चश्मेबद्दूर के 40 साल: जब पेंसिल से मूंछे बनाकर सेट पर पहुंचे राकेश बेदी, फिर हुआ ये

चालीस साल पहले हुए शूटिंग के दिनों को याद करते हुए राकेश बेदी आजतक डिजिटल बताते हैं, 'यादों का तो पिटारा है. बहुत सी दिलचस्प कहानियां रही हैं. एक बात जो कभी नहीं भूलती, फिल्म में आप मेरे लुक की बात करें, तो मैंने तलवार कट मूंछ रखी है. होठों के ऊपर एक पतली सी लाइन होती है, उस जमाने में यह मूंछ काफी पॉप्युलर भी रही है.'

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RAKESH BEDI RAKESH BEDI

नेहा वर्मा

  • मुंबई,
  • 12 मई 2021,
  • अपडेटेड 8:24 PM IST

बॉलीवुड की आइकॉनिक फिल्मों में से एक चश्मे बद्दूर को रिलीज हुए चालीस साल हो गए हैं. फिल्म का अहम किरदार रहें राकेश बेदी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शूटिंग की तस्वीर शेयर कर पुराने दिनों को याद कर भावुक हो उठे.

कैप्शन में राकेश लिखते हैं, 'चश्मेबद्दूर, एक बेहद ही आइकॉनिक फिल्म इस हफ्ते अपना चालीसवें साल का जश्न मना रही है. यह आज भी इतना ही फ्रेश और स्ट्रेस बस्टर का काम करता है. तस्वीर में अपने दोनों दोस्तों (फारुख शेख, रवि बसवानी) को बहुत मिस करता हूं.' 

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चालीस साल पहले हुए शूटिंग के दिनों को याद करते हुए राकेश बेदी आजतक डिजिटल बताते हैं, 'यादों का तो पिटारा है. बहुत सी दिलचस्प कहानियां रही हैं. एक बात जो कभी नहीं भूलती, फिल्म में आप मेरे लुक की बात करें, तो मैंने तलवार कट मूंछ रखी है. होठों के ऊपर एक पतली सी लाइन होती है, उस जमाने में यह मूंछ काफी पॉप्युलर भी रही है. हम शूटिंग दिल्ली में कर रहे थे. इसी बीच मेरी एक और फिल्म की शूटिंग मुंबई में निकल आई. उसके लिए मैं मुंबई आया, यहां मेरा कंटीन्यूटी का सीन था, जहां मैं बिना मूछों के हूं.'

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'मुंबई में डायरेक्टर ने कहा कि मूंछ हटा दो. मैं दुविधा में था कि वहां भी कंटीन्यूटी का सवाल है. डायरेक्टर का कहा मानकर मैंने अपनी मूछों की बली दे दी. चश्मेबद्दुर की डायरेक्टर सई परांजपे, वैसे तो बहुत अच्छी हैं, लेकिन उनका गुस्सा कभी भी भड़क जाता था. उन्होंने सेट पर हम सभी को काफी डांट लगाई है. दिल्ली पहुंचकर मैं डरा हुआ था, अगले दिन शूटिंग और मूंछ तो आएगी नहीं. ऐसे में पेंसिल से अपनी मूंछ बनाई और शूटिंग पर चला गया. तीन-चार दिन तक सब ठीक रहा, लेकिन एक दिन मुझे पसीना बहुत आया और मैंने अपना मुंह पोछा तौलिये से तो आधी मूंछ मेरी गायब हो गई. वहां फारुख और सभी क्रू मेंबर्स मुझे देखकर हंसने लगे. डायरेक्टर से डांट तो पड़ी, लेकिन मैंने यह लॉजिक दिया कि चार दिन तक नहीं पता चला तो आगे कैसे पता चलेगा. सो रिलैक्स...'

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फारुख मुझे कभी पैसे देने नहीं देता था
मेरी और फारुख की दोस्ती काफी अरसे से रही है. हमने साथ में थिएटर ग्रुप में भी काम किया है. फारुख के बारे में एक दो बातें, जो बहुत कम लोग जानते हैं. एक तो उन्हें खाने का बहुत शौक था और दूसरा खिलाने का. मैंने उस तरह का आदमी नहीं देखा आजतक. हम दिल्ली में शूटिंग के दौरान रोजाना शाम को किसी फेमस स्ट्रीट फूड का रास्ता ढूंढा करते थे. वहां जाकर फारुख बिल देने नहीं देते थे, चाहे आप रोजाना क्यों ही न खा रहे हो. वो न शेयर करते थे पैसे, न ही किसी को देने देते थे. दूसरी बात उनकी फिजिक कमाल की थी. कुर्ते के नीचे उनकी बॉडी बिलकुल पत्थर की थी. अपने मसल्स, बाइसेप्स का कभी शो ऑफ नहीं किया. आज के लोग अपनी बॉडी की नुमाइश करने लगते हैं. इस हफ्ते तो फारुख और रवि की बहुत याद आ रही है. चालीस साल की दोस्ती कम नहीं होती है.

 

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