UP Elections: भटकता नजर आ रहा कांग्रेस का 'मिशन यूपी', प्रियंका गांधी के सामने है बड़ी चुनौती

कांग्रेस (Congress) का प्रदर्शन लगातार खराब रहा है. 2017 में हुए चुनाव में कांग्रेस के सात विधायक ही चुने गए थे. इस बार के चुनाव के लिए प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने यूपी में कांग्रेस का मोर्चा संभाला है.

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हाल ही में प्रियंका गांधी ने यूपी दौरा किया था. (फाइल फोटो) हाल ही में प्रियंका गांधी ने यूपी दौरा किया था. (फाइल फोटो)

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 11:38 AM IST
  • लखनऊ दौरे के दौरान मिला था खराब फीडबैक
  • यूपी कांग्रेस अध्यक्ष से भी लोगों की नाराजगी
  • सपा से गठबंधन के पक्ष में हैं कई नेता

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (Vidhan Sabha  Election) को लेकर राजनीतिक दल तैयारियों में जुट गए हैं. सूबे में कांग्रेस (Congress) का प्रदर्शन लगातार खराब रहा है. 2017 में हुए चुनाव में कांग्रेस के सात विधायक ही चुने गए थे. इस बार के चुनाव के लिए प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने यूपी में कांग्रेस का मोर्चा संभाला है. प्रियंका गांधी ने हाल ही में यूपी दौरा भी किया था लेकिन उनका मिशन यूपी भटका हुआ लग रहा है.

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सुर्खियां बटरोने की कोशिश

कांग्रेस की छवि को मजबूत करने के लिए प्रियंका हर संभव प्रयास कर रही हैं. सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर सुर्खियां बटोरना भी इसमें शामिल है. हाल ही में प्रियंका लखनऊ दौरे पर निकली थीं. हजरतगंज में गांधी स्टैच्यू पर वह माल्यार्पण करने पहुंची थीं.  कांग्रेस के ऐसे कार्यक्रमों में अधिकतर पुराने चेहरे और कुछ नए नजर आ जाते हैं. चित्रकूट से लेकर बांदा तक कार्यकर्ताओं का जमावड़ा था. भीड़ बहुत ज्यादा नहीं थी मगर कार्यकर्ताओं में उत्साह पूरा था. श्रद्धांजलि देने पहुंची प्रियंका एकाएक गांधी स्टैच्यू के सामने मौन धरने पर बैठ गईं. वह प्रदेश में हुई सियासी हिंसा का विरोध जता रही थीं. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सुर्खियों के लिए हाथ पैर मार रही है. 

प्रियंका की साख पर भी लगेगा बट्टा!

यूपी गांधी परिवार की पुश्तैनी कर्मभूमि रही है. प्रियंका लीड रोल में आई तो ऐसा लगा 2022 के चुनाव प्रदेश में पार्टी का रिवाइवल होगा. पर अभी तो हाल यह है के नेता बंद कमरों में ये सोच रहे हैं कि अगर गठबंधन नहीं हुआ तो सभी सीटों पर लड़ने के लिए उम्मीदवार कहां से आएंगे? सबसे बड़ी बात तो यह है कि अगर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का परफॉर्मेंस और खराब होता है तो सबसे बड़ा बट्टा प्रदेश महासचिव प्रियंका गांधी की छवि पर लगेगा. प्रियंका निजी कारणों से विदेश गईं है. मगर रवाना होने से पहले उन्होंने जिन नेताओं की उम्मीदवारी तय है उनको फोन करके चुनाव की तैयारी करने को कहा है. इनमें पूर्व विधायक और पार्टी के बड़े नेता भी शामिल हैं.

