नेशनल अवॉर्ड: लता मंगेशकर पर लिखी किताब को मिला बेस्ट बुक ऑन सिनेमा का पुरस्कार

नेशनल अवॉर्ड 2017 में डॉक्यूमेंट्रीज और सिनेमा पर लिखी किताबों को भी पुरस्कार से नवाजा गया है.

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लता-सुरगाथा को मिला बेस्ट बुक ऑन सिनेमा का नेशनल अवॉर्ड लता-सुरगाथा को मिला बेस्ट बुक ऑन सिनेमा का नेशनल अवॉर्ड

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 07 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 3:23 PM IST

फीचर फिल्मों से अलग नेशनल अवॉर्ड्स देश भर में बनाई जा रही डॉक्यूमेंट्रीज और लिखी जा रही किताबों को भी राष्ट्रीय पटल पर सामने लाते हैं. लता मंगेशकर के बारे में लिखी गई यतींद्र मिश्र की पुस्तक 'लता-सुरगाथा' को जूरी ने बेस्ट बुक ऑन सिनेमा के स्वर्ण कमल पुरस्कार के लिए चुना.

कई संगीतकारों की जीवनी को रोचक और शोधपरक ग्रंथों के रूप में लिख चुके यतींद्र मिश्र की इस पुस्तक के तीन भागों में लता जी के अपने संस्मरण और उनके जीवन के रोचक प्रसंग और बचपन से लेकर अब तक की यादों का कारवां साथ-साथ चलता है.

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जूरी ने फिल्म समीक्षक जी धनंजयन को बेस्ट फिल्म क्रिटिक अवॉर्ड के लिए चुना है. उनके अब तक के अनुभव और फिल्मों की सटीक समीक्षा के लिए जूरी ने उनका चुनाव किया है.

डॉक्यूमेंट्री सेक्शन में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार और निर्देशक अमिताभ पाराशर की डॉक्यूमेटंरी 'द आइज ऑफ डार्कनेस' को जूरी स्पेशल मेंशन अवॉर्ड दिया जाएगा. भागलपुर अंखफोड़वा कांड के बाद बिहार में अब तक हुई आंखें फोड़ने की घटनाओं पर मार्मिक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने वाले पाराशर की इस फिल्म ने जूरी का दिल जीत लिया क्योंकि 1980-81 में भागलपुर जेल में कैदियों की आंखें फोड़ने की दिल दहला देने वाली घटना के बाद से अब तक लोगों ने आंख फोड़ कर बदला लेने को ही अपना तरीका बना लिया. बीते 27 सालों में आंख फोड़ कर बदला लेने की कई बर्बर घटनाएं हुईं. ये डॉक्यूमेंट्री इसी पर आधारित है.

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इसके अलावा असमिया में रामने बोरा और सिबानू बोरा की सिकार अरु सीत्कार के साथ सौम्या सदानंदन की चेंबाई को भी जूरी स्पेशल मेंशन अवॉर्ड के लिए चुना गया.

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