हिंदी सिनेमा में रेखा एक ऐसा नाम हैं जिसके साथ एक गहरी खामोशी महसूस होती है. लेकिन बात होती है रेखा की खूबसूरती की, अदाकारी की, उनके रिश्तों की. हमेशा मुस्कुराती दिखने वाली रेखा के दर्द पर लोगों ने ज्यादा बात नहीं की.
रेखा आज उस मुकाम पर हैं जहां पहुंचने के सपने देखे जाते हैं. ये शोहरत रेखा को भी खैरात में नहीं मिली. रेखा ने बुलंदियों को छूने के लिए जो संघर्ष किया वो मिसाल है. रेखा का असली नाम भानु रेखा गणेशन है.
रेखा ने अपने करियर की शुरुआत 13 साल की उम्र से की जब बच्चे स्कूल जाते
हैं. दोस्तों के साथ खेलते हैं. लेकिन इस उम्र में उन्हें बस तीन शब्द
सुनाई देने लगे, लाइट कैमरा, एक्शन.
इस दौर के बारे में रेखा कहती हैं, "मैं कभी भी एक्ट्रेस नहीं बनना चाहती थी. लेकिन घर के हालात ने मुझे वहां तक पहुंचा दिया."रेखा का जन्म 10 अक्टूबर 1954 में हुआ था.
पिता को देखा, पर महसूस नहीं किया
बेशक रेखा के पिता जैमिनी गणेशन थे, लेकिन उनकी जिंदगी में ये शब्द खालीपन लेकर आया था. एक
चैट शो में रेखा ने अपने पिता के बारे में कहा था, "मैंने उन्हें देखा, लेकिन महसूस नहीं किया. जब लोग फादर शब्द बोलते हें तो मुझे चर्च के फादर
सबसे पहले याद आते हैं. मैं ये भी नहीं कहूंगी कि मैंने उन्हें बहुत याद किया,
क्योंकि जो रिश्ता कभी था ही नहीं उसकी कमी कैसे महसूस होती."
एक बार सबसे
चौंका देने वाली बात रेखा ने ये कही थी, "मुझे नहीं लगता मेरे पिता ने कभी
मुझे देखा भी. हां मैंने उन्हें देखा है, उनकी फिल्में देखी हैं, लेकिन
रियल लाइफ में कभी महसूस नहीं किया."
रेखा तमिल फिल्मों के रास्ते हिंदी सिनेमा में आईं. शुरू में यहां भी उनका मजाक बनाया गया.
क्योंकि रेखा उस जमाने के सिनेमा की खूबसूरती के पैमाने में "बदसूरत" थीं. उनका रंग सांवला था, वो स्लिम ट्रीम नहीं थीं. लेकिन रेखा ने
खुद को बखूबी बदला, अपनी भाषा से लेकर बाहरी रूप रंग हर चीज को. क्या रेखा को सुन कर ऐसा कहा जा सकता है कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं है.
संघर्षों से गुजरकर धीरे-धीरे रेखा उस मुकाम पर भी पहुंच गईं जिसे कामयाबी कहते हैं. लेकिन
यहां भी रेखा की जिंदगी में बहुत बड़ी कमी थी. ये कमी थी एक ऐसे शख्स की
अपना "जीवन साथी" कहते हैं. रेखा की जिंदगी में इस कमी का अंदाजा इस बात से
लगाया जा सकता है, जब उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया असल में रेखा क्या
बनना चाहती थीं?
इस बारे में रेखा ने कहा था, "मैं कभी एक्ट्रेस नहीं बनना चाहती थी. बस
शादी करना, पति के साथ रहना और बहुत सारे बच्चे चाहती थी. ये तो किस्मत
थी जो मैं यहां तक (सिनेमा) पहुंच गई. हां मुझे इस बात का मलाल नहीं है, जो मिला
उसकी शुक्रगुजार हूं, लेकिन पहले मेरा सपना घर बसाना ही था."
रेखा की पर्सनल लाइफ में तमाम शख्स आए. यहां तक कि साथ काम करने वाले बेहद कम उम्र के लोगों के साथ उनके अफेयर के किस्से तक गढ़े गए. तमाम सच सामने नहीं आए, इन किस्सों के सामने जो रेखा नजर आईं, कभी उनका कोई "प्यार" रिश्ते में बदलता नहीं दिखा.
रेखा की
जिंदगी में दो मुकाम ऐसे आए जिसने उन्हें बदलकर रख दिया. पहला अमिताभ
बच्चन से रेखा की मुलाकात, दूसरा 1990 में मुकेश अग्रवाल से उनकी शादी.
रेखा ने एक इंटरव्यू में कहा था, "वैसे तो काम के मामले में अमित जी से मैं
सीनियर हूं, लेकिन उनके सामने खड़े होने के लिए हिम्मत नहीं थी. पहली बार
जब शॉट दिया तो घबराकर डायलॉग भूल गई. उन्होंने बस इतना कहा, हो सके तो
अपने डायलॉग याद कर लीजिएगा."
रेखा कहती हैं, "ये सुनना था और मेरे होश उड़
गए. मैंने उनके जैसा सुलझा, काम के प्रति गंभीरता कहीं नहीं
देखी थी. इन सारी चीजों का मुझ पर बहुत असर हुआ." रेखा अमिताभ की जोड़ी ने
10 फिल्मों में काम किया लेकिन फिर आपसी रिश्तों की जाने क्या तकरार हुर्इ, रेखा
और अमिताभ ये फिर कभी पर्दे पर साथ नहीं दिखे.
रेखा की जिंदगी का दूसरा बड़ा मुकाम था उनकी शादी. किसी शख्स से एक महीने
की मुलाकात के बाद ही रेखा ने शादी की खबर बताकर सनसनी फैला दी थी. लेकिन ये
रिश्ता खत्म होता उसके पहले मुकेश अग्रवाल ने शादी के महज एक साल के अंदर
आत्महत्या कर ली.
उस दौरान रेखा पर कई सवाल उठे लेकिन रेखा ने चुप्पी
बनाए रखी. वो इस दर्द के साथ भी जीते हुए आगे बढ़ गईं.एक जमाने में तो रेखा गॉसिप्स के लिए ऐसी सेलिब्रिटी बन गई थीं, जिनके बारे में पता नहीं क्या क्या कहा सुना गया.
बकौल रेखा उनकी जिंदगी खुली किताब की तरह है. लेकिन उनकी जिंदगी के खुले सफे आज
भी खामोशियों को बरकरार रखते हैं. रेखा की जिंदगी में सत्ता के
गलियोरों की आहट भी आई, वो आज भी कांजीवरम साड़ी और सिंदूर लगाए नजर
आती हैं.
लेकिन गहरी खामोशी उनकी आंखों में तैरती हुई आज भी दिखाई देती है.
जिनके लिए "शहरयार" ने उमराव जान के गीत में लिखा था, "इन आंखों की मस्ती के
मस्ताने हजारों हैं."
अपने जीवन को लेकर रेखा का फलसफा बहुत साफ़ है. वो कहती हैं, "मेरी जिंदगी में जो भी हुआ फिर उसका कभी मुझे कितना भी दर्द क्यों नहीं हुआ, लेकिन मैं उन सबकी तहे दिल से शुक्रगुजार हूं. क्योंकि अगर वो सब नहीं होता, तो आज मैं रेखा नहीं बनती."