दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को लेकर इस समय बड़ी खबर सामने आ रही है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, बिना किसी सेंसर सर्टिफिकेट के फिल्म 'सतलुज' की स्ट्रीमिंग करना कानूनी रूप से भारी पड़ गया है. नियमों के तहत बिना सर्टिफिकेट के किसी भी फिल्म को इस तरह दिखाना पूरी तरह गैर-कानूनी है और अब इस मामले पर सरकार सख्त एक्शन लेने के मूड में है.
जानकारी के मुताबिक, इस बड़ी लापरवाही के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार के पास है. वहीं, केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस मामले में कदम उठाते हुए बिना सर्टिफिकेशन के चल रही इस फिल्म को तुरंत हटाने के निर्देश दिए थे, जिस पर कार्रवाई की भी जा चुकी है.
हालांकि अब मामला यहीं खत्म नहीं होता. इस अनसेंसर्ड फिल्म को अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाने वाले ओटीटी प्लेयर 'Zee5' के खिलाफ भी अब सरकार कानूनी कार्रवाई करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. इस विवाद के बाद अब सरकार ओटीटी पर फिल्मों के रिलीज के नियमों को हमेशा के लिए बदलने की तैयारी में जुट गई है.
IT नियम में होगा बदलाव?
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर फिल्मों के डायरेक्ट डिजिटल प्रीमियर के लिए सेंसर बोर्ड (CBFC) का सर्टिफिकेट अनिवार्य करने की दिशा में सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है. सूत्रों की मानें तो इस नए नियम को लागू करने के लिए देश के मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी नियमों (IT Rules) में बड़ा बदलाव किया जा सकता है. अगर यह बदलाव होता है, तो भविष्य में किसी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए बिना सेंसर बोर्ड की मंजूरी के कोई भी नई फिल्म रिलीज करना नामुमकिन हो जाएगा.
हिमांशु मिश्रा