मूसेवाला के गाने में क्यों था जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी का नाम? विवादित शब्दों पर हुआ था बवाल

दिलजीत दोसांझ की फिल्म Punjab '95 (सतलुज) ने जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी को फिर चर्चा में ला दिया है. लेकिन कुछ साल पहले सिद्धू मूसेवाला ने अपने विवादित गाने SCAPEGOAT में खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर (बीबी खालड़ा) का नाम लेकर नई बहस छेड़ दी थी.

Advertisement
मूसेवाला ने गाने में बीबी खालड़ा, बलबीर सिंह राजेवाल और सिमरनजीत सिंह मान जैसे नामों का जिक्र किया था (फाइल फोटो) मूसेवाला ने गाने में बीबी खालड़ा, बलबीर सिंह राजेवाल और सिमरनजीत सिंह मान जैसे नामों का जिक्र किया था (फाइल फोटो)

विष्णु रावल

  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:21 PM IST

10 मार्च 2022. मूसेवाला की हत्या से तीन महीने पहले. पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे आए. मानसा ने फैसला सुना दिया था. लाखों फैंस वाला सुपरस्टार, पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री का बड़ा नाम... सिद्धू मूसेवाला चुनाव हार गया.

फिर क्या था, मीम्स बनने लगे. कुछ पंजाबी सिंगर्स ने भी चुटकी लेने का मौका नहीं छोड़ा. गैरी संधू और करण औजला के सोशल मीडिया पोस्ट खूब चर्चा में रहे.

Advertisement

लेकिन मूसेवाला उन लोगों में नहीं थे जो जवाब प्रेस कॉन्फ्रेंस से देते. उनका हथियार माइक था. हार के करीब एक महीने बाद, 11 अप्रैल को उन्होंने अपना जवाब रिलीज कर दिया. नाम रखा—SCAPEGOAT. यानी 'बलि का बकरा'.

ये मूसेवाला का पलटवार था. उन लोगों के लिए, जो उनकी हार का जश्न मना रहे थे. गाने पर विवाद भी हुआ.

आम आदमी पार्टी, जिसने 2022 का चुनाव ऐतिहासिक बहुमत से जीता था, ने आरोप लगाया कि कांग्रेस उम्मीदवार रहे मूसेवाला ने गाने में पूरे पंजाब के मतदाताओं को गद्दार बताकर सबका अपमान किया है.

दरअसल, मूसेवाला ने अपनी हार का ठीकरा सिर्फ नेताओं पर नहीं, बल्कि पंजाब के वोटरों पर भी फोड़ दिया था.

जैसे, गाने में मूसेवाला कहते हैं, 'मैं पहला नहीं हूं जो हारा है. इस धरती (पंजाब) ने पहले भी कई सच्चे लोगों को हराया है.' फिर वो अपनी हार की तुलना कुछ ऐसी शख्सियतों से करते हैं, जिनका नाम पंजाब सम्मान के साथ लेता है. लेकिन चुनाव में वे हार गए थे.

Advertisement

तभी गाने में एक नाम आता है- बीबी खालड़ा.

मूसेवाला कहते हैं- दो-मुंहे (दोगले) लोगों ने तो बीबी खालड़ा तक को हरा दिया.

मानो, वो पंजाब की जनता से पूछ रहे थे कि क्या वोट देते वक्त उन्होंने हमेशा सही लोगों का साथ दिया?

(गाने में 50 सेकेंड के आसपास जिक्र)

बीबी खालड़ा, मतलब परमजीत कौर खालड़ा. मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी. वही जिन्होंने पंजाब में फर्जी एनकाउंटर और लापता लोगों के मामलों को दुनिया के सामने उजागर किया. जिनका किरदार दिलजीत दोसांझ से सतलुज (या Punjab '95) फिल्म में निभाया. फिल्म में बीबी खालड़ा का किरदार गीतिका विद्या ओहल्यान ने अदा किया है.

बीबी खालड़ा एक नहीं, दो बार चुनावी मैदान में उतरीं, लेकिन दोनों ही बार हार मिली.

पहली बार साल 1999. तरनतारन लोकसभा सीट. सरब हिंद शिरोमणि अकाली दल ने बीबी खालड़ा को मैदान में उतारा. यही वह इलाका है, जहां खालड़ा गांव भी पड़ता है. लेकिन नतीजे आए तो उन्हें सिर्फ करीब 38 हजार वोट मिले और वे तीसरे नंबर पर रहीं. जीत अकाली दल के उम्मीदवार तरलोचन सिंह तूर के हिस्से गई, जिन्हें तीन लाख से ज्यादा वोट मिले.

करीब दो दशक बाद उन्होंने फिर किस्मत आजमाई. इस बार 2019 में खडूर साहिब लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. लेकिन मंजिल फिर भी नहीं मिली. वो तीसरे नंबर पर रहीं.

Advertisement

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.

2024 के लोकसभा चुनाव में 70 साल की बीबी खालड़ा खुद उम्मीदवार नहीं थीं. इस बार वे प्रचार कर रही थीं अमृतपाल सिंह
के लिए. जेल में बंद होने और निर्दलीय चुनाव लड़ने के बावजूद अमृतपाल ने खडूर साहिब से बड़ी जीत हासिल की. उन पर खालिस्तान समर्थक आंदोलन को बढ़ावा देने के आरोप हैं और वे फिलहाल डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में बंद हैं.