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वर्किंग प्रेसिडेंट का फार्मूला

इसी बीच चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश संगठन में कुछ नई नियुक्तियां कर सकती है. प्रदेश में पार्टी को कार्यकारी अध्यक्ष मिल सकता है. ब्राह्मणों को लुभाने के लिए वर्किंग प्रेसिडेंट के तौर पर किसी ब्राह्मण चेहरे को आगे किया जा सकता है. पहले से ही समाजवादी पार्टी और बसपा में ब्राह्मणों को लुभाने के लिए होड़ लगी है. ब्राह्मण, कांग्रेस पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक रहा है, लेकिन बीते सालों में उन्होंने बसपा और भाजपा का दामन थामा.

सूत्रों के मुताबिक इस पद के लिए ललितेश त्रिपाठी, प्रमोद तिवारी जैसे कई नाम पर चर्चा हो रही है. सबसे आगे पूर्व सांसद राजेश मिश्रा का नाम चल रहा है. राजेश मिश्रा बनारस से हैं. पार्टी संगठन में अलग-अलग पदों पर रहे हैं. इसकी भी संभावना है कि कैंपेन कमिटी के अध्यक्ष के तौर पर प्रमोद तिवारी को जिम्मेदारी दी जाए. हालांकि प्रमोद तिवारी की दिलचस्पी दिल्ली में ज्यादा और प्रदेश की राजनीति में कम है. उनकी बेटी आराधना मिश्रा विधायक दल की नेता है और प्रियंका की करीबी मानी जाती है.

खराब फीडबैक ने बढ़ाई टेंशन

हाल ही में अपने लखनऊ दौरे के दौरान प्रियंका को काफी खराब फीडबैक मिला था. कार्यकर्ताओं ने प्रियंका से पार्टी में चल रही कुछ नेताओं की मनमानी को लेकर शिकायत की थी. सूत्रों के मुताबिक कई लोगों ने प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी नाराजगी जाहिर की थी. कार्यकर्ताओं ने कहा कि पार्टी के भीतर गुटबाजी है जिसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा है. यही नहीं कुछ नेताओं ने प्रियंका को कहा कि उनको पार्टी के बड़े पदाधिकारी हकीकत से भटका रहे हैं. नेताओं को जमीनी हकीकत का पता नहीं है जिसके चलते 2022 में पार्टी का परफॉर्मेंस काफी खराब रहेगा. प्रियंका के 3 दिन के दौरे में नेताओं ने यह भी कहा कि मौजूदा हालातों में कांग्रेस की सीटें और कम होने के आसार है. 

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दरअसल उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद जिला और ब्लॉक लेवल पर बदलाव किए गए. कई पुराने नेताओं की छुट्टी हुई और बाहरी को ज्यादा तवज्जो दी गई. प्रदेश अध्यक्ष लेकर संगठन में हुए बदलाव को लेकर प्रियंका को तमाम शिकायतें आई हैं. हालांकि इस बदलाव के खुद प्रियंका जिम्मेदार हैं.


बड़े गैप के बाद लखनऊ लौटीं

प्रियंका इस बात को लेकर भी नाखुश थी कि मीडिया में यह संदेश गया है कि वो डेढ़ साल बाद प्रदेश वापस लौटीं हैं. हालांकि इस बीच वो पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल भी जा चुकीं हैं. मगर ये हकीकत है कि वो कुछ 15 महीने बाद प्रदेश की राजधानी वापस लौटीं. जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे है कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ रही हैं. यही वजह है कांग्रेस का एक बड़ा धड़ गठबंधन का रास्ता सबसे सुरक्षित मान रहा है. अगर कांग्रेस का सपा से गठबंधन होता है तो कम से कम कांग्रेस के लिए दिखाने को शायद कुछ हो. इससे प्रियंका पर भी उतनी आंच नहीं आएगी और पार्टी की किरकिरी होने से भी बच जाएगी. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की अग्निपरीक्षा के पहले ही  प्रियंका का मिशन यूपी भटका हुआ नजर आ रहा है. सवाल ये कि जो दो साल से नहीं हुआ अब इतने कम समय में हो पाएगा? क्या प्रियंका प्रदेश में पार्टी की नैय्या पार लगा पाएंगीं? इस सवाल का जवाब प्रियंका के सियासी करियर के ग्राफ की दिशा तय करेगा.

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