सहारा बनने के लिए उनकी बात गंभीरता से ली और अपने चाचा के साथ काम शुरू कर दिया. 

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'मेरी पहली सैलरी मात्र 700 रुपए थी और साथ में सेकंड क्लास ट्रेन पास था. उस वक्त मैं पार्ट‑टाइम थिएटर भी करता रहा, पर चीजें ठीक नहीं चल रही थीं.  जो नाटक मैं करता था वो दर्शकों को पसंद नहीं आए और कई असफलताओं के बाद मैंने थिएटर छोड़ने का फैसला कर लिया. एक दिन दिलीप जोशी जो अब जेठालाल के नाम से लोकप्रिय हैं, एक नाटक डायरेक्ट कर रहे थे और मुझे एक छोटा रोल दिया.'

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'उस समय मेरी उम्र 30 साल थी. मैं शादीशुदा था और मेरी एक बेटी भी थी. जिम्मेदारियां बहुत थीं पर कमाई बहुत कम थी. नौकरी से मेरी सैलरी केवल 700 रुपए थी और कुछ एक्स्ट्रा पैसे पार्ट‑टाइम से मिलते थे. माता-पिता और बेटी का ख्याल रखना आसान नहीं था. शुक्र है कि उस नाटक ने मुझे नोटिस कराया. उसके बाद मुझे दीशा वकानी के साथ एक और नाटक मिला और तभी मेरी एक्टिंग की असल यात्रा शुरू हुई.'

 

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'मैंने टीवी की शुरुआत गुजराती शो से की. गुजराती इंडस्ट्री में काम करते हुए ज्यादा से ज्यादा मुझे दिन के 1200 रुपए तक मिलते थे. तब असित कुमार मोदी और जेडी माजेठिया ने हिंदी में शोज बनाना शुरू किया. उन्होंने मुझे उनके टीवी शोज में कैमियो करने का मौका दिया. मैंने बा बहू और बेबी, साराभाई Vs साराभाई जैसे पॉपुलर शोज में छोटे‑छोटे रोल किये. मैं राजन वाघधरेसे भी मिला जिन्होंने यश में छोटा रोल दिया.'

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तन्मय कहते हैं कि मुझे टीवी पर पहली बड़ी पहचान Maniben.com से मिली, जहां मैंने स्मृति ईरानी के छोटे भाई का किरदार निभाया था. Maniben के बाद अगले चार महीने मेरे पास काम नहीं था. उस दौरान मुझे किसी और शो का ऑफर नहीं मिला और न ही ऑडिशन कॉल आई. मैं तनाव में था. मैंने लगभग वापस अकाउंटिंग की नौकरी पकड़ लेने का मन बना लिया था. 

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वो कहते हैं कि इस बीच मुझे 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' से कॉल आई. मैंने बाघा का किरदार निभाते समय असल जिंदगी से प्रेरणा ली. मैं ऐसे एक शख्स को जानता था जिसकी अदा अलग थी. खड़े होने और व्यवहार करने का तरीका यूनिक था. मैंने वे छोटे‑छोटे हाव‑भाव अपने किरदार में शामिल किये और असित मोदी और दिलीप जोशी को दिखाए. 

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'असित मोदी और दिलीप जोशी को ये बहुत मजेदार और दिलचस्प लगा. मेरी पहली ही सीन के बाद उन्होंने कहा कि यह करैक्टर हिट होगा और एक बेंचमार्क बनेगा. इस तरह मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. जो शुरुआत में एक छोटा कैमियो था. वो स्थायी रोल बन गया और बाघा शो का सबसे प्यारा और महत्वपूर्ण किरदार बन गया.'

Photos: Instagram @tanmayvekariaofficial 

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