खालड़ा का अपहरण और बदल गई परमजीत की जिंदगी

वैसे, 1995 तक परमजीत कौर खालड़ा की जिंदगी किसी आम पंजाबी परिवार की तरह ही थी. परमजीत कौर खालड़ा अपने पति के सामाजिक कामों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेती थीं. शादी के बाद वे जसवंत सिंह खालड़ा के साथ अमृतसर आ गई थीं. जसवंत नौकरी करते थे, जबकि बीए तक पढ़ीं परमजीत को गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियन की नौकरी मिल गई थी. जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही थी.

फिर 1995 आया... और सब कुछ बदल गया.

जसवंत सिंह खालड़ा के लापता होने के बाद परमजीत कौर की दुनिया भी बदल गई. लाइब्रेरी की शांत गलियों से निकलकर उन्हें इंसाफ की लड़ाई के लंबे रास्ते पर उतरना पड़ा.

धीरे-धीरे वे जसवंत के संगठन खालड़ा मिशन की सबसे अहम आवाजों में शामिल हो गईं और इंसाफ की उसी मुहिम को आगे बढ़ाया, जिसे उनके पति ने शुरू किया था.

Advertisement

सितंबर 1995 में जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. तब परमजीत ने ही पति के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण की अर्जी लगाई. फिर केस की पैरवी भी खुद परमजीत कौर ने की. फिर 15 नवंबर 1995 को कोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया. कोर्ट ने आरोपी तरनतारन के एसएसपी अजीत सिंह संधू को भी इलाके से हटाने का आदेश दिया था.

फिर करीब एक साल जांच के बाद CBI जिस निष्कर्ष पर पहुंची, उसने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी.

जांच एजेंसी ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा को तरनतारन के एक पुलिस ठिकाने पर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था और बाद में उनकी हत्या कर दी गई. CBI ने इस मामले में पंजाब पुलिस के कई कर्मियों पर मुकदमा चलाने की सिफारिश की. जांच में तत्कालीन एसएसपी अजीत सिंह संधू समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी सामने आए.

लेकिन मुकदमे की मंजिल तक पहुंचते-पहुंचते आरोपियों की लिस्ट बदल चुकी थी. मुख्य आरोपियों में शामिल तत्कालीन एसएसपी अजीत सिंह संधू की 1997 में मौत हो गई. उस समय इसे आत्महत्या बताया गया था. वहीं डीएसपी अशोक कुमार का भी ट्रायल पूरा होने से पहले निधन हो गया. एक अन्य आरोपी रशपाल सिंह को पहले ही बरी कर दिया गया था. आखिरकार इस मामले में पंजाब पुलिस के छह अधिकारियों पर मुकदमा चला.

Advertisement

जसवंत सिंह खालड़ा के लापता होने के करीब 10 साल बाद, 18 नवंबर 2005 को इस मामले में पहली बड़ी कानूनी मंजिल आई. पटियाला की अदालत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपिंदर सिंह ने फैसला सुनाते हुए सभी छह आरोपियों को खालड़ा के अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया.

अदालत ने डीएसपी जसपाल सिंह और अमरजीत सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई. वहीं सब-इंस्पेक्टर सतनाम सिंह, सुरिंदर पाल सिंह, जसबीर सिंह और हेड कांस्टेबल पृथीपाल सिंह को सात-सात साल की सजा दी गई. इन चारों को आपराधिक साजिश रचने और सबूत मिटाने का भी दोषी माना गया.

लेकिन सजा में यह फर्क ज्यादा दिन नहीं रहा. 16 अक्टूबर 2007 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले में बदलाव करते हुए बाकी चार दोषी पुलिसकर्मियों की सात साल की सजा भी बढ़ाकर उम्रकैद कर दी. इसके बाद इस मामले में दोषी ठहराए गए सभी छह पुलिस अधिकारियों को समान रूप से उम्रकैद की सजा मिली.

दोषियों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें वहां भी राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी और अपने फैसले में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौर में पंजाब पुलिस के कामकाज के तरीके पर कड़ी टिप्पणी भी की.

Advertisement

परमजीत कौर खालड़ा अब कहां हैं?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीबी खालड़ा फिलहाल अमेरिका में अपनी बेटी नवकिरन कौर के साथ रहती हैं. वहीं, उनका बेटा कनाडा में है. हालांकि, कार्यक्रमों के लिए वह पंजाब आती रहती हैं.

अब वापस लौटते हैं मूसेवाला के गाने पर. उन्होंने इसमें कुछ और लोगों का जिक्र किया है. जैसे बलबीर सिंह राजेवाल. वे किसान आंदोलन का बड़ा नाम थे. लेकिन पंजाब चुनाव 2022 में उनकी जमानत जब्त हो गई.

वो समराला विधानसभा सीट से लड़े थे. उन्हें संयुक्त समाज मोर्चा (SSM) ने मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी घोषित किया था. यह किसान संगठनों का राजनीतिक मोर्चा था.

गाने में मूसेवाला, शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के प्रधान सिमरनजीत सिंह मान का नाम भी लेते हैं. वह 2022 में अमरगढ़ विधानसभा क्षेत्र से हारे थे.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »