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'ओपन जीप में बदले कपड़े-घरों में जाकर किया टॉयलेट', बालिका वधु एक्ट्रेस ने सही तकलीफें, छलका दर्द!

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:47 PM IST
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टीवी इंडस्ट्री में आज कलाकारों के लिए वैनिटी वैन, मेकअप रूम और तमाम सुविधाएं आम बात हैं. लेकिन 'बालिका वधु' फेम एक्ट्रेस स्मिता बंसल का कहना है कि उनके दौर में हालात बिल्कुल अलग थे. हाल ही में उन्होंने अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष को याद करते हुए कई दिलचस्प किस्से सुनाए.
 

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बॉलीवुड बबल से बातचीत में स्मिता बंसल ने कहा- अब तो वैनिटी में भी लेवल हैं, लेकिन तब ऐसा कुछ नहीं होता था. ये हमारे लिए लग्जरी हुआ करती थीं. आजकल जो बच्चे इंडस्ट्री में आते हैं, उनके लिए पहले से ही सब सेट है. उन्हें वो वाला स्ट्रगल नहीं देखना पड़ रहा है जो हमने देखा.

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उन्होंने आगे कहा- ऐसा नहीं है कि मैं इसे एंजॉय नहीं करती. हमने दोनों दौर देखे हैं. मैं भी अब वैनिटी की मांग करती हूं. लेकिन अगर कहीं आउटडोर शूट में नहीं मिलती तो भी मैनेज कर सकती हूं. हम दोनों तरह से काम कर सकते हैं.

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पुराने दिनों को याद करते हुए स्मिता ने एक मजेदार लेकिन हैरान कर देने वाला किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा- एक बार मैं हॉरर शो की शूटिंग कर रही थी. वहां हमने ओपन जीप में कपड़े बदले थे. जीप के चारों तरफ पर्दे लगा दिए और उसके अंदर बैठकर कपड़े चेंज किए. 

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'क्योंकि तब न कुर्सियां होती थीं, न मेकअप रूम. हमने सोचा कि पेड़ के पीछे जाकर कपड़े बदलने से बेहतर है जीप का इस्तेमाल कर लिया जाए.'

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स्मिता ने बताया कि उस दौर में महिला कलाकारों को सबसे ज्यादा परेशानी वॉशरूम की होती थी. उन्होंने कहा- जब किसी गली या मोहल्ले में शूटिंग होती थी तो हमें लोगों के घरों का दरवाजा खटखटाकर कहना पड़ता था कि प्लीज हमें वॉशरूम इस्तेमाल करने दीजिए. 

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एक्ट्रेस ने बताया कि गांव और छोटे शहरों में शूटिंग के दौरान अलग-अलग तरह के अनुभव होते थे. 'आदमी तो कहीं भी चले जाते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए ऐसा संभव नहीं होता.' 

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स्मिता ने कहा- कई लोग बहुत खुश हो जाते थे कि उनके इलाके में शूटिंग हो रही है. वे हमारा स्वागत करते थे, पानी पिलाते थे और मदद भी करते थे. लेकिन कुछ लोग साफ मना कर देते थे कि हम शूटिंग वालों को घर में नहीं आने देंगे. हमने स्वागत भी देखा है और रिजेक्शन भी झेला है.

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स्मिता ने बताया कि बाद में मेकअप रूम तो आने लगे, लेकिन टॉयलेट की सुविधा तब भी नहीं थी. उन्होंने खुलासा किया- दिन में सिर्फ एक बार बस आती थी, जिसमें कलाकारों को वॉशरूम ले जाया जाता था. 

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'अगर बीच शूट के दौरान जरूरत पड़ जाए तो कोई ऑप्शन नहीं होता था. इसलिए हम लोग पानी ही नहीं पीते थे ताकि बार-बार वॉशरूम न जाना पड़े.'

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स्मिता का मानना है कि समय के साथ इंडस्ट्री में काफी बदलाव आया है और सुविधाएं बेहतर हुई हैं. उन्होंने कहा- धीरे-धीरे चीजें बदलीं और सुविधाएं आने लगीं. लेकिन वो संघर्ष भरे दिन भी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं. उन्हीं अनुभवों ने हमें मजबूत बनाया और बहुत कुछ सिखाया.

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